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जलवायु परिवर्तन के प्रति स्थिति अनुकूलता और पूर्वानुमान क्षमता

पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में बताया कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन भारतीय मौसम विज्ञान विभाग अपने अवलोकन नेटवर्क और संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल द्वारा गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु सहित देश भर में मौसम और जलवायु की निरंतर निगरानी रखता है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय संस्थानों के प्रमुख जलवायु और जोखिम आकलन में मासिक और वार्षिक जलवायु सारांश, राज्यवार जलवायु विवरण और जलवायु निदान बुलेटिन का नियमित प्रकाशन शामिल है। इसमें पिछले 30 वर्षों में अत्यधिक तापमान, लू, शीत लहर और वर्षा की परिवर्तनशीलता सहित क्षेत्रीय, राज्य और जिला स्तर पर जलवायु परिवर्तन, का दस्तावेजीकरण किया जाता है।

राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान – एनआईओटी उत्तरी हिंद महासागर के लिए महासागरीय लंगर नेटवर्क, तटीय उत्प्लव संकेतक, उच्च आवृत्ति रडार और हिंद महासागर क्षेत्र में सुनामी उत्प्लव संकेतक का रखरखाव करता है, जिसमें अरब सागर में दो उत्प्लव संकेतक शामिल हैं, ताकि वास्तविक समय में मौसम संबंधी और समुद्र विज्ञान संबंधी मापदंडों की निगरानी की जा सके।

भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र – आईएनसीओआईएस ने गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु सहित पूरी भारतीय तटरेखा के लिए 1:100,000 के पैमाने पर तटीय भेद्यता सूचकांक तैयार किया है। इस वैज्ञानिक उपकरण का उपयोग समुद्र के स्तर में वृद्धि, चक्रवात, तटीय कटाव और ज्वारीय गतिशीलता और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण तटीय क्षेत्रों पर पड़ने वाले खतरों और जोखिमों का आकलन करने के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त, तटीय जोखिम आकलन और आपदा तैयारियों में सहायता के लिए 1:25,000 के पैमाने पर तटीय बहु-खतरा भेद्यता मानचित्रण किया गया है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग जिला और प्रखंड स्तर पर मौसम की निगरानी के लिए डॉप्लर मौसम रडार, स्वचालित मौसम स्टेशन और वर्षामापी स्टेशनों से युक्त एक राष्ट्रव्यापी अवलोकन नेटवर्क संचालित करता है।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान तटीय क्षेत्रों में समर्पित उच्च आवृत्ति (एचएफ) रडार के जोड़े स्थापित करता है, जिनमें गुजरात के वासिबोरसी और जेगरी स्थित रडार शामिल हैं। इसके अलावा, महासागर के निरंतर अवलोकन के लिए खुले महासागर में लंगर डाले गए उत्प्लव संकेतक का नेटवर्क भी संचालित करता है। राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र – एनसीसीआर शहरी बाढ़ प्रबंधन में सहायता के लिए मुंबई नगर निगम क्षेत्र के लगभग 400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में शहरी वर्षा पूर्वानुमान और बाढ़ मानचित्रण प्रदान करता है।

मौसम संबंधी चेतावनियां और अलर्ट कई डिजिटल प्लेटफार्मों द्वारा प्रसारित किए जाते हैं, जिनमें मौसम, मेघदूत, दामिनी, उमंग और समुद्र मोबाइल एप्लिकेशन के साथ ही कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल पर आधारित सचेत प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इनसे अंतिम छोर तक समय पर जानकारी का प्रसार सुनिश्चित होता है।

समुद्री और मौसम संबंधी अवलोकन नेटवर्क से प्राप्त वास्तविक समय डेटा को उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले परिचालन समुद्री और वायुमंडलीय मॉडलों में समाहित किया जाता है ताकि पूर्वानुमान की सटीकता बढ़ायी जा सके और आपदा जोखिम कम करने में सहायता मिल सके।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र द्वारा उत्पन्न वैज्ञानिक डेटा और पूर्वानुमान गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और जिला कलेक्टरों को चक्रवात, तूफान और ऊंची लहरें उठने जैसी गंभीर मौसम घटनाओं की अग्रिम तैयारी और निगरानी के लिए प्रसारित किए जाते हैं।

पंचायत मौसम सेवा पहल के तहत, मौसम पूर्वानुमानों को ई-ग्रामस्वराज और ई-मंचित्र प्लेटफार्मों के साथ संबद्ध किया गया है, जिससे व्हाट्सऐप द्वारा पंचायत प्रतिनिधियों तक सलाह सीधे तौर पर पहुंचाना संभव है। मौसम विभाग कृषि सखियों, पशु सखियों और 373 जिलों में 7,300 से अधिक किसान जागरूकता कार्यक्रमों द्वारा कृषि-मौसम विज्ञान संबंधी परामर्श सेवाएं भी प्रदान करता है। मिशन मौसम के तहत, मौसम विभाग कल्प और मौसम संकल्प जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों द्वारा गतिशील, स्थान-विशिष्ट, फसल-विशिष्ट और फसल-चरण-विशिष्ट सलाहों के साथ ही प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान देता है, ताकि सूचित निर्णय लेने में सहायता मिल सके और आपदा तैयारियां बढ़ाई जा सके।

मौसम मिशन को मौसम पूर्वानुमान, प्रारंभिक चेतावनी सेवाओं और आपदा तैयारियों में सुधार के लिए परिवर्तनकारी और परिणामोन्मुखी राष्ट्रीय पहल के रूप में विचारित किया गया है। भारत के प्रमुख विकसित देशों के नेटवर्क से तुलनीय मौजूदा अवलोकन नेटवर्क के विश्लेषण के आधार पर, इस मिशन में डॉप्लर मौसम रडार, आरएस/आरडब्ल्यू स्टेशन, डिसड्रोमीटर, पवन प्रोफाइलर, माइक्रोवेव रेडियोमीटर, सौर विकिरण निगरानी स्टेशन, एरोसोल/रमन लिडार, स्काईरेडियोमीटर और बीसी/ईसी-ओसी एरोसोल निगरानी स्टेशनों की स्थापना का प्रावधान किया गया है।

इस ढ़ांचे को स्थापित करने से मापन योग्य परिणाम जुड़े हैं, जिनमें 2030 तक पूर्वानुमान की सटीकता में 10-15 प्रतिशत सुधार, 5 किलोमीटर × 5 किलोमीटर के स्थानिक रिज़ॉल्यूशन पर गंभीर मौसम संबंधी खतरों का पूर्वानुमान, प्रारंभिक चेतावनियों के लिए अधिक समय, सभी गंभीर मौसम घटनाओं के लिए गतिशील प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान और जोखिम-आधारित चेतावनियां, और वर्ष 2030 तक प्रत्येक घर तक प्रारंभिक चेतावनियों का प्रसार शामिल है। मिशन मौसम इस प्रकार आपदा जोखिम न्यूनीकरण को सुदृढ़ बनाएगा और लोगों तथा मौसम-संवेदनशील सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों को मौसम और जलवायु संबंधी बेहतर जानकारी सुनिश्चित करेगा।

राज्यों में संचालित प्रमुख मौसम और महासागर अवलोकन सुविधाओं में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) का अवलोकन नेटवर्क शामिल है, जिसमें डॉप्लर मौसम रडार, स्वचालित मौसम स्टेशन और वर्षामापी स्टेशन शामिल हैं, साथ ही राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा अनुरक्षित महासागर अवलोकन सुविधाएं भी शामिल हैं, जिनमें उत्तरी हिंद महासागर के लिए महासागर लंगर नेटवर्क, तटीय उत्प्लव संकेतक, उच्च आवृत्ति युक्त रडार, सुनामी उत्प्लव संकेतक और खुले महासागर में लंगर वाले उत्प्लव संकेतक शामिल हैं।

गुजरात में, वासिबोरसी और जेगरी में विशेष तटीय उच्च आवृत्ति रडार के जोड़े स्थापित किए गए हैं। महाराष्ट्र में, राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र शहरी बाढ़ प्रबंधन में सहायता के लिए मुंबई नगर निगम क्षेत्र के लगभग 400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में शहरी वर्षा पूर्वानुमान और बाढ़ मानचित्रण प्रदान करता है। तटीय और महासागरीय अवलोकन प्रणालियां, मौसम विज्ञान अवलोकन नेटवर्क के साथ मिलकर, इन राज्यों में मौसम और समुद्र विज्ञान संबंधी स्थितियों की निरंतर वास्तविक समय निगरानी प्रदान करती हैं।

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