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गांधीनगर में श्रम कानून और सामाजिक सुरक्षा अनुपालन पर पीडीयूएनएएसएस.- जीएनएलयू कार्यान्‍वयन कार्यक्रम का उद्घाटन संपन्न हुआ

श्रम कानून और सामाजिक सुरक्षा अनुपालन (ईपीएफओ एट कोर) पर कार्यान्‍वयन विकास कार्यक्रम का पहला बैच 12 सितंबर 2026 को गुजरात राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (जीएनएलयू) में समापन समारोह और प्रमाण पत्र वितरण के साथ संपन्न हुआ। जीएनएलयू और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की सर्वोच्च प्रशिक्षण अकादमी पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (पीडीयूएनएएसएस) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित, तीन महीने के इस कार्यान्‍वयन कार्यक्रम में 60 उद्योग विशेषज्ञों को एक साथ लाया गया, जिन्होंने गहन हाइब्रिड शिक्षण, व्यावहारिक केस स्टडी और लिखित मूल्यांकन में भाग लिया।

इस कार्यक्रम की परिकल्पना अपर केंद्रीय पीएफ आयुक्त (मुख्यालय) और पीडीयूएनएएसएस के निदेशक श्री कुमार रोहित ने की थी, जिसका उद्देश्य सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक उद्यम अनुपालन के बीच मौजूद अंतर को दूर करना था। इस पहल का लक्ष्य कॉरपोरेट गवर्नेंस में एक सांस्कृतिक बदलाव लाना है, ताकि रक्षात्मक और प्रतिक्रियात्मक अनुपालन से हटकर जागरूक और नैतिक अनुपालन को बढ़ावा दिया जा सके।

यह परिकल्पना जीएनएलयू के निदेशक प्रो. (डॉ.) एस. शांताकुमार के निरंतर सहयोग से संस्थागत रूप धारण कर सकी, जिनके अकादमिक नेतृत्व और प्रतिबद्धता ने सामाजिक सुरक्षा शिक्षा के लिए एक विशेष मंच स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। जीएनएलयू के रजिस्ट्रार डॉ. नितिन मलिक ने सक्रिय संस्थागत सुविधा और प्रशासनिक सहयोग प्रदान किया।

इस कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता इसका गतिशील और निरंतर विकसित होता पाठ्यक्रम था, जिसे वैधानिक सुधारों, तकनीकी प्रगति और बदलते कार्यस्थल परिवेशों के अनुरूप निरंतर प्रतिक्रिया देने के लिए डिज़ाइन किया गया था। पहले चरण के दौरान सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के अंतर्गत बदलाव लाने वाली प्रणालियों, संशोधित ईपीएफ, ईपीएस और ईडीएलआई योजना ढांचे और ईपीएफओ के डिजिटल पोर्टल के सक्रिय कार्यप्रवाह के अनुरूप परिचालन पद्धतियों को शामिल करने के लिए पाठ्यक्रम को समयानुसार अद्यतन किया गया था।

29 मई, 2026 को लांच किया गया यह कार्यक्रम 5 जून को प्रारंभ हुआ और इसमें 16 वरिष्ठ विशेषज्ञों द्वारा संचालित 23 संवादात्मक सत्र शामिल थे, जिनमें ईपीएफओ के नीति निर्माता और कानूनी शिक्षाविद शामिल थे। कार्यक्रम का समापन 9 से 12 सितंबर तक जीएनएलयू में आयोजित चार दिवसीय परिसर प्रशिक्षण कार्यक्रम के साथ हुआ, जिसमें व्यावहारिक अनुपालन केस स्टडी और औपचारिक लिखित मूल्यांकन शामिल थे।

समापन समारोह की अध्यक्षता मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति केजे ठाकर ने की, जो गुजरात और इलाहाबाद उच्च न्यायालयों के पूर्व न्यायाधीश और गुजरात राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष हैं। न्यायमूर्ति ठाकर ने सामाजिक कल्याण के संवैधानिक और मानवीय पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भविष्य निधि कानून भारत के कार्यबल के लिए एक मूलभूत सुरक्षा कवच का काम करता है। उन्‍होंने अपने न्यायिक अनुभव के आधार पर संयुक्त संस्थागत पहल की सराहना की और श्री कुमार रोहित को एक महत्वपूर्ण व्यवस्थागत आवश्यकता को पहचानने और उसे एक प्रभावशाली कार्यकारी शिक्षा कार्यक्रम में परिणत करने के लिए बधाई दी।

श्री कुमार रोहित ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा, “यह पहल उद्यम प्रशासन में एक स्थायी सांस्कृतिक बदलाव लाने के लिए बनाई गई है, जो रक्षात्मक, खानापूर्ति वाली प्रक्रिया से हटकर जागरूक और नैतिक अनुपालन की ओर अग्रसर है। जब स्रोत स्तर पर ही सटीक अनुपालन सुनिश्चित किया जाता है, तो परिणाम स्पष्ट होते हैं, प्रशासनिक बाधाएं दूर होती हैं और सामाजिक सुरक्षा के लाभ श्रमिकों तक शीघ्रता और सम्मान के साथ पहुंचते हैं। पहले बैच के सदस्य के रूप में आप भारत के औद्योगिक परिदृश्य में इस मानक के पेशेवर और राजदूत होने की जिम्मेदारी निभाते हैं।”

इस समारोह में श्री सुदीप्त घोष, अपर सीपीएफसी (गुजरात) और श्री मनोरंजन कुमार, आरपीएफसी-I, पीडीयूएनएएसएस सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। डॉ. हार्दिक पारिख ने कार्यक्रम की रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें इसके शैक्षणिक परिणामों और प्रतिभागियों के प्रदर्शन का विवरण दिया गया था।

पहले कार्यक्रम को देशभर से मिली जबरदस्त सराहना को देखते हुए पीडीयूएनएएसएस और जीएनएलयू ने घोषणा की है कि दूसरे बैच के लिए प्रवेश प्रक्रिया शीघ्र ही शुरू होगी।

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