श्री जयंत चौधरी ने आईटीआई को सतत रोजगार से जुड़े उद्योग-उन्मुख संस्थानों में बदलने का आह्वान किया
राज्यों ने पीएम-सेतु, विकेंद्रीकृत योजना, उद्योग साझेदारी और कार्यबल गतिशीलता पर विचार-विमर्श किया
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने आज कोलकाता में कौशल मंत्रियों का क्षेत्रीय सम्मेलन ‘कौशल मंथन’ आयोजित किया। सम्मेलन में भाग लेने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के मंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों ने केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने और उद्योग से जुड़े, परिणामोन्मुख कौशल विकास तंत्र को आगे बढ़ाने के लिए विचार-विमर्श किया।
सम्मेलन की अध्यक्षता श्री जयंत चौधरी, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री, भारत सरकार ने की।
इस सम्मेलन में पश्चिम बंगाल सरकार के उच्च शिक्षा विभाग तथा तकनीकी शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल विकास विभाग के प्रभारी मंत्री श्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय; गुजरात सरकार के श्रम, कौशल विकास और रोजगार विभाग के मंत्री श्री कुँवरजीभाई मोहनभाई बावलिया; छत्तीसगढ़ सरकार के कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब; मध्य प्रदेश सरकार के कौशल विकास और रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. गौतम टेटवाल; ओडिशा सरकार के उद्योग, कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संपद चंद्र स्वैन तथा तकनीकी शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल विकास विभाग के राज्य मंत्री डॉ. हरे कृष्ण बेड़ा उपस्थित रहे। गोवा, झारखंड और केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भी सम्मेलन में भाग लिया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री जयंत चौधरी ने कहा, “भारत के युवा असाधारण महत्वाकांक्षा, अनुकूलनशीलता और क्षमता से परिपूर्ण हैं। हमारी जिम्मेदारी है कि इस क्षमता को भविष्य के लिए तैयार, उद्योग द्वारा महत्व दिए जाने वाले कौशल और वास्तविक अवसरों से जोड़ा जाए। पीएम-सेतु हमें आईटीआई को उत्कृष्टता, नवाचार और आकांक्षा के जीवंत केंद्रों के रूप में नए सिरे से विकसित करने का ऐतिहासिक अवसर प्रदान करता है। इसे साकार करने के लिए केंद्र, राज्यों, उद्योग और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत समन्वय आवश्यक होगा, जिसमें शिक्षार्थी को केंद्र में रखते हुए नीति, बुनियादी ढांचे और निवेश को एकजुट किया जाए। इसकी सफलता अंततः उन करियर, उद्यमों और आगे बढ़ने के अवसरों से परिलक्षित होगी, जिन्हें हम संभव बनाते हैं।”
मंत्री ने जोर दिया कि उन्नत आईटीआई के माध्यम से प्रधानमंत्री कौशल विकास और रोजगारपरकता परिवर्तन (पीएम-सेतु) योजना को व्यापक संस्थागत सुधार के रूप में लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने राज्यों से पीएम-सेतु क्लस्टरों को प्राथमिकता वाली आर्थिक मूल्य श्रृंखलाओं, औद्योगिक गलियारों, एमएसएमई के संकेंद्रण वाले क्षेत्रों, उभरती प्रौद्योगिकियों और आगामी निवेशों के साथ जोड़ने का आग्रह किया। इसके तहत स्पोक आईटीआई को हब प्रयोगशालाओं, मास्टर प्रशिक्षकों, करियर सेवाओं और नियोक्ता नेटवर्क तक विश्वसनीय पहुंच उपलब्ध होनी चाहिए।
भविष्य के लिए तैयार क्षमताओं का उल्लेख करते हुए श्री चौधरी ने बताया कि 16 जुलाई 2026 तक SOAR (कौशल विकास के माध्यम से एआई के लिए तैयारी) के अंतर्गत 2.10 लाख से अधिक शिक्षार्थियों ने नामांकन कराया था। उन्होंने जोर दिया कि एआई संबंधी शिक्षा जिलों के स्कूलों, आईटीआई और कौशल केंद्रों तक पहुंचनी चाहिए, ताकि युवा केवल एआई का उपयोग करना ही न सीखें, बल्कि एआई को लागू करने, उसके अनुरूप स्वयं को ढालने और उसके साथ सृजन करने में भी सक्षम हों।
सम्मेलन में भाग लेने वाले मंत्रियों ने अपने-अपने राज्यों के अनुभव साझा किए और आईटीआई के रूपांतरण, जिला स्तर की योजना, उद्योग की भागीदारी, व्यावसायिक और मुख्यधारा की शिक्षा के एकीकरण, रोजगारपरकता, उद्यमिता, समावेशन और कार्यबल की गतिशीलता पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पाठ्यक्रम, मूल्यांकन, प्रमाणन और परिणामों के लिए समान राष्ट्रीय मानकों को बनाए रखते हुए कौशल विकास संबंधी पहलों को राज्यों की आर्थिक प्राथमिकताओं के अनुरूप किया जाना चाहिए। संस्थागत प्रशिक्षण और कार्यस्थल के बीच महत्वपूर्ण सेतु के रूप में शिक्षुता को भी महत्वपूर्ण माना गया।
एसएमटी. देबाश्री मुखर्जी, सचिव, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने अपने उद्घाटन संबोधन में केंद्र-राज्य के लिए एकीकृत कार्यान्वयन ढाँचे की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य कौशल नीतियाँ, जिला कौशल विकास योजनाएँ और राज्य कौशल विकास योजनाएँ योजनाओं के लक्ष्यों, बुनियादी ढांचे में निवेश, प्रशिक्षकों की तैनाती और नियोक्ताओं के साथ साझेदारी का मार्गदर्शन करें।
वर्ष 2024–25 के दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने जिला कौशल विकास योजनाएँ और राज्य कौशल विकास योजनाएँ प्रस्तुत कीं। सम्मेलन में इन योजनाओं को जिला और कार्य-भूमिका के अनुसार मांग, संस्थागत क्षमता, प्रशिक्षकों की उपलब्धता और स्थानीय आर्थिक कारकों के अनुरूप मजबूत करने पर चर्चा की गई। इसके लिए प्रभावी जिला कौशल समितियों और स्पष्ट जिम्मेदारी तथा मापनीय परिणामों वाले वार्षिक कार्य-ढाँचों के माध्यम से योजनाओं को समर्थन देने पर जोर दिया गया।
प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) के महानिदेशक श्री दिलीप कुमार ने दोहराया कि पीएम-सेतु के तहत आईटीआई का रूपांतरण केवल बुनियादी ढांचे के उन्नयन तक सीमित नहीं है; यह ऐसे उद्योग-उन्मुख संस्थान तैयार करने की प्रतिबद्धता है, जो युवाओं को भविष्य के लिए तैयार कौशल प्रदान करें, उनकी रोजगारपरकता बढ़ाएँ और भारत को वैश्विक प्रतिभा केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ने में सहायता करें।
एमएसडीई की संयुक्त सचिव सुश्री मानसी सहाय ठाकुर ने पीएम-सेतु पर प्रस्तुति दी, जिसमें क्लस्टरों की पहचान करने, एंकर उद्योग भागीदारों को जोड़ने, राज्य कार्यान्वयन योजनाएँ तैयार करने तथा प्रभावी शासन और निगरानी तंत्र स्थापित करने में राज्यों की भूमिका को रेखांकित किया गया।
सम्मेलन में मध्य प्रदेश के 600 ओबीसी युवाओं के लिए एक अग्रणी अंतरराष्ट्रीय कौशल विकास कार्यक्रम का भी शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम को मध्य प्रदेश सरकार ने मंजूरी दी है और एमएसडीई के मार्गदर्शन में एनएसडीसी द्वारा लागू किया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत जापान और जर्मनी में रोजगार के अवसरों के लिए उच्च मांग वाले क्षेत्रों, जिनमें देखभाल सेवाएँ, आतिथ्य, निर्माण और विनिर्माण शामिल हैं, में विदेशी भाषा और गंतव्य-तत्परता संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण एनएसडीसी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी एनएसडीसी इंटरनेशनल लिमिटेड द्वारा दिया जाएगा।
अपनी तरह की पहली इस पहल को तीन-भाग वाले मिश्रित वित्तपोषण मॉडल के माध्यम से संचालित किया जाएगा, जिसमें लाभार्थी की भागीदारी, सोशल स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से जुटाई गई अनुदान राशि और मध्य प्रदेश सरकार द्वारा परिणाम-आधारित वित्तपोषण शामिल है। यह मॉडल विशेषीकृत प्रशिक्षण को मापनीय परिणामों और अंतरराष्ट्रीय रोजगार के अवसरों से जोड़ता है तथा बड़े पैमाने पर कौशल विकास और वैश्विक कार्यबल गतिशीलता के वित्तपोषण के लिए एक अनुकरणीय दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।
कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) का आदान-प्रदान श्री अरुण कुमार पिल्लई, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एनएसडीसी और श्री सपन जैन, अतिरिक्त निदेशक, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, मध्य प्रदेश सरकार के बीच श्री जयंत चौधरी और सम्मेलन में भाग लेने वाले गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में किया गया।
सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता के लिए एक एकीकृत ढाँचे पर भी चर्चा की गई, जिसमें कार्यबल की पहचान, प्रशिक्षण, भाषा दक्षता, मूल्यांकन, नैतिक भर्ती और नियुक्ति के बाद सहायता शामिल है। देखभाल सेवा कर्मियों की अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता को तत्काल अवसर के रूप में चिन्हित किया गया, जिसके लिए गंतव्य-आधारित प्रशिक्षण, समान मानक, सांस्कृतिक तैयारी और श्रमिकों की सुरक्षा के उपाय आवश्यक हैं।
इससे पहले दिन में, एमएसडीई की आर्थिक सलाहकार सुश्री अर्चना मायाराम ने एमएसडीई की प्रमुख पहलों और व्यापक कौशल विकास एवं उद्यमिता तंत्र का अवलोकन प्रस्तुत किया, जिसमें स्किल इंडिया, उद्यमिता विकास तथा एनसीवीईटी का नियामक और गुणवत्ता आश्वासन ढाँचा शामिल था। इसके बाद भाग लेने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के प्रधान सचिवों और सचिवों ने अपनी उपलब्धियों, प्राथमिकताओं और कार्यान्वयन संबंधी अनुभवों को साझा किया। इसके बाद केंद्र-राज्य समन्वय पर गोलमेज चर्चा आयोजित की गई।Top of Form
‘कौशल मंथन’ का समापन केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने, राज्यों के बीच अनुभव साझा करने और कार्यान्वयन के लिए निर्धारित महत्वपूर्ण लक्ष्यों तथा शिक्षार्थियों के परिणामों की समीक्षा करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। एमएसडीई ने डीजीटी, एनएसडीसी, एनसीवीईटी और अन्य संबंधित मंत्रालयों के साथ तकनीकी सहायता और समन्वय के माध्यम से राज्यों को अपना सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
सम्मेलन में सुश्री हेना उस्मान और सुश्री मनीषा सेनशर्मा, वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार, एमएसडीई के साथ केंद्र और राज्य सरकारों तथा सहयोगी संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया।





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