LIVE

डॉ. जितेंद्र सिंह और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन के बीच द्विपक्षीय बैठक, भारत और स्विट्जरलैंड ने रणनीतिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी साझेदारी सुदृढ़ की

डॉ. जितेंद्र सिंह और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन ने विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार में दीर्घकालिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की


डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और गहरे समुद्र अनुसंधान में भारत का मिशन-आधारित दृष्टिकोण द्विपक्षीय सहयोग की नई संभावना उत्पन्न करता है


भारत-स्विट्जरलैंड अनुसंधान ढांचा, संयुक्त वैज्ञानिक बोर्ड और नए संस्थागत समझौते से अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र और मजबूत होंगे


भारत-स्विट्जरलैंड अनुसंधान साझेदारी और सुदृढ़ बनाने के लिए स्विट्जरलैंड ने 45 मिलियन स्विस फ्रैंक निर्धारित किए

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज नई दिल्ली में स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन के साथ द्विपक्षीय बैठक में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में भारत-स्विट्जरलैंड दीर्घकालिक साझेदारी और सुदृढ़ बनाने पर चर्चा की। बैठक, दोनों देशों के बीच विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी साझेदारी अधिक सुनियोजित और दीर्घकालिक चरण में ले जाकर परस्पर हित के उभरते क्षेत्रों में संस्थागत सहभागिता और सहयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित रही।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अंतरविषयक और मिशन-आधारित दृष्टिकोण अपनाते हुए राष्ट्रीय कार्यक्रमों में विभिन्न विषयों और मंत्रालयों की विशेषज्ञता साथ ला रहा है। उन्होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विविध क्षेत्रों में उपयोगी क्षमता के कारण कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अलग विषय नहीं, बल्कि सहायक उपकरण माना जा रहा है।

डॉ. सिंह ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारत की बढ़ती प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए, जैव प्रौद्योगिकी, टीका विकसित किये जाने, जीनोम अनुक्रमण, क्वांटम प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और गहरे समुद्र अनुसंधान के साथ ही समुद्र जनित अर्थव्यवस्था और जैव-अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भारत में उभरते अवसरों की चर्चा की।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत-स्विट्जरलैंड अनुसंधान ढांचा – आईएसआरएफ – और भारत-स्विट्जरलैंड संयुक्त वैज्ञानिक बोर्ड की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत किया। ये विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में परस्पर सहयोग को रणनीतिक और दीर्घकालिक ढांचा स्थापित करने की दिशा में मजबूत आधार प्रदान करते हैं। उन्होंने स्विस राष्ट्रीय विज्ञान फाउंडेशन और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के बीच आशय पत्र और ज्यूरिख एप्लाइड साइंसेज विश्वविद्यालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग – डीएसटी के बीच कार्यान्वयन समझौते का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ये पहल दोनों देशों के बीच संस्थागत जुड़ाव और अनुसंधान सहयोग और मजबूत बनाएंगी।

डॉ. सिंह ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों से दोनों देशों के लिए विभिन्न स्तरों पर सहयोग आसान रहता है। उन्होंने परस्पर हित के क्षेत्रों में निरंतर जुड़ाव और प्रभावी अनुवर्ती कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए नियमित व्यवस्था की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष अनुसंधान, नवाचार और उभरती प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग और अधिक गहन बनाने के लिए मिलकर काम करना जारी रख सकते हैं।

राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन ने कहा कि स्विट्जरलैंड भारत को तेजी से उभरती वैश्विक अनुसंधान एवं विकास शक्ति मानता है और शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में उसका पसंदीदा दीर्घकालिक भागीदार बनाना चाहता है। उन्होंने वर्ष 2003 में हुए द्विपक्षीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि साझेदारी में निरंतर वृद्धि हुई है और स्विट्जरलैंड सहयोग हेतु अधिक संरचित और दीर्घकालिक ढांचा विकसित करने को प्रतिबद्ध है।

राष्ट्रपति पार्मेलिन ने कहा कि स्विट्जरलैंड ने इस साझेदारी के लिए अतिरिक्त 45 मिलियन चेन फ्रैंक निर्धारित किए हैं और भारत से भी इसी प्रकार की प्रतिबद्धता की उम्मीद रखता है ताकि भारत-स्विट्जरलैंड के संयुक्त अनुसंधान ढांचे को और मजबूत बनाया जा सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देश दीर्घकालिक वैज्ञानिक साझेदारी के साथ काम करते हुए बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं।

दोनों पक्षों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इसके व्यापक अनुप्रयोगों पर भी चर्चा की। इसमें राष्ट्रपति पार्मेलिन ने विकासशील देशों को एआई से लाभ सुनिश्चित करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने आगामी जिनेवा एआई शिखर सम्मेलन में भारत को भाग लेने का निमंत्रण भी दिया, जो उभरती प्रौद्योगिकियों और वैश्विक महत्व के क्षेत्रों में दोनों देशों के सहयोग बढ़ाने में साझा रुचि प्रदर्शित करता है।

भारत और स्विट्जरलैंड के बीच वर्ष 2003 में अंतर-सरकारी समझौते के बाद से विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दो दशकों से अधिक समय में सहयोग काफी बढ़ा है। यह साझेदारी भारत-स्विट्जरलैंड संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रम के माध्यम से विकसित हुई है और क्वांटम प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वच्छ प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, महासागर अनुसंधान और समुद्र जनित अर्थव्यवस्था, उन्नत सामग्री, फार्मास्यूटिकल्स, जैव चिकित्सा अनुसंधान, महामारी की तैयारी और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी सहित क्षेत्रों में विस्तारित हुई है।

भारत-स्विट्जरलैंड अनुसंधान ढांचा इस सहयोग को परियोजना-आधारित मॉडल से आगे ले जाकर अब अधिक रणनीतिक, प्रणाली-स्तरीय साझेदारी की ओर बढ़ा रहा है, जिसमें बेहतर गतिशीलता, ज्ञान का आदान-प्रदान और दीर्घकालिक सहयोग शामिल है।

बैठक में स्विट्जरलैंड की शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार राज्य सचिव डॉ. मार्टिना हिरयामा; भारत और भूटान में स्विट्जरलैंड की राजदूत माया टिस्साफी; एसईआरआई की वैज्ञानिक सलाहकार कैथरीन वॉन वाइल, स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. टॉर्स्टन श्वेडे, फाउंडेशन स्विट्जरलैंड इनोवेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी थॉमस गफेलर, ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. रेगुला जोहल, ईटीएच ज्यूरिख के अध्यक्ष, जोएल फ्रांकोइस मेसोट और स्विट्जरलैंड दूतावास की विज्ञान और प्रौद्योगिकी काउंसलर लीना अरोरा कुकरेजा ने भाग लिया।

बैठक में डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सचिव प्रोफेसर उमेश वी. वाघमारे; जैव प्रौद्योगिकी विभाग सचिव डॉ. राजेश सुधीर गोखले; विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सूचना एवं संचार प्रमुख डॉ. प्रवीणकुमार सोमासुंदरम और स्विस डेस्क के नोडल अधिकारी डॉ. रामकृष्ण साहू ने भाग लिया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड अपने सौहार्दपूर्ण और दीर्घकालिक संबंधों को प्रगाढ़ बनाते हुए, द्विपक्षीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पहल पर निरंतर सहयोग और अनुवर्ती कार्रवाई सुनिश्चित करने हेतु नियमित कार्य व्यवस्था स्थापित कर सकते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देश विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के उभरते क्षेत्रों में मिलकर काम करते हुए साझेदारी और मजबूत बना सकते हैं।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/2026/oct/image004_20261006154840_441934.jpg

Comments

Comments (0)

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »