एएसटीआर के ज़रिए 82 लाख से अधिक फ़र्ज़ी मोबाइल कनेक्शन बंद किए गए; संचार साथी ऐप के लगभग 2.5 करोड़ डाउनलोड
वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक ने 15 महीनों में 5,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के संभावित नुकसान को रोकने में सहायता की
धोखाधड़ी वाले संचार से निपटने के लिए प्रौद्योगिकी, विनियमन और वैश्विक सहयोग प्रमुख: डॉ. पेम्मासानी
संचार और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने आज “धोखाधड़ी वाले संचार से निपटने के लिए आईटीयू मानकों को लागू करने” पर आईटीयू गोलमेज़ सम्मेलन में मुख्य भाषण दिया। यह गोलमेज़ सम्मेलन वर्तमान में जारी इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) 2026 के दौरान आयोजित किया गया था, जिसका औपचारिक उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 08 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के यशोभूमि में किया था।
डॉ. पेम्मासानी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने एक अरब से अधिक लोगों को जोड़ा है और अगला काम यह सुनिश्चित करना है कि कनेक्टिविटी के साथ भरोसा भी हो। अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “धोखाधड़ी एक नेटवर्क की समस्या है। इसके लिए नेटवर्क-आधारित समाधान की आवश्यकता है और चूंकि नेटवर्क वैश्विक हैं, इसलिए समाधान भी वैश्विक होना चाहिए।”
संगठित, सीमा-पार धोखाधड़ी के बढ़ते खतरे पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. पेम्मासानी ने बताया कि 2024 में भारतीयों को ऐसी धोखाधड़ी के कारण 22,800 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। इसमें किसी और का रूप धरकर धोखा देना, डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी, एआई-जनरेटेड वॉयस क्लोनिंग और डीपफेक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने सीख लिया है कि क्या काम करना है और अब कई स्तरों पर सुरक्षा उपाय तैयार किए गए हैं।
डॉ. पेम्मासानी ने धोखाधड़ी वाले संचार से निपटने के लिए भारत के पांच-स्तरीय दृष्टिकोण की रूपरेखा बताई, जिसमें स्पूफ की गई अंतरराष्ट्रीय कॉलों को रियल-टाइम में ब्लॉक करना, सी-डॉट के एआई-आधारित एएसटीआर टूल के माध्यम से धोखाधड़ी वाले मोबाइल कनेक्शन की पहचान करना, ‘संचार साथी’ के माध्यम से नागरिकों की भागीदारी, डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (डीआईपी) के माध्यम से इंटेलिजेंस साझा करना और धोखाधड़ी के नए तरीकों से निपटने के उपाय शामिल हैं।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि एएसटीआर की मदद से 82 लाख से ज़्यादा फ़र्ज़ी कनेक्शन बंद किए गए हैं, जबकि ‘संचार साथी’ ऐप को लगभग 2.5 करोड़ बार डाउनलोड किया गया है। ‘डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफ़ॉर्म’ 1,600 से ज़्यादा संस्थाओं को जोड़ता है, जिनमें टेलीकॉम ऑपरेटर, बैंक और कानून लागू करने वाली एजेंसियां शामिल हैं। ‘वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक’ ने 15 महीनों में 5,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के संभावित वित्तीय नुकसान को रोकने में मदद की है।
सीमा-पार धोखाधड़ी से निपटने में राष्ट्रीय समाधानों की सीमाओं को स्वीकार करते हुए, डॉ. पेम्मासानी ने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर कॉलर की पहचान के डिजिटल सत्यापन के लिए आईटीयू मानकों के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने सरकारों, नियामकों, ऑपरेटरों और टेक्नोलॉजी कंपनियों को शामिल करते हुए संयुक्त परीक्षणों के लिए आईटीयू के प्रस्ताव का स्वागत किया और इसमें योगदान देने के लिए भारत की तत्परता की पुष्टि की।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने इच्छुक देशों के बीच चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर परीक्षण शुरू करने का सुझाव दिया, जिसमें अलग-अलग नेटवर्क टेक्नोलॉजी की भागीदारी सुनिश्चित हो और आईटीयू मानकों में लगातार सुधार के लिए उनसे मिले अनुभवों को शामिल किया जाए। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि जैसे-जैसे 6-जी नेटवर्क विकसित हो रहे हैं, उनमें शुरू से ही भरोसे को शामिल किया जाना चाहिए।
अपने संबोधन का समापन करते हुए, डॉ. पेम्मासानी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि धोखाधड़ी वाले संचार से निपटने के लिए टेक्नोलॉजी, नियमन और सहयोग को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा, “देश के भीतर, भारत ने प्रतिक्रिया देने के बजाय रोकथाम की ओर कदम बढ़ाया है। अब आइए, आईटीयू के साथ मिलकर, हम राष्ट्रीय समाधानों से आगे बढ़कर वैश्विक भरोसे की ओर बढ़ें।”
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