भारत सरकार का कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, भारत की ब्रिक्स की अध्यक्षता 2026 के तहत 4-5 अगस्त, 2026 को तेलंगाना के हैदराबाद में ब्रिक्स एंटी-करप्शन वर्किंग ग्रुप (एसीडब्ल्यूजी) की दूसरी बैठक और एसेट रिकवरी पर ब्रिक्स एक्सपर्ट नेटवर्क की दूसरी बैठक की मेजबानी करेगा।
यह बैठक भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की थीम, “सुदृढशीलता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास” के अनुसार आयोजित की जा रही है।
बैठक का उद्घाटन कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की सचिव सुश्री रचना शाह करेंगी। इस कार्यक्रम में ब्रिक्स के सदस्य देशों के साथ-साथ वरिष्ठ नीति निर्माताओं, विशेषज्ञों, पेशेवरों और भ्रष्ट्राचाररोधी एवं कानून क्रियान्वयन एजेंसियों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।
हैदराबाद की बैठक 2-3 जून, 2026 को वर्चुअल तौर पर हुई पहली ब्रिक्स एंटी-करप्शन वर्किंग ग्रुप मीटिंग के नतीजों पर आधारित है। ब्रिक्स सदस्य एसेट रिकवरी के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने, सीमापार भ्रष्टाचार से निपटने और शासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व बढ़ाने पर विचार-विमर्श करेंगे।
चर्चा में व्यवहारिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर फोकस किया जाएगा:
- भ्रष्टाचार के मामलों में वांछित भगोड़े अपराधियों का पता लगाने और प्रत्यर्पण कार्यवाही का समर्थन करने के लिए अनौपचारिक सहयोग को मजबूत करना;
- एसेट रिकवरी पर ब्रिक्स एक्सपर्ट नेटवर्क के माध्यम से जानकारी शेयर करना और संचालनात्मक सहयोग बढ़ाना; और
- फिनटेक, डिजिटल सम्पदाओं और उभरते डिजिटल वित्तीय उपायों से होने वाले भ्रष्टाचार से जुड़े जोखिम को रोकने और उनसे निपटने के लिए अनुभव और अच्छे तरीके शेयर करना।
5 अगस्त, 2026 को मुख्य कार्यक्रम के साथ-साथ “नवाचार और प्रौद्योगिकी संचालित प्रणाली के जरिए एथिकल गवर्नेंस” नामक एक खास कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम ब्रिक्स सदस्यों को प्रौद्योगिकी सक्षम शासन पर अपने अनुभव साझा करने के लिए एक प्लेटफॉर्म देगा, जिसमें डिजिटल सार्वजनिक खरीद, नागरिकों की भागीदारी, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और लोक प्रशासन में निष्ठा को मजबूत करने के नए तरीके शामिल हैं।
हैदराबाद मीटिंग में बातचीत, अनुभवों के लेन-देन और मिलकर काम करने की कोशिशों के जरिए ब्रिक्स सदस्यों के बीच प्रैक्टिकल सहयोग को बढ़ावा देने के भारत के वादे को फिर से पक्का किया जाएगा। भारत की ब्रिक्स प्रेसीडेंसी में एंटी-करप्शन वर्किंग ग्रुप की यह आखिरी मीटिंग है, जिससे साल भर में हुई तरक्की को मजबूत करने और एसेट रिकवरी, सीमापार भ्रष्टाचार की रोकथाम, प्रौद्योगिकी संचालित शासन और संस्थागत क्षमता निर्माण में ब्रिक्स सदस्यों के बीच लगातार सहयोग की नींव रखने की उम्मीद है।
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