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भारत और मंगोलिया ने संयुक्त कार्य समूह की 14वीं बैठक में द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी सुदृढ़ बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई

भारत और मंगोलिया के रक्षा मंत्रालयों के संयुक्त कार्य समूह की आज उलानबातार में आयोजित 14वीं बैठक में दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग गतिविधियों की व्यापक समीक्षा की। बैठक में मौजूदा पहल में हुई प्रगति का आकलन और पारस्परिक रूप से चिह्नित क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने निरंतर संवाद द्वारा दीर्घकालिक रक्षा साझेदारी और अधिक सुदृढ़ बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी विचार साझा किए।

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दोनों पक्षों ने नोमैडिक एलीफेंट सैन्य अभ्यास के सफल आयोजन की सराहना की। यह अभ्यास भारत और मंगोलिया के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग मजबूत बनाने की साझा प्रतिबद्धता दर्शाता है। मंगोलियाई पक्ष ने मंगोलिया के सशस्त्र बलों कर्मियों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास में भारत द्वारा दिए जा रहे निरंतर सहयोग की सराहना की। बैठक की सह-अध्यक्षता रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव डॉ. इशिता गांगुली त्रिपाठी और मंगोलिया के रक्षा उप सचिव ब्रिगेडियर जनरल गंसुख ई. ने की।

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डॉ. इशिता गांगुली त्रिपाठी ने मंगोलियाई सशस्त्र बलों के उप प्रमुख, मेजर जनरल उसुखबयार जे. के साथ भी बैठक की। इस दौरान उन्‍होंने दोनों देशों के रक्षा बलों के बीच सहयोग में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने आपसी सहयोग और प्रगाढ़ बनाने, रक्षा संबंध सुदृढ़ करने तथा भारत-मंगोलिया रणनीतिक साझेदारी के लिए भविष्यपरक कार्ययोजना तैयार करने के उपायों पर चर्चा की।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने मंगोलिया के राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय का भी दौरा किया, जहां भारत के सहयोग से स्थापित साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण केंद्र के कामकाज की समीक्षा की गई। मंगोलियाई पक्ष ने भाषा प्रशिक्षण और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भारत के निरंतर सहयोग की सराहना की। उसने दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत बनाने के लिए क्षमता विकास, ज्ञान आदान-प्रदान और रक्षा सहयोग को अधिक गहन बनाने के महत्व पर बल दिया।

भारत और मंगोलिया के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों की सुदृढ़ विरासत रही है, जो दोनों देशों की वर्तमान साझेदारी का मजबूत आधार है। इस यात्रा से दोनों देशों के बीच संबंध और अधिक प्रगाढ़ बनाने में साझा आस्था और सांस्कृतिक विरासत की महत्वपूर्ण भूमिका रेखांकित हुई।

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