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आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने स्वच्छ दिल्ली के लिए एक साझा रोडमैप तैयार करने हेतु सहभागी कार्यशाला आयोजित की

राजधानी विकास विभाग, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने ‘स्वच्छ भारत मिशन-शहरी’ के सहयोग से ‘स्वच्छ दिल्ली के लिए एक साझा रोडमैप’ तैयार करने पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें स्वच्छता निरीक्षक, पर्यवेक्षक, शहरी स्थानीय निकायों के अधिकारी और प्रमुख हितधारक एक साथ आए और राष्ट्रीय राजधानी को अधिक स्वच्छ, स्वस्थ और रहने योग्य बनाने के व्यावहारिक समाधानों पर मिलकर चर्चा की। इस कार्यशाला में राजधानी विकास विभाग, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय की सचिव सुश्री डी. थारा के साथ-साथ नई दिल्‍ली नगरपालिका परिषद, दिल्‍ली नगर निगम, दिल्‍ली विकास प्राधिकरण एवं आवासन और शहरी कार्य के मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया।

‘स्वच्छ दिल्ली के लिए एक साझा रोडमैप की योजना’ नामक इस कार्यशाला का उद्देश्य विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाना था ताकि वे इन चुनौतियों को समझ सकें और मिलकर व्यावहारिक समाधान तैयार कर सकें। पहली बार, शीर्ष स्तर से लेकर निचले स्तर तक के अधिकारी और कर्मचारी एक साझा मंच पर आए ताकि वे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कर सकें और एक स्वच्छ दिल्ली की दिशा में सामूहिक रूप से आगे बढ़ने का रास्ता तय कर सकें।

सफाई कर्मचारी, जो सेवा प्रदान करने के काम में सबसे आगे होते हैं, वे रोज़मर्रा की व्यावहारिक चुनौतियों के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी दे सकते हैं। इससे अन्य हितधारकों को नीतिगत उपायों के साथ-साथ ज़मीनी स्तर पर लागू होने वाले व्यावहारिक समाधानों पर विचार-मंथन करने और नए तरीके खोजने में सहायता मिलती है। दिल्ली में स्वच्छता को प्रभावित करने वाली मुख्य चुनौतियों की पहचान करने और ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे हितधारकों से जानकारी जुटाने के लिए प्रतिभागियों के बीच एक ऑनलाइन डिजिटल पोल (सर्वेक्षण) कराया गया। इस प्रक्रिया से कामकाज में कमियों, नागरिकों के व्यवहार, सेवा प्रदान करने में आने वाली चुनौतियों और सुधार के अवसरों के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्राप्त हुई।

शहरी स्वच्छता के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए आमंत्रित स्वच्छता निरीक्षकों और पर्यवेक्षकों को पूरे शहर में साफ-सफाई बनाए रखने के उनके समर्पित प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया। कार्यशाला की शुरुआत ब्रह्माकुमारीज़ के आध्यात्मिक गुरु बीके हुसैन के प्रेरणादायक संबोधन से हुई।

इस कार्यशाला का एक मुख्य आकर्षण दस महत्वपूर्ण सवालों पर आधारित विस्तृत और संवादात्मक चर्चा थी जिसका उद्देश्य ‘स्वच्छ दिल्ली’ के लिए एक सामूहिक रोडमैप तैयार करना था। इन चर्चाओं में शहरी स्वच्छता से जुड़ी कुछ सबसे गंभीर चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया। इनमें शामिल थे: भारी निवेश और प्रयासों के बावजूद दिल्ली में साफ-सफाई की समस्या क्यों बनी हुई है; घर-घर जाकर कचरा उठाने की व्यवस्था को अधिक कुशल और नियमित बनाकर शहर को ‘बिन-लेस’ बनाने की रणनीतियां; बार-बार कचरा जमा होने वाले स्थानों (जीवीपी) की समस्या; कचरे को जल स्रोतों में जाने से रोकने के उपाय; और यह सुनिश्चित करना कि सार्वजनिक शौचालय पूरे दिन साफ, सुरक्षित और चालू रहें। चर्चाओं में नागरिकों की शिकायतों के निवारण तंत्र को बेहतर बनाने के तरीकों पर भी विचार किया गया। इस दौरान सफल उदाहरणों को ‘सफलता की कहानी’ के रूप में पेश किया गया, साथ ही ऐसी तस्वीरें और घटनाएं भी साझा की गई जिन पर विशेष ध्यान देने और निश्चित उपाय करने की आवश्यकता है।

इस चर्चा में स्वच्छता कर्मियों, निरीक्षकों, पर्यवेक्षकों, शहरी स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों और नीति-निर्माताओं के विचार शामिल किए गए। इसका उद्देश्य दिल्ली में शहरी स्वच्छता व्‍यवस्‍थाओं को मजबूत करने और साफ-सफाई के स्तर को बेहतर बनाने के लिए जवाबदेही तय करने पर एक सामूहिक संवाद को बढ़ावा देना था।

इस अवसर पर राजधानी विकास विभाग, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय की सचिव, सुश्री डी. थारा ने दिल्ली में स्वच्छता के मानकों को सुधारने के लिए स्वच्छता निरीक्षकों और पर्यवेक्षकों के अथक प्रयासों और उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने कहा, “किसी भी नगर निकाय का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उसका स्वच्छता कार्यबल होता है – यानी स्वच्छता निरीक्षक और अन्य कर्मचारी। जहाँ एक डॉक्टर बीमारी का पता लगाने के बाद दवा देता है, वहीं हमारी टीम डॉक्टर के काम करने से पहले ही सक्रिय हो जाती है। हम सबके लिए साफ-सफाई और स्वच्छता सुनिश्चित करके बीमारियों को रोकते हैं। हम समाज को वास्तव में स्वास्थ्य प्रदान करने वाले लोग हैं, क्योंकि हमारा स्वच्छता का काम बीमारियों को कम करता है और नागरिकों को एक स्वस्थ और बेहतर जीवन जीने में मदद करता है।”

कार्यशाला का समापन सभी हितधारकों की एक साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। सभी ने मिलकर ऐसे व्यावहारिक, नागरिक-केंद्रित और परिणाम-उन्मुख उपाय लागू करने का संकल्प लिया जो दिल्ली को और अधिक स्वच्छ बनाने में योगदान देंगे।

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