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अनुसूचित जनजातियों के लिए राष्ट्रीय फेलोशिप योजना

केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने आज लोकसभा में जानकारी दी कि ‘अनुसूचित जनजातियों के लिए राष्ट्रीय फेलोशिप योजना’ (एनएफएसटी) के तहत पिछले पांच वर्षों के दौरान कुल 3,750 फेलोशिप प्रदान की गई हैं। इसमें शामिल पाठ्यक्रमों, तथा पश्चिम बंगाल के जिला-वार एवं वर्ष-वार संस्थानों (जहाँ शोधार्थी नामांकित थे) का विवरण संलग्नक-I) में दिया गया है।

अनुसूचित जनजातियों के लिए राष्ट्रीय फ़ेलोशिप योजना (एनएफएसटी) एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, इसलिए इसमें राज्य-वार बजट आवंटन का कोई प्रावधान नहीं है।

अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए राष्ट्रीय फेलोशिप योजना के तहत, आवेदन आमंत्रित करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल आम तौर पर शैक्षणिक वर्ष की 1 जुलाई को खुलता है और 30 सितंबर को बंद होता है। इसके बाद, आवेदनों का सत्यापन किया जाता है और चुने गए 750 उम्मीदवारों की मेरिट सूची मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड की जाती है।

तद्नुसार, फेलोशिप फंड का भुगतान प्रक्रियाधीन किया जाता है, जो छात्रों द्वारा आवश्यक औपचारिकताएं (जैसे जॉइनिंग रिपोर्ट जमा करना, बैंक खाते को लिंक करना, निरंतरता प्रमाण पत्र आदि) पूरी करने तथा योजना के बजट मद के तहत धन की उपलब्धता पर निर्भर करता है।

छात्रवृत्ति योजनाओं (एनएफएसटी योजना सहित) से संबंधित शिकायतें आमतौर पर ‘सीपीग्राम्स/पीजी’  पोर्टल के माध्यम से प्राप्त होती हैं और सभी शिकायतों का निपटान निर्धारित समय-सीमा के भीतर किया जाता है। 01/04/2021 से 31/03/2026 के दौरान ‘सीपीग्राम्स’  में प्राप्त शिकायतों का औसत निपटान समय नीचे दिया गया है:

सभी छात्रवृत्ति शिकायतों (एनएफएसटी योजना सहित) के लिए पर ‘सीपीग्राम्स/पीजी’  पोर्टल रिपोर्ट 
सामने लाई गई शिकायतों की संख्याप्राप्त शिकायतों की संख्यानिपटाई गई शिकायतों की संख्याऔसत निपटान समय (दिन)
1168016817

अनुसूचित जनजातियों के लिए राष्ट्रीय फ़ेलोशिप योजना के तहत, पिछले तीन वर्षों में कुल 2250 फ़ेलोशिप दी गईं। पिछले तीन वर्षों में अपने कोर्स/रिसर्च पूरे करने वाले स्कॉलर्स की संख्या नीचे दी गई तालिका में बताई गई है।

वित्तीय वर्षरिसर्च पूरी करने वाले छात्रों की संख्या*
2023-24294
2024-25156
2025-26226

* हर साल 5 साल की अवधि के लिए 750 फ़ेलोशिप दी जाती हैं।

जनजातीय कार्य मंत्रालय की ओर से हर साल 750 नई फ़ेलोशिप के लिए लगातार मिल रहे सहयोग से उच्च शिक्षा और शोध में अनुसूचित जनजाति के स्कॉलर्स की भागीदारी सुनिश्चित हो रही है।

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