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आईजीएनसीए और एएसआई द्वारा टाइम्लेस इंडिया: प्रोटेक्शन एंड रिवाइवल ऑफ इंडियन कल्चरल आइडेंटिटी पुस्तक का विमोचन समारोह आयोजित किया जाएगा

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के संयुक्त तत्वावधान में पुस्तक “टाइम्लेस इंडिया: प्रोटेक्शन एंड रिवाइवल ऑफ इंडियन कल्चरल आइडेंटिटी अंडर द लीडरशिप ऑफ प्राइम मिनिस्टर नरेन्द्र मोदी” का विमोचन समारोह आयोजित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को अपराह्न 3:00 बजे, धरोहर भवन, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, मंडी हाउस, नई दिल्ली में आयोजित होगा।          

आईजीएनसीए और सुभी पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक स्मारकों तथा देश की सभ्यतागत विरासत को संरक्षित रखने के महत्व पर केंद्रित होगी। इसमें भारतीय सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण और पुनरुद्धार से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की जाएगी। साथ ही, देश की विरासत और ऐतिहासिक स्मृतियों को सहेजकर रखने के महत्व को भी रेखांकित किया जाएगा। इस पुस्तक के लेखक/संपादक प्रख्यात लेखक, पत्रकार और राज्यसभा के पूर्व सांसद श्री तरुण विजय हैं।

इस अवसर पर भारत सरकार के केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत मुख्य अतिथि के रूप में शोभा बढ़ाएंगे। भारत सरकार के केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह विशिष्ट अतिथि होंगे। पूर्व सांसद (राज्य सभा) एवं भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विनय सहस्रबुद्धे मुख्य भाषण देंगे।

कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के महानिदेशक श्री वाई. एस. रावत के स्वागत भाषण से होगा, जिसके बाद साउथ एशियन यूनिवर्सिटी के कला, मीडिया और डिजाइन संकाय के डीन प्रोफेसर (डॉ.) रमेश सी. गौड़ का प्रारंभिक वक्तव्य होगा। पुस्तक के लेखक/संपादक के रूप में श्री तरुण विजय भी विमोचन समारोह में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम का समापन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के कला निधि विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर के. अनिल कुमार के धन्यवाद ज्ञापन के साथ होगा।

इस विमोचन समारोह में भारत के ऐतिहासिक स्मारकों, सांस्कृतिक परंपराओं और सभ्यतागत धरोहरों के संरक्षण के महत्व पर विचार-विमर्श करने के लिए संस्कृति एवं विरासत क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियां, विद्वान और प्रतिनिधि एक साथ मंच पर उपस्थित होंगे। यह अवसर इस पुस्तक में रेखांकित किए गए विषयों तथा भारतीय सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण में उनकी प्रासंगिकता पर चर्चा करने का अवसर भी प्रदान करेगा।

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