पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने जल विज्ञान और क्रायोस्फीयर कार्यक्रम के तहत, कश्मीर विश्वविद्यालय और आईआईटी रुड़की को संयुक्त रूप से “पृथ्वी अवलोकन डेटा और मॉडलिंग का उपयोग करके भारतीय हिमालय के विरोधाभासी स्थलाकृतिक और जलवायु क्षेत्रों में वर्तमान और भविष्य के जीएलओएफ जोखिम की पहचान” शीर्षक परियोजना 2022 में कुल 91.2 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत की थी।
प्रस्तावित अध्ययन का उद्देश्य भारतीय हिमालयी क्षेत्र (आईएचआर) के विभिन्न जलवायु, भू-आकृति विज्ञान और स्थलाकृति क्षेत्रों में वास्तविक रूप से आधारित मॉडलों का उपयोग करके हिमनद झीलों की जांच और उनके संभावित खतरों का आकलन करने के लिए एक व्यापक पद्धतिगत दृष्टिकोण विकसित और कार्यान्वित करना है। इससे झील निर्माण और उससे जुड़े खतरों और जोखिमों- जो मानव आबादी और बुनियादी ढांचे वाले निचले क्षेत्रों के लिए खतरा हैं, की बेहतर समझ विकसित करने और पूर्वानुमान लगाने में मदद मिलेगी।
मंत्रालय ने पिछले 3 वर्षों में कुल 62.03 लाख रुपये की राशि जारी की है।
पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
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