पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में रिकाॅर्ड 92 फीसदी मतदान इस बात का संकेत है कि जिस भी पार्टी की होगी उसे पूर्ण बहुमत मिलेगा। हालाँकि इससे पोल पंडितों का गणित बिगड़ा हुआ है। भाजपा के आक्रमक चुनावी अभियान को देखकर यही लगता है कि बंगाल में इस बार ममता का किला ध्वस्त होगा और कमल खिलेगा। पहले चरण के मतदान के बाद भाजपा नेताओं ने 152 सीटों में से 110 जीतने का दावा किया है। वहीं, दूसरे चरण में 142 सीटों पर 29 अपै्रल को होने वाले मतदान में भी बढ़त हासिल करने को लेकर पार्टी आश्वस्त है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बंगाल से तृणमूल कांग्रेस को उखाड़ फेंकने के सारे उपाय कर चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ताबड़तोड़ रैलियां की हैं। ममता सरकार पर हिंदू विरोधी के आरोप भाजपा शुरू से ही लगाती आ रही है। अब नारी शक्ति वंदन संशोधन का विरोध करने के बाद तृणमूल कांग्रेस को महिला विरोधी साबित करने की कोशिश की जा रही है। महिलाओं ने पहले चरण के मतदान में पुरुषों के मुकाबले ज्यादा मतदान किया है। ऐसे में यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि महिलाओं का वोट आखिर किस दल को मिला है।
आरजी कार मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की घटना के बाद ममता बनर्जी को महिलाओं की सुरक्षा के सवाल को लेकर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कोलकाता के आरजी कार मेडिकल काॅलेज में 9 अगस्त 2024 को एक महिला प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की भयावह घटना ने पूरे देश में जनमानस को झकझोर दिया था। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा था जिसे भाजपा ने प्रमुखता से उठाया। माना जाता है कि शहरी महिलाएं ममता सरकार से नाराज होकर भाजपा के पक्ष में मतदान की होंगी। लेकिन ग्रामीण महिलाओं में ममता बनर्जी लोकप्रिय है और उनकी लक्ष्मी भंडार योजना के लाभार्थियों का अधिकांश वोट टीएमसी को ही मिला होगा।
जानकार बताते हैं कि बंगाल में इस बार भी पिछले विधानसभा चुनाव की तरह तृणमूल कांग्रेस और भाजपा मुख्य मुकाबले में हैं, जिसमें ममता बनर्जी का पलड़ा भारी है क्योंकि उनकी पार्टी को मुस्लिम समुदाय का एकतरफा वोट मिला है। दरअसल, जिन क्षेत्रों में एसआईआर के तहत ज्यादा मतदाता वोटरलिस्ट से हटाए गए वहां मतदान ज्यादा हुआ है। पश्चिम बंगाल चुनाव पर नजर रखने वाले बताते हैं कि 152 सीटों पर जहां पहले चरण में मतदान हुए हैं वहां भाजपा को बढ़त जरूर मिलेगी, लेकिन अमित शाह के दावे के मुताबिक सीटें आना मुश्किल है।
असल में पिछली बार भाजपा को 152 में 59 सीटों पर जीत मिली थी, जो बढ़कर 80 तक भले ही हो जाए लेकिन 100 के पार जाना कठिन है। वहीं, दूसरे चरण के 142 सीटों में से पिछली बार भाजपा को महज 18 सीटें मिली थीं। इन क्षेत्रों को ममता बनर्जी का गढ़ माना जाता है जिसमें टीएमसी को हराना भाजपा के लिए टेढ़ी खीर है।

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