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सरकार ने 2026-27 के लिए OMSS (D) के तहत चावल की बिक्री का लक्ष्य 25 LMT से दोगुना करके 50 LMT किया, 31 अक्टूबर 2026 तक ई-नीलामी के ज़रिए 25 LMT चावल पहले ही बेचा जा चुका है


देश भर में चावल और धान का स्टॉक रखने वाली सभी इकाइयों के लिए स्टॉक का खुलासा करना अनिवार्य किया गया, स्टॉक की स्थिति को हर शुक्रवार को अपडेट करना होगा

खासकर दक्षिणी राज्यों में उपलब्धता बढ़ाने के लिए नैफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार को भारत चावल का अतिरिक्त आवंटन किया गया

पाँच दक्षिणी राज्यों को सहमति दी गई कि वे ज़रूरत पड़ने पर 31 जनवरी 20 तक चावल और धान पर स्टॉक सीमा लागू कर सकते हैं

भारत सरकार खाद्य अनाजों, विशेष रूप से चावल की कीमतों पर कड़ी नज़र रख रही है। सरकार घरेलू स्तर पर पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने, कीमतों में स्थिरता बनाए रखने, जमाखोरी रोकने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने के लिए कई नीतिगत कदम उठा रही है। इस संबंध में, सरकार ने निम्नलिखित उपाय किए हैं:

पूरे देश में चावल और धान के स्टॉक की अनिवार्य घोषणा

भारत सरकार ने 06.11.2026 को एक आदेश जारी किया है, जिसके तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सभी व्यापारियों/थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, बड़ी चेन वाले खुदरा विक्रेताओं और प्रोसेसर/मिल मालिकों को निर्देश दिया गया है कि वे चावल और धान के अपने स्टॉक की जानकारी निम्नलिखित छह श्रेणियों के अंतर्गत घोषित करें:

(i) बासमती चावल

(ii) गैर-बासमती प्रीमियम चावल

(iii) गैर-बासमती चावल

(iv) उबला हुआ चावल (पारबॉइल्ड राइस)

(v) ​​टूटा हुआ चावल और

(vi) धान

चावल और धान का स्टॉक रखने वाली सभी इकाइयों को हर शुक्रवार को फूड स्टॉक पोर्टल (https://foodstock.dfpd.gov.in ) पर अपने स्टॉक की जानकारी देनी होगी। साथ ही, यह सुनिश्चित करना होगा कि दी गई जानकारी सटीक हो और उसे नियमित रूप से अपडेट किया जाए। यदि कोई इकाई पोर्टल पर पंजीकृत नहीं पाई जाती है या निर्धारित स्टॉक सीमा का उल्लंघन करती है, तो उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 6 और 7 के तहत उचित दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

दक्षिणी राज्यों में स्टॉक सीमा लागू करने के लिए सहमति

उपभोक्ताओं को उचित कीमतों पर चावल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से, विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों में, भारत सरकार ने 06.11.2026 के अपने पत्र के माध्यम से आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना की राज्य सरकारों को धान और चावल पर स्टॉक सीमा लागू करने की सहमति दे दी है। राज्य सरकारें आवश्यकतानुसार उचित नियंत्रण आदेशों के जरिए ये सीमाएं लागू कर सकती हैं।

ये स्टॉक सीमाएं 31 जनवरी 2027 तक लागू रहेंगी। केंद्र और राज्य सरकारें इन उपायों के कार्यान्वयन पर कड़ी नज़र रखेंगी, ताकि बाज़ार में चावल की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और जमाखोरी तथा कालाबाज़ारी को रोका जा सके।

बाज़ार में उपलब्धता बढ़ाने के लिए भारत चावल का अतिरिक्त आवंटन

भारत चावल की बिक्री और उपलब्धता को पूरे देश में, विशेषकर दक्षिणी राज्यों में, व्यापक रूप से बढ़ाने के उद्देश्य से भारत सरकार तीन एजेंसियों नैफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार को इसका अतिरिक्त स्टॉक आवंटित कर रही है। इन एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे वितरण के सभी संभावित माध्यमों का पता लगाएं, ताकि भारत चावल अधिक से अधिक लोगों तक पहुँच सके और उपभोक्ताओं को आसानी से उपलब्ध हो सके। इस पहल से बाज़ार में आपूर्ति बढ़ने, उपभोक्ताओं के लिए किफायती दामों पर चावल की उपलब्धता बेहतर होने और खुदरा कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

2026-27 के लिए OMSS (D) के तहत चावल की बिक्री का लक्ष्य दोगुना किया गया

भारत सरकार ने 2026-27 के लिए ओपन मार्केट सेल स्कीम (घरेलू) [OMSS (D)] के तहत ई-नीलामी के जरिए बेचे जाने वाले चावल की मात्रा का लक्ष्य दोगुना कर दिया है, जिसे 25 LMT से बढ़ाकर 50 LMT कर दिया गया है। वित्त वर्ष 2026-27 (31.10.2026 तक) के दौरान, OMSS (D) ई-नीलामी के माध्यम से निजी पार्टियों को कुल 25 LMT चावल बेचा गया है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह मात्रा 11 LMT थी। यह इस पहल के जरिए बाजार में आपूर्ति में हुई उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।

ये कदम देश भर में आवश्यक खाद्य वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने, कीमतों में स्थिरता बनाए रखने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हैं।

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