प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें जीवन में शास्त्र संबंधी ज्ञान, विवेक, कर्म और अच्छे आचरण को शामिल करने के महत्व पर प्रकाश डाला गया है:
शास्त्रं कर्म तथा प्रज्ञा शीलं क्रिययान्वितम्।
लक्ष्यलक्षणयुक्तार्थशास्त्रनिष्ठो नरो भवेत्॥
यह सुभाषितम् इस बात पर जोर देता है कि जब ज्ञान के साथ विवेक, अनुशासन और उचित कर्म जुड़ जाते हैं तो यह एक प्रबुद्ध और उद्देश्यपूर्ण जीवन के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।
प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया:
शास्त्रं कर्म तथा प्रज्ञा शीलं क्रिययान्वितम्।
लक्ष्यलक्षणयुक्तार्थशास्त्रनिष्ठो नरो भवेत्॥
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