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भारतीय नौसेना विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शैक्षणिक सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद 2026 की मेजबानी करेगी


नई दिल्ली में 3 से 5 नवंबर 2026 तक आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन में 18 देशों के विशेषज्ञ भाग लेंगे; शैक्षणिक नेटवर्क, समुद्री विज्ञान, महासागर शासन, जलवायु लचीलापन और उभरती प्रौद्योगिकियों पर होगी चर्चा

भारतीय नौसेना 03 से 05 नवंबर 2026 तक नई दिल्ली में हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद 2026 (आईपीआरडी-2026) का आयोजन करेगी। यह नौसेना का वार्षिक उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक संवाद है, जिसका आयोजन नौसेना के नॉलेज पार्टनर और प्रमुख आयोजक नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के सहयोग से किया जाएगा। इस वर्ष सम्मेलन का विषय ‘हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शैक्षणिक सहयोग’ है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद भारतीय नौसेना की अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक सहभागिता का एक प्रमुख मंच है। इसके विभिन्न संस्करणों में, नवंबर 2019 में बैंकॉक में आयोजित 14वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित हिंद-प्रशांत महासागर पहल की सात परस्पर संबद्ध समुद्री क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई है। भारत के समुद्री दृष्टिकोण ‘सागर’ (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) के अनुरूप, हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद का उद्देश्य हिंद-प्रशांत महासागर पहल के व्यापक सहयोगात्मक ढांचे को ठोस और व्यावहारिक पहलों में बदलना है जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके।

इस वर्ष की थीम समकालीन समुद्री क्षेत्र की एक मूलभूत विशेषता को रेखांकित करती है: महासागर आपस में जुड़े हैं, लेकिन उन्हें समझने और प्रबंधित करने के लिए आवश्यक वैज्ञानिक ज्ञान, तकनीकी क्षमताएं और संस्थान असमान रूप से वितरित हैं। जलवायु परिवर्तन, समुद्री व्यापार और आपूर्ति-श्रृंखलाओं की कमजोरियां, समुद्री संसाधनों पर बढ़ता दबाव तथा महत्वपूर्ण समुद्री बुनियादी ढांचे पर मंडराते खतरे तेजी से राष्ट्रीय सीमाओं के पार प्रभाव डाल रहे हैं। इसलिए, इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए न केवल अधिक उन्नत तकनीकों, बल्कि सहयोग, सूचना-साझाकरण और मानव पूंजी के विकास की सुदृढ़ व्यवस्थाओं की भी आवश्यकता है। इसी संदर्भ में, आईपीआरडी-2026 सामाजिक विज्ञान, जीवन विज्ञान और मानविकी के आवश्यक योगदान को मान्यता देते हुए विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) की पारंपरिक सीमाओं से परे सहयोग की संभावनाओं का अन्वेषण करेगा।

इस वर्ष के सम्मेलन में तीन दिनों के दौरान पांच पेशेवर विषयगत सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें अकादमिक नेटवर्क, अनुसंधान और मानव पूंजी विकास, समुद्री स्थितिजन्य जागरूकता और महत्वपूर्ण समुद्री बुनियादी ढांचे का संरक्षण, समुद्र विज्ञान और जलवायु लचीलापन, महासागर शासन और समुद्री लचीलेपन के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण तथा परिवर्तनकारी समुद्री प्रौद्योगिकियां और दोहरे उपयोग के निहितार्थ जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इन विचार-विमर्शों में संयुक्त अनुसंधान, सहयोगात्मक प्रौद्योगिकी विकास, जिम्मेदार शासन, वैज्ञानिक डेटा तक न्यायसंगत पहुंच और मजबूत संस्थागत साझेदारी के व्यावहारिक उपायों पर विचार किया जाएगा।

उद्घाटन के दिन ‘पर्सपेक्टिव्स फ्रॉम द फ्लैग ब्रिज’ शीर्षक से एक विशेष सत्र आयोजित होगा, जिसमें भारत और श्रीलंका के पूर्व नौसेना प्रमुख भाग लेंगे। इसके अलावा, ‘सहयोग का संवाद’ शीर्षक से राजदूतों की एक विशेष परिचर्चा होगी। रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह पहले दिन स्मृति व्याख्यान देंगे। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में मंत्रिस्तरीय और अन्य विशेष संबोधनों के साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र के 18 देशों के समुद्री पेशेवरों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों के योगदान भी शामिल होंगे।

समाधान-उन्मुख संवाद पर आईपीआरडी के जोर को ध्यान में रखते हुए, इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का विचार-विमर्श राष्ट्रीय, उप-क्षेत्रीय और व्यापक क्षेत्रीय स्तरों पर विशिष्ट एवं कार्रवाई योग्य उपायों की पहचान पर केंद्रित होगा। इन उपायों को आगे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सौहार्द, सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देने वाली द्विपक्षीय, त्रिपक्षीय और बहुपक्षीय संरचनाओं के मौजूदा तंत्रों के माध्यम से लागू किया जा सकेगा।

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