नीतीश कुमार मुख्यमंत्री का पद छोड़ने से पहले एक बार फिर जनता के बीच जा रहे हैं। वह 10 मार्च से समृद्धि यात्रा पर निकल रहे हैं। उनकी इस यात्रा के क्या मायने हैं? शायद वह दिखाना चाहते हैं कि ंवह स्वास्थ्य की दृष्टि से बिल्कुल दुरुस्त हैं क्योंकि उनकी बीमारी को लेकर तरह-तरह अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि चर्चा यह भी है कि कुमार जनता से संवाद करके उनके साथ अपना कनेक्शन साबित करना चाहते हैं। बिहार के ताजा राजनीतिक घटकनाक्रम पर गौर करें तो भारतीय जनता पार्टी मंे मुख्यमंत्री के नये चेहरे की तलाश कर रही है। वहीं, जनता दल (यूनाटेड) अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है, क्योंकि भाजपा की अगुवाई में नई सरकार बनने के बाद जदयू के विधायकों और मंत्रियों की वह भूमिका नहीं हो सकती है जो नीतीश सरकार में रही है। इसलिए, वह चाहते हैं कि नीतीश ही मुख्यमंत्री बने रहें। चर्चा यह भी है कि नौकरशाह भी मुख्यमंत्री के तौर पर नीतीश कुमार को ही देखना चाहते हैं, क्योंकि इनकी सरकार में नौकरशाहों को खुली छूट मिली हुई है जबकि भाजपा में ऐसा नहीं होगा। इसलिए, नौकरशाह इस समृद्धि यात्रा के जरिये नीतीश कुमार के पक्ष में माहौल बनाना चाहते हैं। वह यह दिखाना चाहते हैं कि बिहार की भलाई नीतीश सरकार में ही है। जबकि बिहार में इस समय बड़े बदलाव की आहट मिल रही है। आशंका जताई जा रही है कि राज्य की भोगोलिक सीमा में बदलाव हो सकता है। इस बीच नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार ने जद(यू) की सदस्यता ग्रहण कर ली है। संभव है कि अगली सरकार में वह उपमुख्यमंत्री भी बन जाएं। लेकिन नीतीश कुमार के दिल्ली रवाना होने की तैयारी हो चुकी है। वह राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल कर चुके हैं और 16 मार्च को चुनाव के नतीजे आने के बाद वह उच्च सदन के सदस्य बन जाएंगे। इसकी पूरी संभावना है। इसके बाद बिहार में भाजपा राज कायम होगा। इसलिए नीतीश की इस यात्रा के औचित्य पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
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