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खान मंत्रालय अंडमान सागर में अपतटीय खनिज ब्लॉकों की नीलामी शुरू करेगा

भारत सरकार का खान मंत्रालय कल अपतटीय खनिज ब्लॉकों की नीलामी शुरू करेगा। यह भारत की अपतटीय खनिज क्षमता को अनलॉक करने और देश की दीर्घकालिक खनिज संसाधन सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्‍वपूर्ण कदम है।

तकनीकी प्रगति, स्वच्छ  ऊर्जा की ओर बदलाव तथा मजबूत सप्लाई चेन के संदर्भ में अपतटीय खनिज संसाधन महत्वपूर्ण हैं। कोबाल्ट, निकेल, मैंगनीज, कॉपर और दुर्लभ मृदा तत्व (रेयर अर्थ एलिमेंट) जैसे खनिज इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणाली , उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स और रणनीतिक उद्योगों के लिए अहम इनपुट हैं। इसलिए, घरेलू अपतटीय खनिज संसाधनों का विकास करने से भारत के आत्मनिर्भरता, संसाधन सुरक्षा और टिकाऊ आर्थिक विकास के लक्ष्यों में योगदान मिल सकता है।

यह नीलामी, अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 2002 और अपतटीय क्षेत्र खनिज (नीलामी) नियमावली, 2024 के समय-समय संशोधित किए गए प्रावधानों के तहत की जा रही है। 2023 में अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम में संशोधन के बाद, खान मंत्रालय को अपतटीय खनिज ब्लॉक की नीलामी करने का अधिकार दिया गया है, जिससे अपतटीय खनिज संसाधन का पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी आवंटन संभव हो सकेगा।

इस नीलामी में अंडमान सागर क्षेत्र के दो अपतटीय खनिज ब्लॉक शामिल हैं, जिन्हें समग्र लाइसेंस देने के लिए पेश किया जाएगा। उम्मीद है कि इससे व्यवस्थित अन्वेषण को बढ़ावा मिलेगा, निवेश आकर्षित होगा और अपतटीय खनिज के अन्वेषण और विकास के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

यह पहल व्यवस्थित अन्वेषण और अपतटीय संसाधन के जिम्मेदार विकास के माध्यम से भारत के खनिज संसाधन आधार को बढ़ाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इससे भविष्य की औद्योगिक और रणनीतिक जरूरतों को पूरा करने की अधिक क्षमता वाले उभरते क्षेत्र में निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलने की भी उम्मीद है।

नीलामी की शुरुआत भारत की अपतटीय खनिज संपदा का उपयोग करने और उभरती प्रौद्योगिकी, औद्योगिक विकास तथा दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए देश की खनिज सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम है।

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