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दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना 2.0


कुशल और आत्मनिर्भर कार्यबल का  निर्माण

 कौशल और अवसरों के माध्यम से ग्रामीण युवाओं का सुदृढ़ीकरण

भारत की युवा आबादी आर्थिक विकास और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करती है। युवा आबादी के 2036 तक लगभग 345 मिलियन पहुंचने का अनुमान है। इस जनसांख्यिकीय क्षमता का उपयोग करने के लिए गुणवत्तापूर्ण कौशल, रोजगार और आजीविका के अवसरों तक अधिक पहुंच की आवश्यकता होती है। इस आवश्यकता को पहचानते हुए, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 25 सितंबर 2014 में दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना (डीडीयूजीकेवाई) शुरू की। इस वर्ष DDU-GKY अपनी 12वीं वर्षगांठ मना रहा है, ऐसे में यह योजना ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल से रोजगार और सतत आजीविका की दिशा में अवसरों को सुदृढ़ करने के अपने प्रयासों को जारी रखे हुए है। एक दशक से अधिक समय से यह योजना गरीब परिवारों के 15–35 वर्ष आयु वर्ग के ग्रामीण युवाओं को रोजगार से जुड़ा कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर रही है।

यह एससी/एसटी समुदायों (50 प्रतिशत), महिलाओं (33प्रतिशत) और दिव्‍यांगजनों (5प्रतिशत) के अनिवार्य कवरेज के माध्यम से सामाजिक समावेशन को भी बढ़ावा देता  है। पिछले एक दशक में, यह योजना रोजगार परिणामों और प्लेसमेंट के बाद की सहायता पर अधिक बल देने के लिए विकसित हुई है। सरकार ने  मई 2025 में  उन्नत (डीडीयूजीकेवाई) 2.0 दिशानिर्देशों को अधिसूचित किया, जिससे प्रशिक्षण, प्लेसमेंट, रोजगार स्थिरता और पोस्टप्लेसमेंट सहायता के ढांचे को मजबूत किया गया। संशोधित ढांचा एयरोस्पेस और विमानन, कृषि, सौंदर्य और कल्याण, हरित रोजगार, स्वास्थ्य देखभाल, वस्‍त्र और अन्य सहित उद्योग की आवश्यकताओं के आधार पर कई क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान करता है। ग्रामीण कौशल पर निरंतर ध्यान केंद्रीय बजट 2026-27 में भी परिलक्षित होता है, जिसमें  डीडीयूजीकेवाई को 750 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

विशेष पहल: संवेदनशील क्षेत्रों के लिए लक्षित उपाय

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के तहत दो विशेष कार्यक्रम लागू किए जा रहे हैं:

रोशनी: यह गृह मंत्रालय द्वारा अधिसूचित वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित जिलों की विशिष्ट आवश्यकताओं पर ध्‍यान देता है। यह महिला उम्मीदवारों के लिए 40 प्रतिशत कवरेज के साथ आवासीय कौशल प्रशिक्षण को अधिदेशित करता है। इस पहल को स्थानीय बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक कौशल पर ध्यान केंद्रित करते हुए आकांक्षी जिलों तक विस्तारित किया गया है।

हिमायत: यह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए एक विशेष डीडीयू-जीकेवाई योजना है। यह बीपीएल और एपीएल व्यक्तियों सहित ग्रामीण और शहरी युवाओं को कवर करता है, और मजदूरी, स्वयं और गिग रोजगार का समर्थन करता है। यह योजना 100 प्रतिशत केंद्र द्वारा वित्त पोषित है और समर्पित मिशन प्रबंधन इकाइयों के माध्यम से राज्य के समर्थन से कार्यान्वित की गई है।

पूर्वोत्तर: सामाजिक-सांस्कृतिक अंतर और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए अद्वितीय स्थलाकृति के संदर्भ में चुनौतियों को स्वीकार करते हुए, डीडीयू-जीकेवाई के लिए कुल आवंटन में से 10 प्रतिशत पूर्वोत्तर राज्यों के लिए निर्धारित किया गया है।

दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच: इसके अलावा विशेष क्षेत्र भत्ते का प्रावधान है जहां परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियां प्रति उम्मीदवार आधार प्रशिक्षण लागत के अतिरिक्त 10 प्रतिशत की दर से भुगतान के लिए पात्र होंगी।

डीडीयूजीकेवाई 2.0: सतत रोजगार की ओर बदलाव

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 कौशल और रोजगार के लिए अधिक समग्र दृष्टिकोण अपनाता है, जिसमें प्रशिक्षण और प्लेसमेंट से लेकर रोजगार प्रतिधारण और करियर की प्रगति तक की यात्रा शामिल है।

संशोधित ढांचा प्रशिक्षण मानकों को मजबूत करता है, न्यूनतम प्लेसमेंट अवधि बढ़ाता है और प्लेसमेंट के बाद के समर्थन को बढ़ाता है। यह प्रवासन से जुड़ी चुनौतियों का भी समाधान करता है और प्रौद्योगिकी-सक्षम निगरानी और कार्यान्वयन को मजबूत करता है।

प्रशिक्षण ढांचे का मानकीकरण

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 अधिक संरचित प्रशिक्षण ढांचा प्रदान करते हुए न्यूनतम 576 घंटे की अवधि को बरकरार रखता है। तीन महीने के पाठ्यक्रम  में 396 घंटे का डोमेन प्रशिक्षण और 180 घंटे का अनिवार्य गैरडोमेन प्रशिक्षण शामिल है। गैर-डोमेन घटक को चार क्षेत्रों में मानकीकृत किया गया है: अंग्रेजी संचार (60 घंटे), रोजगारपरकता और जीवन कौशल (60 घंटे), कंप्यूटर और डिजिटल साक्षरता (30 घंटे) और उद्यमिता (30 घंटे) यह सुनिश्चित करता है कि उम्मीदवारों को संचार, कार्यस्थल, डिजिटल और उद्यमशीलता क्षमताओं के साथसाथ रोजगार-विशिष्ट तकनीकी कौशल प्राप्त हो

प्लेसमेंट अवधि

इससे पहले, डीडीयू-जीकेवाई प्लेसमेंट को कम से कम तीन महीने के लिए निरंतर रोजगार के रूप में परिभाषित किया गया था। इस मजबूत प्रशिक्षण नींव के आधार पर, डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के तहत, न्यूनतम प्लेसमेंट अवधि को छह महीने तक बढ़ा दिया गया है। संशोधित दिशानिर्देशों में वेतन, स्वरोजगार और गिग रोजगार सहित निरंतर और गैर-निरंतर रोजगार दोनों को शामिल किया गया है।

ग्रामीण युवाओं को नियोक्ताओं से जोड़ने के लिए रोजगार मेले

 स्थानीय युवाओं को संभावित नियोक्ताओं से जोड़ने के लिए एसआरएलएम द्वारा ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तरों पर रोजगार मेलों का आयोजन किया जाता है। इनमें कौशल पंजी के माध्यम से युवा पंजीकरण और परामर्श, नियोक्ता सत्यापन और एक वर्ष के लिए प्लेसमेंट परिणामों की ट्रैकिंग शामिल है। मेले मुख्य रूप से रोजगार योग्य कौशल वाले युवाओं के लिए हैं, जिनमें बेहतर रोजगार अवसरों की तलाश करने वाले डीडीयू-जीकेवाई-प्रशिक्षित उम्मीदवार भी शामिल हैं।  डीडीयू-जीकेवाई बजट  से प्रति जीपीस्तर के मेले में 50,000 रुपये और प्रति ब्लॉकस्तरीय मेले में 1 लाख रुपये तक का वित्‍त पोषण उपलब्ध है, जो क्रमशः 100 और 200 उम्मीदवारों की नियुक्ति के अधीन है।

रोजगार प्रतिधारण और कैरियर की प्रगति का सुदृढ़ीकरण

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के तहत, निरंतर रोजगार पर अधिक जोर दिया गया है। विस्तारित छह महीने की प्लेसमेंट अवधि का समर्थन करने के लिए, डीडीयू-जीकेवाई 2.0 रोजगार निरंतरता को सुविधाजनक बनाने के लिए 12 महीने की पोस्ट-प्लेसमेंट ट्रैकिंग प्रदान करता है, विशेष रूप से:

  • प्लेस किए गए उम्मीदवारों को छह महीने के लिए 1,270 रुपये प्रति माह की दर से 7,620 रुपये की वित्तीय सहायता मिलती है।
  • इसके अलावा, 365 दिनों के लिए कार्यरत रहने वाले उम्मीदवारों को प्रति उम्मीदवार 5,000 रुपये की प्रतिधारण सहायता प्रदान की जाती है, जिसमें अधिकतम 60 दिनों का रोजगार ब्रेक होता है।
  • प्लेसमेंट के 12 महीने बाद नियुक्त उम्मीदवारों को कौशल बढ़ाने और पुनर्कौशल निर्माण के अवसर भी प्रदान किए जाते हैं, जिससे वे अपने कौशल को मजबूत कर सकते हैं और निरंतर रोजगार एवं करियर की प्रगति के लिए अपनी संभावनाओं में सुधार कर सकते हैं।

प्रवासन सहायता केंद्र (एमएससी)

यह देखते हुए कि प्रशिक्षित उम्मीदवारों का एक बड़ा अनुपात आजीविका के अवसरों की खोज में पलायन करता है, डीडीयू-जीकेवाई 2.0 ने प्रवासन सहायता प्रणालियों को सुदृढ़ करने पर नए सिरे से बल दिया है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम) उन क्षेत्रों में प्रवासन सहायता केंद्र (एमएससी) स्थापित करते हैं जहां उम्मीदवारों का उच्च घनत्‍व होता है। ये केंद्र गृह राज्य और गंतव्य राज्यों दोनों में काम करते हैं। एमएससी इस परिवर्तन के दौरान उम्मीदवारों की सहायता करने के लिए कई सेवाएं प्रदान करते हैं, जिसमें आवास सहायता, परामर्श और प्लेसमेंट सहायता शामिल है।

वे रोजगार से संबंधित जानकारी के प्रवाह की सुविधा भी प्रदान करते हैं, पूर्व छात्रों की नेटवर्किंग को प्रोत्साहित करते हैं और नियोक्ताओं के साथ जुड़ाव को मजबूत करते हैं। इसके अलावा, केंद्र स्थानीय प्रशासनिक निकायों और सेवा प्रदाताओं के साथ संपर्क करते हैं ताकि उम्मीदवारों को शहरी कार्य वातावरण में बसने और समय के साथ स्थिर रोजगार में बने रहने में मदद मिल सके। इस सहायता प्रणाली के बढ़ते महत्व को दर्शाते हुए, एमएससी के लिए प्रति केंद्र वार्षिक वित्त पोषण को संशोधित  ढांचे के तहत पहले के 10 लाख रुपये से  बढ़ाकर 30 लाख रुपये तक कर दिया गया है।

कार्यान्वयन में प्रौद्योगिकी का उपयोग

प्रौद्योगिकी एकीकरण अपनी स्थापना के बाद से डीडीयूजीकेवाई की एक उल्‍लेखनीय विशेषता रही है। यह ढांचा जियोटैग और टाइमस्टैम्प्ड बायोमेट्रिक उपस्थिति रिकॉर्ड, कंप्यूटर लैब और ई-लर्निंग सुविधाओं पर भरोसा करता है। इन उपायों ने डिजिटल उपकरणों के लिए प्रशिक्षुओं के अनुभव को बढ़ाते हुए कार्यक्रम की निगरानी को मजबूत किया।

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 पूरे कार्यक्रम जीवनचक्र को शामिल करते हुए एक समग्र डिजिटल समाधान पेश करके इस तकनीकी आधार पर आधारित है। यह प्लेटफॉर्म पीआईए ऑनबोर्डिंग, प्रोजेक्ट सबमिशन और मूल्यांकन, प्रशिक्षण-केंद्र और उम्मीदवार प्रबंधन, मूल्यांकन और प्रमाणन, वित्तीय प्रबंधन, और परियोजना निगरानी और प्लेसमेंट ट्रैकिंग तक फैला हुआ है।

संशोधित दृष्टिकोण यह भी प्रस्‍तुत करता है:

  • वास्तविक समय कार्यक्रम की निगरानी के लिए उन्नत डैशबोर्ड।
  • प्रशिक्षण के लिए सार्वजनिक उम्मीदवार पोर्टल, खोज और पीआईए प्रदर्शन रेटिंग का अवलोकन करने के लिए।
  • स्वचालित प्रक्रियाएं, जिनमें परियोजना पंजीकरण संख्या (पीआरएन) निर्माण, शिकायत निवारण और प्रमाण पत्र सत्यापन शामिल हैं।
  •  चेहरा प्रमाणीकरण और वास्तविक समय डैशबोर्ड के माध्यम से डिजिटल उपस्थिति और मूल्यांकन।
  • स्वचालित पाठ्यक्रम-विवरण सत्यापन के लिए स्किल इंडिया डिजिटल हब एकीकरण।

डीडीयूजीकेवाई 2.0 के कार्यान्‍वयन (2025-26) में अग्रणी

  • गोवा डीडीयू जीकेवाई 2.0 के बैच बनाने में अग्रणी राज्‍य के रूप में उभरा है।
  • आंध्र प्रदेश ने 3 महीने की अल्‍प अवधि में 12000 से अधिक उम्मीदवारों का प्रशिक्षण शुरू कर दिया है।
  • जम्मू और कश्मीर ने 100 प्रतिशत लक्ष्य आवंटित किए और 91 प्रतिशत आवंटन के लिए प्रशिक्षण शुरू किया।

योजना के तहत अर्जित की गई प्रमुख उपलब्धियां

डीडीयू-जीकेवाई को वर्तमान में एक व्यापक कौशल नेटवर्क के माध्यम से 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में क्रियान्वित किया जा रहा है। अब तक, इस कार्यक्रम में 455 से अधिक पीआईए के साथ साझेदारी में 760 सक्रिय प्रशिक्षण केंद्रों के साथ 749 अनुमोदित परियोजनाएं हैं।

2014-15 में अपनी स्थापना के बाद से, डीडीयू-जीकेवाई ने 18.47 लाख से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया है, जिसमें अर्थव्यवस्था के सभी 36 सेक्‍टर और 800 से अधिक रोजगार भूमिकाएं शामिल हैं और 12.43 लाख से अधिक प्‍लेसमेंट किया गया है। यह योजना की व्यापक क्षेत्रीय पहुंच और ग्रामीण युवाओं के लिए उद्योग-संयोजि कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करने को दर्शाता है।

इस योजना के तहत 9.71 लाख से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया और 6.34 लाख से अधिक महिलाओं ने प्लेसमेंट अर्जित किया।

ग्रामीण युवा उद्यमिता की सहायता करने वाली अन्य पहलें

जहां डीडीयू-जीकेवाई प्लेसमेंट से जुड़े मजदूरी रोजगार पर ध्यान केंद्रित करता है, सरकार ने एक साथ ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों (आरएसईटीआईके माध्यम से स्वरोजगार और उद्यमिता के रास्ते को मजबूत किया है। यह कार्यक्रम 18-50 वर्ष की आयु के ग्रामीण बेरोजगार युवाओं को नि:शुल्‍क आवासीय प्रशिक्षण प्रदान करता  है, इसके बाद स्थायी आजीविका स्थापित करने के लिए सहायता प्रदान करता है। यह कार्यक्रम देश के हर जिले में समर्पित कौशल बुनियादी ढांचे का निर्माण करता है। यह ग्रामीण युवाओं, विशेष रूप से गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) और डीएवाई-एनआरएलएम परिवारों के युवाओं को कौशल बढ़ाने पर केंद्रित है।

अब तक, 33 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 634 जिलों में कुल 647 आरएसईटीआई प्रचालनगत हैं । अपनी स्थापना (2009) के बाद से, इस योजना ने 63.47 लाख उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया है। कुल 45.60 लाख उम्मीदवारों को भी प्रशिक्षित किया गया है। आरएसईटीआई के तहत प्रशिक्षित किए गए उम्मीदवारों में से लगभग 94 प्रतिशत ने स्थायी स्वरोजगार उद्यम स्थापित किए हैं। लगभग 6 प्रतिशत ने मजदूरी रोजगार प्राप्‍त किया है।

भविष्य के लिए ग्रामीण भारत के कार्यबल को आकार

ग्रामीण युवाओं के कौशल, रोजगार क्षमता और उद्यमिता क्षमता को सुदृढ़ करना भारत में समावेशी आर्थिक विकास के केंद्र में है। डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के माध्यम से, सरकार एक अधिक उत्तरदायी, प्रौद्योगिकी-संचालित और परिणाम-उन्मुख कौशल इकोसिस्‍टम सृजित कर रही है। कार्यक्रम ग्रामीण युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करते हैं और निरंतर आजीविका सहायता करते हैं। गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, उद्योग साझेदारी और उत्तरदायी सहायता पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने से कौशल को टिकाऊ आजीविका में बदलने में मदद मिल सकती है। डीडीयू-जीकेवाई 2.0 भविष्य के लिए कुशल, सशक्त और आत्मनिर्भर ग्रामीण कार्यबल के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह भारत के विकसित भारत @2047 के विजन को भी बढ़ावा देता है जिसका उद्देश्य देश को वैश्विक आर्थिक और ज्ञान केंद्र में रूपांतरित करना है।

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