हाथी संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता महज एक नीतिगत विकल्प नहीं, बल्कि सभ्यतागत मूल्यों और पारिस्थितिक उत्तरदायित्व का प्रतिबिंब है: पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह
मानव-हाथी संघर्ष के मामलों को सुलझाने में राज्य सरकार का आदर्श वाक्य है ‘संघर्ष से सह-अस्तित्व,’ उपमुख्यमंत्री (आंध्र प्रदेश), श्री के. पवन कल्याण
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री ने प्रोजेक्ट एलिफेंट की 23वीं संचालन समिति की बैठक की अध्यक्षता की, भारत भर में ‘मानव-हाथी संघर्ष: विभिन्न परिदृश्य’ विषय पर कार्यशाला आयोजित
दक्षिण भारत में मानव-हाथी संघर्ष की व्यापक समझ और प्रबंधन के लिए क्षेत्रीय कार्य योजना जारी
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री (ईएफसीसी) श्री कीर्तिवर्धन सिंह ने आज विशाखापत्तनम में विश्व हाथी दिवस 2026 के राष्ट्रीय समारोह की अध्यक्षता की। आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री कोनिडाला पवन कल्याण इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में ईएफसीसी के सचिव श्री तन्मय कुमार, वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव श्री सुशील कुमार अवस्थी, वन्यजीव उप महानिदेशक श्री रमेश पांडे, मंत्रालय और आंध्र प्रदेश वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। रेल मंत्रालय, राज्य वन विभागों, वैज्ञानिक संस्थानों के अधिकारी और अन्य हितधारक भी कार्यक्रम में उपस्थित थे।

श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत हाथियों के लिए सतत भविष्य की दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इसके लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रिमोट सेंसिंग और भू-स्थानिक मानचित्रण जैसी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को पारंपरिक ज्ञान के साथ मिलाकर उनके वासों की रक्षा की जा रही है। उन्होंने मानव-हाथी संघर्ष (एचईसी) को कम करने और स्थानीय समुदायों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए अंतर-क्षेत्रीय सहयोग, सामुदायिक भागीदारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर भी बल दिया।
श्री सिंह ने कहा कि हाथियों के संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता केवल एक नीतिगत निर्णय नहीं है, बल्कि यह हमारे सभ्यतागत मूल्यों और पारिस्थितिक जिम्मेदारी का प्रतिबिंब है। उन्होंने रेखांकित किया कि 33 हाथी अभ्यारण्यों, वैज्ञानिक रूप से पहचाने गए 150 हाथी गलियारों और विश्व की लगभग 60 प्रतिशत जंगली एशियाई हाथी आबादी के साथ, भारत हाथी संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि एचईसी एक जटिल मुद्दा है और इसके लिए विभिन्न हितधारकों को शामिल करते हुए और जमीनी स्तर पर वैज्ञानिक आंकड़ों का सत्यापन करने के बाद समन्वित समाधान की आवश्यकता है।

आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री कोनिडाला पवन कल्याण ने मुख्य भाषण देते हुए बताया कि एचईसी मामलों को सुलझाने में राज्य सरकार का आदर्श वाक्य ‘संघर्ष से सह-अस्तित्व’ है, क्योंकि इसे राज्य की प्रशासनिक सीमाओं से परे एक साझा जिम्मेदारी माना जाता है। उन्होंने आंध्र प्रदेश सरकार की हनुमान (वन्यजीवों की निगरानी, सहायता और देखभाल के लिए उपचार और पोषण इकाइयां) पहल के बारे में भी बात की और बताया कि राज्य सरकार आधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रही है। साथ ही स्थानीय समुदायों के साथ जुड़कर राज्य में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अग्रिम पंक्ति के वन कर्मचारियों की क्षमता का निर्माण भी कर रही है।
राष्ट्रीय समारोहों के एक भाग के रूप में, श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने हाथी संरक्षण और प्रबंधन में अनुकरणीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को गज गौरव पुरस्कार 2026 प्रदान किए।

इस कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण ’30 जायंट स्टेप्स‘ का विमोचन था, जिसमें परियोजना हाथी के अंतर्गत 2020-2026 के दौरान हासिल की गई 30 प्रमुख उपलब्धियों, लक्ष्यों और संरक्षण पहलों को उजागर किया गया है। 1992 में केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में शुरू प्रोजेक्ट एलिफेंट ने हाथियों, उनके आवासों और गलियारों की रक्षा करने, एचईसी की समस्या का समाधान करने और बंदी हाथियों के कल्याण को सुनिश्चित करने की दिशा में तीन दशकों से अधिक के समर्पित प्रयास पूरे कर लिए हैं।
एक अन्य महत्वपूर्ण पहल दक्षिण भारत (कर्नाटक, केरलम, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु) में मानव-हाथी संघर्ष की व्यापक समझ और प्रबंधन के लिए क्षेत्रीय कार्य योजना थी। प्रोजेक्ट एलिफेंट के तहत दक्षिणी हाथी क्षेत्र राज्यों, वैज्ञानिक संस्थानों और विषय विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार की गई यह योजना, पूरे क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष से निपटने के लिए भू-दृश्य स्तर का दृष्टिकोण अपनाती है। भारत सरकार के 500 करोड़ रुपये के सहयोग से निर्मित यह योजना, पर्यावास संपर्क, गलियारा संरक्षण, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, संघर्ष शमन अवसंरचना, पर्यावास बहाली, सामुदायिक भागीदारी, अनुसंधान और निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र, क्षमता निर्माण और अंतरराज्यीय समन्वय को मजबूत करने पर केंद्रित है।

इस अवसर पर जर्नल ऑफ वाइल्डलाइफ साइंस का एक विशेष अंक भी जारी किया गया, जो भारत में हाथी संरक्षण के तीन दशकों को समर्पित है। यह विशेष अंक पिछले तीन दशकों में अर्जित वैज्ञानिक ज्ञान और शोध को संकलित करता है, ताकि प्रोजेक्ट एलिफेंट के तहत हाथियों के भविष्य के प्रबंधन और संरक्षण में सहायता मिल सके। ‘1947 से पहले मध्य भारत में एशियाई हाथी‘ नामक एक मोनोग्राफ भी जारी किया गया, जो मध्य भारत में हाथियों के वितरण, स्थिति और मानव-हाथी संबंधों का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक विवरण प्रस्तुत करता है।
श्री कीर्ति वर्धन सिंह की अध्यक्षता में प्रोजेक्ट एलिफेंट की 23वीं संचालन समिति की बैठक विशाखापत्तनम में आयोजित की गई। बैठक में हाथी संरक्षण और प्रबंधन के वर्तमान मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया और कई महत्वपूर्ण पहलों और प्रकाशनों का विमोचन किया गया, जिनमें द ट्रम्पेट, खंड VI अंक 01, नीलगिरी हाथी अभ्यारण्य के लिए आदर्श हाथी संरक्षण योजना, ‘कैप्टिव एलिफेंट हसबेंड्री : साइंस, वेलफेयर एंड प्रैक्टिस’ और मानव-हाथी संघर्ष अध्ययन का द्वितीय चरण – केरलम, कर्नाटक, तमिलनाडु, ओडिशा और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। ये पहल साक्ष्य-आधारित संरक्षण, बंदी हाथियों के कल्याण और भू-दृश्य स्तर पर मानव-हाथी संघर्ष प्रबंधन को और मजबूत करती हैं।

समारोह के अंतर्गत ‘मानव-हाथी संघर्ष: भारत भर में विभिन्न परिदृश्य‘ विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें हाथी-बहुल राज्यों के नियामक प्राधिकरणों, वैज्ञानिक संस्थानों और क्षेत्रीय एजेंसियों को एक साथ लाया गया। इसमें वैज्ञानिक प्रमाणों, दीर्घकालिक आंकड़ों और जमीनी अनुभवों के माध्यम से मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति, रुझानों और क्षेत्रीय विविधताओं की समीक्षा की गई। चर्चा का केंद्र बिंदु संघर्ष को कम करने के लिए नवीन नीतियां, प्रौद्योगिकियां और सर्वोत्तम प्रथाएं थीं, जिनमें पशु चिकित्सा उपाय, बिजली के झटके से होने वाली मृत्यु और रेलवे दुर्घटनाओं से हाथियों की मृत्यु की रोकथाम, आवास और गलियारा प्रबंधन तथा एकीकृत परिदृश्य दृष्टिकोण शामिल थे। कार्यशाला में मानव-हाथी सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने के लिए समन्वित, विज्ञान-आधारित रणनीतियों हेतु पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, राज्य वन विभागों, अनुसंधान संस्थानों, भारतीय रेलवे और अन्य हितधारकों के बीच सहयोग को मजबूत करने पर भी बल दिया गया।
देशव्यापी कार्यक्रमों के अंतर्गत, प्रोजेक्ट एलिफेंट ने राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय के सहयोग से देश भर में एक व्यापक जागरूकता अभियान का आयोजन किया । इस अभियान में 21,450 विद्यालयों के 20 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। हाथियों के पारिस्थितिक और सांस्कृतिक महत्व तथा उनके आवासों की रक्षा के महत्व के प्रति बच्चों को जागरूक करने के लिए चित्रकला और मुखौटा बनाने की प्रतियोगिताएं, रैलियां, नुक्कड़ नाटक, जागरूकता कार्यक्रम और शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किए गए। देश भर के विद्यार्थियों ने हाथियों की रक्षा और संरक्षण की शपथ ली और वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण के युवा राजदूत बनने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।


विशाखापत्तनम में विश्व हाथी दिवस 2026 के समारोहों ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, आवास और गलियारा संरक्षण, सामुदायिक भागीदारी और समन्वित कार्रवाई के माध्यम से अपने राष्ट्रीय विरासत पशु के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की और यह सुनिश्चित किया कि भावी पीढ़ियों को स्वस्थ हाथी आबादी और गतिशील वन परिदृश्य विरासत में प्राप्त हो सकें।
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