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प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) की प्रगति

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 32.47 लाख आवास स्वीकृत किए गए हैं और 26.57 लाख आवास पूर्ण किए गए हैं, जिसमें पिछले वित्त वर्षों में जारी की गई स्वीकृतियां शामिल हैं। राज्य/संघ राज्य क्षेत्र-वार विवरण अनुबंध-I पर दिया गया है।

दिनांक 03.08.2026 तक, पीएमएवाई-जी के अंतर्गत राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को आवंटित 4.18 करोड़ आवासों के कुल लक्ष्य के सापेक्ष 3.91 करोड़ आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, और 3.12 करोड़ आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। शेष 79 लाख स्वीकृत आवास निर्माणाधीन हैं।

पीएमएवाई-जी के अंतर्गत, आवास का निर्माण लाभार्थी द्वारा स्वयं अथवा उसकी देखरेख में किया जाता है। इसके अतिरिक्त, पीएमएवाई-जी के दिशानिर्देशों के अनुसार, राज्य/संघ राज्य क्षेत्र लाभार्थियों को उनके निवास क्षेत्र के अनुकूल स्थानीय सामग्री और प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए, स्थानीय जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप आवास डिज़ाइनों का एक समूह विकल्प के रूप में उपलब्ध कराते हैं। राज्य/संघ राज्य क्षेत्र सरकार प्रतिस्पर्धी दरों पर निर्माण सामग्री की आपूर्ति की सुविधा भी प्रदान कर सकती है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ग्रामीण आवास प्रारूपों का एक संग्रह “पहल” प्रकाशित किया है, जो पीएमएवाई-जी की कार्यक्रम वेबसाइट पर उपलब्ध है। इसे आवास ऐप के माध्यम से भी देखा जा सकता है। इसके अतिरिक्त, पीएमएवाई-जी के अंतर्गत आवासों के अच्छे गुणवत्तापूर्ण निर्माण को सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में आवास निर्माण हेतु पर्याप्त संख्या में राजमिस्त्रियों को प्रशिक्षित करने के लक्ष्य के साथ ग्रामीण राजमिस्त्री प्रशिक्षण (आरएमटी) कार्यक्रम आरंभ किया है।

सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में पीएमएवाई-जी के अंतर्गत आवासों का समय पर निर्माण सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय द्वारा कई कदम उठाए गए हैं। इनमें शामिल हैं:

(i) राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को समय पर लक्ष्यों का आवंटन और पर्याप्त निधियों का जारी किया जाना;

(ii) प्रगति की नियमित समीक्षा;

(iii) डैशबोर्ड पर योजना की निगरानी और पर्यवेक्षण;

(iv) मंत्रालय द्वारा राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के साथ नियमित कार्यशालाओं का आयोजन;

(v) ग्रामीण राजमिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम, आदि।

योजना के अंतर्गत प्रदत्त इकाई सहायता के अतिरिक्त, पीएमएवाई-जी के लाभार्थी परिवारों को जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की जल जीवन मिशन (जेजेएम) और हर घर नल से जल (एचजीएनएसजे) अथवा अन्य समरूप योजनाओं के अभिसरण के माध्यम से पाइप से पेयजल भी उपलब्ध कराया जाता है। इसके अतिरिक्त, लाभार्थियों को विद्युत मंत्रालय, राज्य सरकारों, अथवा संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों द्वारा कार्यान्वित संबंधित योजनाओं के माध्यम से विद्युत कनेक्शन प्रदान किए जाते हैं, तथा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) अथवा अन्य संबंधित योजनाओं के अंतर्गत लिक्विड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) कनेक्शन प्रदान किए जाते हैं।

योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार, पीएमएवाई-जी के अंतर्गत लक्ष्यों का 5% तक विशेष परियोजनाओं जैसे कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की विद्यमान राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना में वर्गीकृत प्राकृतिक आपदाओं – बाढ़, भूकंप, अग्निकांड आदि के कारण जिन परिवारों के आवास पूर्णतः/अधिकांश रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनके पुनर्वास/स्थानांतरण के लिए आरक्षित है।

इसके अतिरिक्त, पीएमएवाई-जी के अंतर्गत, राष्ट्रीय स्तर पर लक्ष्य का न्यूनतम 60% अनुसूचित जाति (एससी)/अनुसूचित जनजाति (एसटी) परिवारों के लिए ऐसे पात्र लाभार्थियों की उपलब्धता के अधीन आरक्षित है।

इसके अतिरिक्त, जनजातीय कार्य मंत्रालय के प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम-जनमन) के अंतर्गत, विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) परिवारों को बुनियादी सुविधाओं सहित पक्के आवास उपलब्ध कराने का प्रावधान, ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किए जा रहे कार्यकलापों में से एक है।

पीएमएवाई-जी के अंतर्गत निधियां राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को आवंटित की जाती हैं, जिसमें प्रत्येक राज्य/संघ राज्य क्षेत्र को एक इकाई माना जाता है। जिलों के बीच इन निधियों का वितरण संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र सरकारों द्वारा किया जाता है। पिछले दो वित्त वर्षों में, विशेष परियोजनाओं के अंतर्गत व्यय ₹528.04 करोड़ रहा, जबकि आकांक्षी जिलों में ₹17,281.58 करोड़ का व्यय दर्ज किया गया, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों के अंश शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, पीएम-जनमन के अंतर्गत, वित्त वर्ष 2024-25 और वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान पीवीटीजी लाभार्थियों के लिए ₹2,465.38 करोड़ का केंद्रीय अंश जारी किया गया, जिसके सापेक्ष केंद्र और राज्यों दोनों के योगदान सहित कुल ₹6,329.06 करोड़ का व्यय किया गया।
                                                                                                                                अनुबंध-I

वित्त वर्ष 2025-26 में (लक्ष्य वित्त वर्ष से निरपेक्ष) स्वीकृत और पूर्ण किए गए आवासों का राज्य-वार विवरण:

क्रम सं.राज्य/संघ राज्य क्षेत्र का नामस्वीकृत आवासपूर्ण आवास
1अरुणाचल प्रदेश
2असम3,40,9771,35,426
3बिहार4,73,8392,63,151
4छत्तीसगढ़3,44,4635,92,508
5गोवा3
6गुजरात4,4751,23,451
7हरियाणा5,63812,405
8हिमाचल प्रदेश2236,531
9जम्मू और कश्मीर316,015
10झारखंड1,48,64040,870
11केरल7,6143,873
12मध्य प्रदेश5,59,0114,90,185
13महाराष्ट्र9,40,8494,42,074
14मणिपुर5,16518,981
15मेघालय15,900
16मिजोरम520
17नागालैंड6,602
18ओडिशा6341,61,256
19पंजाब4,87413,485
20राजस्थान2,24,4582,02,234
21सिक्किम2
22तमिलनाडु1,74930,084
23त्रिपुरा4,754
24उत्तर प्रदेश3319,412
25उत्तराखंड69
26पश्चिम बंगाल1,172
27अंडमान और निकोबार83
28दादरा और नगर हवेली2,085
29दमन और दीव14
30लक्षद्वीप
31आंध्र प्रदेश5,243
32कर्नाटक1,84,30118,840
33लद्दाख
कुल32,46,74526,57,228

यह जानकारी केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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