LIVE

कम-प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन

देश में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकार क्षेत्र में 3688 केंद्रीय रूप से संरक्षित स्मारक/स्थल हैं। एएसआई राष्ट्रीय संरक्षण नीति के अनुसार इन स्मारकों और स्थलों का संरक्षण करता है। इन स्मारकों और स्थलों की समय-समय पर स्थिति का आकलन तथा दैनिक अनुरक्षण आवश्‍यकता एवं उपलब्‍ध संसाधनों के अनुसार नियमित रूप से किया जाता है।

पिछले पांच वर्षों के दौरान इन स्मारकों के संरक्षण और परिरक्षण के लिए राज्यवार आवंटित और व्‍यय की गई धनराशि का विवरण अनुलग्नक-I में दिया गया है।

एएसआई केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित स्मारकों का संरक्षण एवं परिरक्षण करता है, जिनमें कम- प्रसिद्ध स्मारक भी शामिल हैं। जहां भी संभव हो, मार्ग साइनबोर्ड, पेयजल, शौचालय, बेंच, सांस्कृतिक सूचना बोर्ड और स्थल संग्रहालय जैसी आगंतुक सुविधाएं विकसित की जाती हैं। एएसआई विश्व धरोहर दिवस, विश्व धरोहर सप्ताह, संग्रहालय दिवस और ऐसे अन्य अवसरों/कार्यक्रमों के अवसर पर डिजिटल पहलों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रदर्शनियों, आउटरीच कार्यक्रमों और सूचनाओं के प्रसार के माध्यम से विरासत जागरूकता को बढ़ावा देता है। एएसआई छात्रों और विद्वानों को हमारी विशाल सांस्कृतिक विरासत का गहन ज्ञान प्रदान करने के लिए सेमिनार और कार्यशालाएं भी आयोजित करता है।

इसके अलावा, पर्यटन मंत्रालय सांस्कृतिक और विरासत पर्यटन तथा कम प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों सहित समग्र रूप से देश के पर्यटन स्थलों और उत्पादों को बढ़ावा देता है। यह प्रचार-प्रसार विभिन्‍न पहलों के माध्यम से किया जाता है, जैसे पर्यटन हितधारकों के सहयोग से पर्यटन प्रोत्‍साहन कार्यक्रमों का आयोजन, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के सहयोग से सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से डिजिटल प्रचार और ‘इनक्रेडिबल इंडिया’ डिजिटल पोर्टल के माध्यम से पर्यटन स्थलों और उत्पादों का प्रदर्शित करना। इसके अतिरिक्‍त ‘देखो अपना देश’ पहल के तहत इन पर्यटन स्थलों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और प्रचार करने के लिए भारत पर्यटन कार्यालयों द्वारा क्षेत्रीय स्तर पर कई हितधारक सहभागिता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।  

देश में एएसआई के संरक्षण एवं अनुरक्षणाधीन कुल 3688 स्मारक/स्थल हैं, जिनमें कम-प्रसिद्ध स्मारक भी शामिल हैं। एएसआई का तकनीकी स्‍टॉफ इन स्‍थलों का नियमित निरीक्षण करता है तथा स्मारकों की स्थिति, प्राथमिकता एवं आवश्यकता के आधार पर तथा उपलब्‍ध संसाधनों के अधीन संरक्षण, अनुरक्षण एवं विकास कार्यों की योजना बनाकर उन्हें क्रियान्वित करता है। पिछले पांच वर्षों में आवंटित और उपयोग की गई धनराशि का विवरण अनुलग्नक-I में दिया गया है।

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने यह जानकारी आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

Comments

Comments (0)

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »