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सहकारी समितियों की वित्तीय स्थिति

राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (NCD) के अनुसार, दिनांक 15.07.2026 तक मुंबई में आवास, उपभोक्ता, ऋण तथा श्रमिक सहकारी समितियों सहित कुल 41,501 सहकारी समितियाँ हैं। इनमें से 40,853 सहकारी समितियाँ क्रियाशील हैं। इन क्रियाशील सहकारी समितियों में 19,911 लाभ अर्जित करने वाली तथा 14,877 हानि में चल रही हैं, जबकि 6,065 समितियों की वित्तीय जानकारी उपलब्ध नहीं है।

सरकार ने वर्ष 2022 में महाराष्ट्र की समितियों सहित कार्यरत प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के कंप्यूटरीकरण हेतु केंद्र प्रायोजित परियोजना अनुमोदित की। इस परियोजना का उद्देश्य समस्त कार्यरत पैक्स को एक समान ईआरपी (एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग) आधारित राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर पर लाना है। आरंभ में, पैक्स कंप्यूटरीकरण परियोजना के अंतर्गत ₹2,516 करोड़ के वित्तीय परिव्यय के साथ 63,000 पैक्स अनुमोदित किए गए थे। तत्पश्चात् इस परियोजना का विस्तार करते हुए ₹2,925.39 करोड़ के संशोधित परिव्यय के साथ 79,630 पैक्स को इसके दायरे में लाया गया है।

इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) महाराष्ट्र सहित देश भर की सहकारी संस्थाओं के अवसंरचना विकास, व्यवसाय विविधीकरण, मूल्य श्रृंखला विकास तथा क्षमता निर्माण हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करता है। दिनांक 30.06.2026 तक, एनसीडीसी द्वारा सहकारी संस्थाओं के विकास हेतु संचयी रूप से ₹5,74,090.48 करोड़ संवितरित किए गए हैं, जिनमें विगत पांच वर्षों के दौरान संवितरित ₹3,96,763 करोड़ सम्मिलित हैं।

सहकारिता मंत्रालय ने दिनांक 06.07.2021 को अपनी स्थापना के समय से ही “सहकार से समृद्धि” के विजन को साकार करने तथा मुंबई सहित देश भर में सहकारी क्षेत्र को सुदृढ़ करने हेतु अनेक पहलें की हैं। पहल के प्रमुख क्षेत्र निम्नानुसार हैं:

(i)      पैक्स का कंप्यूटरीकरण: सरकार ने डिजिटलीकरण, पारदर्शिता तथा कुशल सेवा प्रदायगी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, आईटी अवसंरचना के प्रावधान एवं कार्यान्वयन दिशानिर्देशों (मार्गदर्शिका) सहित, ₹2,925.39 करोड़ के वित्तीय परिव्यय के साथ 79,630 पैक्स के कंप्यूटरीकरण हेतु केंद्र प्रायोजित परियोजना अनुमोदित की है।

(ii)     पैक्स हेतु आदर्श उपविधियां: इनके माध्यम से पैक्स को 25 से अधिक व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने तथा अपने प्रचालनों में शासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही में सुधार लाने में सक्षम बनाया गया है। अब पैक्स प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र (पीएमकेएसके), प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र (पीएमबीजेके), सामान्य सेवा केंद्र (सीएससी) आदि के रूप में कार्य कर सकती हैं।

(iii)    क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण: शासन, वित्तीय प्रबंधन तथा प्रचालनात्मक क्षमता को सुदृढ़ करने हेतु पैक्स के पदाधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं।

(iv)    त्रिस्तरीय सहकारी ऋण संरचना का सुदृढ़ीकरण: तरलता प्रबंधन एवं ऋण प्रवाह में सुधार लाने हेतु पैक्स, जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) तथा राज्य सहकारी बैंकों (एसटीसीबी) के मध्य समन्वय को सुदृढ़ करने के उपाय किए गए हैं।

(v)     विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अन्न भंडारण योजना: सरकार जमीनी स्तर पर भंडारण क्षमता बढ़ाने हेतु सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अन्न भंडारण योजना कार्यान्वित कर रही है।

(vi)    राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (एनसीडी): एनसीडी का विकास सहकारी कवरेज में अंतरालों की पहचान करने, नई सहकारी समितियों के गठन को सुकर बनाने, साक्ष्य आधारित नीति निर्माण में सहायता प्रदान करने तथा सहकारी रैंकिंग फ्रेमवर्क के माध्यम से सहकारी समितियों के निष्पादन का आकलन करने में सक्षम बनाने हेतु किया गया है।

(vii)   त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय: सरकार ने सहकारी शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं क्षमता निर्माण को सुदृढ़ करने हेतु त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना की है।

यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तरमें दी।

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