राज्य में उत्पादित वस्तुओं के निर्यात में वृद्धि के लिए निर्यातकों को गेटवे पोर्ट तक माल भेजने के लिए सरकार की तरफ से दी जाने वाली मालभाड़ा प्रतिपूर्ति (सब्सिडी) बढ़ाने की प्रक्रिया चल रही है। इस प्रक्रिया के बाद निर्यातकों को मिलने वाली मालभाड़ा सब्सिडी की धनराशि करीब दोगुनी हो जाएगी। सरकार के इस कदम से निर्यातक विश्व बाजार में कीमतों के स्तर पर चीन के उत्पादों से बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।

हाल ही में लाई गई नई निर्यात नीति 2020-25 के प्राविधानों के अनुरूप सब्सिडी योजना में इसके लिए जरूरी बदलाव किए जाएंगे। शासन स्तर पर इस दिशा में कार्यवाही चल रही है। गौरतलब है कि सब्सिडी योजना के तहत निर्यातकों को 20 फीट कंटेनर पर 5000 रुपये, 40 फीट कंटेनर पर 12000 रुपये और कैपिंग पर एक लाख 20 हजार रुपये सब्सिडी दिए जाने की व्यवस्था है। इस बदलाव के बाद 20 फीट कंटेनर पर करीब 12000 रुपये 40 फीट कंटेनर पर करीब 20000 रुपये तथा कैपिंग पर दो लाख 50 हजार रुपये सब्सिडी दिए जाने पर विचार किया जा रहा है।
 
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के अपर मुख्य सचिव डा. नवनीत सहगल ने कहा है कि अब तक सिर्फ ट्रेन से माल भेजने पर ही सब्सिडी दी जाती थी। नई व्यवस्था में निर्यात उत्पाद ट्रक से गेटवे पोर्ट तक भेजे जाने पर भी मालभाड़े पर सब्सिडी दी जाएगी। सब्सिडी की नई दरें तय करने की कार्यवाही चल रही है। उन्होंने बताया है कि कोरोना काल में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से राज्य से निर्यात का ग्राफ सामान्य रहा। 

कोरोना के इस दौर में भी निर्यात का ग्राफ बेहतर रहा

चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 के नवंबर माह तक पिछले साल के मुकाबले करीब 95 फीसदी निर्यात लक्ष्य को हासिल किया गया। कोरोना से जब समूचे विश्व में उथल पुथल रही उस दौर में निर्यात में महज पांच फीसदी की कमी रही। 2019-20 में राज्य के निर्यातकों ने एक लाख 20 हजार 356 करोड़ रुपये के उत्पाद निर्यात किए थे। प्रदेश सरकार ने अगले तीन सालों में राज्य से तीन लाख करोड़ का निर्यात लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने में नई निर्यात नीति की अहम भूमिका होगी। 

हर जिले को बनाया जा रहा है निर्यात हब
राज्य में करीब 10 हजार निर्यातक हैं। निर्यातकों की संख्या और बढ़ाने की दिशा में भी सरकार काम कर रही है। प्रदेश ने मेक इन यूपी ब्रांड विकसित करने की दिशा में काम शुरू किया है। हर जिले को निर्यात हब के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है। जिलों में डीएम की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जा रही है।

तीन सालों में ही करीब 32 हजार करोड़ का निर्यात बढ़ा
प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही निर्यात में लगातार वृद्धि हो रही है। 2017-18 में राज्य से 88967.42 करोड़, 2018-19 में 114042.72 करोड़ तथा 2019-20 में राज्य से 120356.26 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ। जबकि इससे पूर्व 2016-17 में राज्य से कुल निर्यात का ग्राफ 83999.92 करोड़ रुपये था। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि कोरोना के कारण उत्पन्न बाधाओं के बावजूद चालू वित्तीय वर्ष में पिछले वर्ष के कुल निर्यात के बराबर निर्यात हो जाने की उम्मीद है।

2 COMMENTS

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