गुजरात के आणंद जिले के खंभात कस्बे में रामनवमी के दिन हुई साम्प्रदायिक हिंसा के बाद शकरपुरा इलाके से अवैध कब्जा हटाने के लिए प्रशासन ने वहां बुलडोजर चलवाया। गौरतलब है कि 10 अप्रैल को रामनवमी के जुलूस पर शकरपुरा इलाके में हमला हुआ था। गुजरात के अलावा बीजेपी शासित मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भी साम्प्रदायिक हिंसा के बाद ऐसी कार्रवाई हुई है।
आणंद के कलेक्टर एम. वाई. दक्षिणी ने बताया कि अवैध कब्जे, लकड़ी और कंक्रीट के अवैध निर्माण सहित सड़कों के किनारे खड़ी झाड़ियों पर भी बुलडोजर चलवाया जा रहा है क्योंकि रामनवमी को जुलूस पर पथराव करने के बाद बदमाश इन्हीं झाड़ियों में छुप रहे थे। दक्षिणी ने कहा, ‘‘बदमाशों ने झाड़ियों की आड़ में छुपकर जुलूस पर हमला किया। इसलिए हमने शकरपुरा में सड़क किनारे ऊगी झाड़ियों और सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को हटाने का फैसला लिया है।
पूरे इलाका साफ होने तक यह अभियान जारी रहेगा।’’ उन्होंने बताया कि पहले दिन बुलडोजर और ट्रैक्टर की मदद से छह-सात अवैध निर्माण गिराए गए जिनमें से कुछ आरोपियों के थे। कांग्रेस विधायकों गयासुद्दीन शेख और इमरान खेडावाला ने इस अभियान को असंवैधानिक और मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया। दोनों विधायकों ने राजस्व मंत्री राजेन्द्र त्रिवेदी से फोन पर बात की और इस अभियान को तत्काल रोकने का अनुरोध किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कलेक्टर ने तय प्रक्रिया का पालन किए बगैर ही यह अभियान शुरू किया है। विपक्षी दल के विधायकों ने संयुक्त रूप से बयान जारी करके कहा कि इन संपत्तियों के मालिकों को पहले नोटिस भेजा जाना चाहिए था फिर निर्माण की वैधता के संबंध में अपने दस्तावेज और साक्ष्य पेश करने का मौका दिया जाना चाहिए था।
गौरतलब है कि शकरपुरा में 10 अप्रैल, रामनवमी के जुलूस पर पथराव के बाद खंभात में दो सम्प्रदायों के बीच झड़प हो गई थी। आणंद के पुलिस अधीक्षक अजित राजिआन ने इससे पहले कहा था कि खंभात कस्बे में हुई हिंसा कस्बे में मुसलमानों का प्रभाव स्थापित करने के लिए ‘स्लीपर मॉड्यूल’ द्वारा की गई साजिश का हिस्सा है। पुलिस ने इस संबंध में अभी तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया है।