किसी भी व्यवस्था में पलीता उसके जिमेदारों ने हमेशा लगाया है, यह अलग बात है कि इल्जाम दूसरों पर थोपा गया। कोरोना के खतरे को देखते हुए जहां आने जाने पर रोक है तो महाराष्ट्र में एक आईपीएस( ips) अधिकारी ने पद का दुरुपयोग कर एक उद्योगपति को, जो हालिया चर्चित यस बैंक घोटाले में आरोपी है, मुंबई से महाबलेश्वर तक की यात्रा का फरमान जारी कर दिया। मामला खुलने के बाद अधिकारी को छुट्टी पर भेज दिया गया।

महाराष्ट्र सरकार के गृह विभाग के प्रधान सचिव (विशेष) के तौर पर पदस्थ आईपीएस ( ips) अधिकारी अमिताभ गुप्ता ने डीएचएफएल (dhfl ) के प्रमोटर ( promoter )कपिल वधावन और धीरज वधेवन के परिवार के लिए इमरजेंसी पास जारी किया। इसी पास के आधार पर वधावन फैमिली के 23 लोग बुधवार को 5 गाड़ियों में सवार होकर मुंबई से 250 किमी दूर महाबलेश्वर स्थित अपने फार्महाउस पहुंच गए। उनके साथ गार्ड और रसोइए भी गए थे। लापरवाही के मामले में आईपीएस गुप्ता को अनिवार्य छुट्टी पर भेज दिया गया है।

गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि वधावन परिवार के 23 सदस्य महाबलेश्वर कैसे पहुंचे इसकी जांच होगी। देखमुख ने ट्वीट किया, ‘मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से चर्चा के बाद प्रधान सचिव गुप्ता को उनके खिलाफ जांच जारी रहने तक अवकाश पर भेजा गया है। कानून सभी के लिए समान है।’

अमिताभ गुप्ता ने आधिकारिक पत्र में लिखा था, ‘निम्नलिखित (व्यक्ति) को मैं अच्छी तरह से जानता हूं क्योंकि वे मेरे पारिवारिक मित्र हैं और परिवार में इमरजेंसी के कारण वह खंडाला से महाबलेश्वर तक की यात्रा कर रहे हैं।’ इस पत्र में 5 वाहनों का विवरण दिया गया था। हालांकि उनके इस कदम से मुख्यमंत्री ठाकरे नाराज हो गए, क्योंकि सरकार सभी लोगों को घर में रहने की सलाह दे रही है।

स्मरणीय है कि कपिल और धीरज वधावन के खिलाफ सीबीआई ने लुकआउट नोटिस जारी किया था। दोनों यस बैंक और डीएचएफएल धोखाधड़ी के मामले में आरोपी हैं। फिलहाल क्वारैंटाइन हैं और इसके खत्म होने के बाद सीबीआई उन्हें हिरासत में ले सकती है।

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