होली के मौके पर इंजीनियरिंग छात्रों ने बनाई कोरोना पिचकारी

वाराणसी। धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में हर वर्ष की भांति इस बार भी होली का रंग चढ़ता नजर आ रहा है। कोरोना वायरस से बचाव के लिए वाराणसी शहर में इंजीनियरिंग के दो स्टूडेंट्स ने खास कोरोना पिचकारी बनाई है। इंजीनियरिंग कर रहे दोनों नौजवानों के नाम विशाल पटेल और देवेंद्र पांडेय है। फागुन के जोश के बीच कोरोना की चिंता ने इन दोनों नौजवानों को इस खास कोरोना पिचकारी बनाने के लिए प्रेरित किया।

दरअसल इस पिचकारी की खासियत ये है कि इससे आप होली में अपनों को रंगों से सराबोर भी कर पाएंगे। यही नहीं, यदि आपने या सामने वाले ने दो गज की दूरी के नियम को तोड़ा तो पिचकारी अलार्म में तब्दील हो जाएगी और तुरंत आपको सिग्नल देगी। निजी इंस्टिट्यूट के छात्र विशाल पटेल और देवेंद्र पांडेय ने इस पिचकारी को बनाया है। विशाल पटेल ने बताया कि होली बनाने के पीछे मकसद सिर्फ इतना है कि कहीं कोरोना के कारण होली का मिजाज फीका न हो जाए। क्योंकि बनारसवालों के लिए होली उनके स्वभाव का त्योहार है।

इस पिचकारी को घर की छत या फिर दरवाजे पर रख सकते हैं। किसी के भी सामने आने पर इसके सेंसर एक्टिव हो जाएंगे और रंगों की बौछार करने लगेंगे। खास बात ये है कि जब तक पिचकारी के सामने कोई नहीं आएगा, तब तक यह बंद रहेगी। इस पिचकारी को बनाने में 15 दिन लगे हैं। इसमें एक बार में 8 लीटर रंग भरा जा सकता है। इसमें 12 वोल्ट की एक बैट्री, इंफ्रारेड सेंसर, अल्ट्रा सोनिक सेंसर, स्विच, एलइडी लाइट का प्रयोग किया गया है।

750 रुपये की लागत में तैयारी हुई अनोखी पिचकारी

इसको बनाने में करीब 750 रुपये की लागत आई है। खास बात ये है कि होली में आप इसे पिचकारी के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं और उसके बाद कोरोना से एहतियात के तौर पर सेनीटाइज करने में काम आ सकता है। रंग की जगह इसे 8 लीटर सेनिटाइजर भरकर गेट पर लगा सकते हैं। कोई भी इसके सामने जैसे ही आएगा, ये उसे सेनिटाइज कर देगी।

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