विशेष संवाददाता

भले ही राजनीतिक दल के 101 टुकडातोड पूर्व नौकरशाह कोरोना वायरस कहर के चलते लगे लाकडाउन के दौरान मुसलमानों को प्रताड़ित किये जाने का आरोप लगा कर देश की छवि को धक्का लगाने का काम कर रहे हों। लेकिन जानबूझ कर अंधे बने इन नौकरशाहों को यह नहीं नजर आ रहा कि यदि आज भारत मे वायरस का किसी ने प्रसार किया तो वो निजामुद्दीन का 6 मंजिला मरकज ही है। यह वो जगह है जहां से तबलीगी जमात का सरगना मौलाना साद दुनियाभर के मुसलमानों का अपनी सोच और अल्फाजों से ब्रेनवाश करने की कोशिश करता है. 

मौलाना मोहम्मद साद (Maulana Saad), दुनिया भर में इस्लाम के प्रचार और प्रसार में लगा रहता है। लेकिन इस बार निजामुद्दीन मरकज (Nizamuddin Markaz) से धर्म का प्रचार नहीं बल्कि देशभर में कोरोना (Coronavirus) का प्रसार हो गया। दिल्ली का निजामुद्दीन मरकज ‘महामारी का हैडक्वार्टर’ बन गया। आरोप है कि दुनिया भर से हजारों की संख्या में निजामुद्दीन मरकज में आए जामतियों ने यहां से निकल कर देशभर में कोरोना को बांटने का काम किया।. 

निजामुद्दीन के इसी मरकज पर मौलाना साद हुकूमत करता है। यहीं से वह सरकार के खिलाफ लोगों के मन में जहर घोलता है। इतना ही नहीं करीब 1100 गज में फैले इस मरकज से ही मौलाना साद का यू ट्यूब चैनल “दिल्ली मरकज” भी चलाया जाता है।  

मरकज के बेसमेंट से मौलाना का यूट्यूब चैनल दिल्ली मरकज चलाया जाता है। इस चैनल को 1 जनवरी 2016 को शुरू किया गया था। दिल्ली मरकज यू ट्यूब चैनल की टीम में मौलाना साद के वो 4 करीबी लोग हैं जिनमे से एक की जिम्मेदारी साद की सोच का ऑडियो रिकॉर्ड करना है।उसके लिए ऑडियो रेकॉर्डर का इस्तेमाल होता ह। दूसरे शख्स का जिम्मा उसको म्यूजिक लगाकर एडिट करना, तीसरे का काम उसको यू ट्यूब चैनल दिल्ली मरकज और सोशल मीडिया पर अपलोड करना, और चौथे शख्स का काम होता है मरकज से जुड़े तमाम मेंबर्स को निजी तौर पर नए ऑडियो के अपलोड की जानकारी देना। दिल्ली मरकज चैनल के दो लाख 21 हजार सदस्य हैं।

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