विशेष संवाददाता

उज्जैन। वाराणसी से उज्जैन की 956 किलोमीटर की यात्रा काशी- महाकाल एक्सप्रेस ने 19 घण्टे में तय की। स्टेशन पर काफी यात्री उतरे जो महाकाल के दर्शन के लिए काशी से आये थे । कीर्तन के बीच हर-हर महादेव के जयघोष के साथ सभी का स्वागत किया गया ।

यहां आइआरसिटी भोपाल इकाई के सीनियर सुपरवाइजर सूर्यवीर सिंह ने यात्रियों का स्वागत करते हुहे वाहन में बैठा कर स्टेशन से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक होटल में ठहराया । नाश्ते में सबको पोहा, डोसा, सैंडविच, जलेबी परोसा गया । चूंकि कइयों का व्रत था इसलिए साबूदाने की खिचड़ी खाने को मिल गई। इसके बाद बताया गया की हम सड़क मार्ग से इंदौर होते हुए खण्डवा जाएंगे क्योकी आज महाकालेश्वर में वीआईपी दर्शन बंद है इसलिए ओंकारेश्वर ममलेशर का दर्शन करेंगे। सभी तैयार थे और चल पड़े उज्जैन से इंदौर और खंडवा चल दिया।इंदौर की सड़कें साफ थी शहर में चारो तरफ हरियाली दिख रही थी हमे लगा कि स्वछता सर्वेक्षण में इंदौर को यूँ ही नही पहला पायदान मिला है।हम खण्डवा रॉड पर थे, चारो तरफ पहाड़ थे । सोयाबीन की खेती हर ओर दिख रही थी। इस रास्ते पर एक और प्रोजेक्ट पर निगाह गई जो थी नर्मदा शिप्रा सिंहस्थ लिंक परियोजना मोती पाइप लाइन थी।

पूछने पर बताया गया कि शिवराज सिंह चौहान के शासन मे नर्मदा जी के जल को शिप्रा तक जोड़ने का काम किया गया इसी पानी से इंदौर में भी ये पानी सप्लाई होता है। उज्जैन से ओंकारेश्वर की 140 किलोमीटर की दूरी टैम्पो ट्रेवलर से तीन घण्टे में पूरी हुई ।ओंकारेश्वर मंदिर में पहुंचने पर तो भीड़ वहुत मिली। मीडिया से होने के चलते सुगम दर्शन हुआ। बगल में ही ममलेश्वर का भी दर्शन हुआ। शाम को उज्जैन जाकर आराम के बाद शनिवार को महाकाल का दर्शन करने की योजना है।

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