तालिबान ने अपनी सरकार में शामिल आतंकी कैबिनेट मंत्रियों को ‘टार्गेट’ पर रखने वाले बयान के लिए अमेरिका को धमकाया है। अमेरिका ने आतंकियों की काली सूची में शामिल तालिबानी कैबिनेट मंत्रियों, खासतौर से हक्कानी परिवार के लोगों के लिए कहा था कि इन्हें वह अपने टार्गेट पर बनाए रखेगा।

तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा ‘इस्लामिक अमीरात अफगानिस्तान की कैबिनेट खासतौर से दिवंगत हक्कानी के परिजनों को लेकर पेंटागन के अधिकारियों सहित कई देशों ने भड़काने वाले बयान दिए हैं। यह अफगानिस्तान के आंतरिक मामलों में दखल है। इसकी हम कड़े शब्दों में निंदा करते हैं।

अमेरिकी अधिकारी पहले भी इस प्रकार के काम कर चुके हैं, जिनके परिणाम में अमेरिका का नुकसान हुआ है। हमसे कूटनीतिक संवाद कर उसे अपनी इन नीतियों को तत्काल सुधारना होगा।’

मुजाहिद ने यह भी कहा कि हक्कानी तालिबानियों से अलग नहीं हैं। दोहा समझौते के लिए हुई वार्ता में यह सभी शामिल थे, अमेरिका से बात भी कर रहे थे। उन्हें अमेरिका और यूएन की आतंकी सूची से उसी वक्त हटाना चाहिए था। तालिबान आज भी यह मांग करता है।

अमेरिका को खींच कर मारा थप्पड़

तालिबानी आतंकियों ने अफगानिस्तान में 33 कैबिनेट मंत्रियों वाली अंतरिम सरकार की घोषणा की थी। इनमें प्रधानमंत्री मुल्ला हसन अखुंद सहित 14 से अधिक मंत्री संयुक्त राष्ट्र व अमेरिका द्वारा घोषित आतंकी सूची में हैं। करोड़ों के इनामी आतंकी सिराजुद्दीन हक्कानी को गृहमंत्री बनाना विशेषज्ञों द्वारा अमेरिका को खींच कर मारे थप्पड़ की तरह देखा जा रहा है।

कई बार किया टार्गेट पर हमला, लेकिन बच निकले

आतंकी मंत्रियों में सिराजुद्दीन को अमेरिका ने कई बार मारने के लिए टार्गेट बनाकर हमले किए, लेकिन वह अब तक बचता आया है। अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ सेठ जी जोन्स के अनुसार वह अमेरिकी सैन्य समुदाय में पहचाना हुआ खतरनाक दुश्मन है, उसके हाथ अमेरिकी खून से रंगे हैं।

सीआईए ने की पाकिस्तान से चर्चा

अमेरिका की केंद्रीय जांच एजेंसी (सीआईए) के निदेशक विलियम बर्न्स ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल कमर बाजवा व आईएसआई मुखिया लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद से बातचीत की। यहां क्षेत्रीय मुद्दे, खासतौर पर अफगानिस्तान केंद्र में रहे। पाकिस्तान ने शांति व स्थायित्व लाने में पूरे सहयोग का वादा किया। बर्न्स ने इससे पहले भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी बात की थी।

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