भ्रष्टाचार के मामले में फंसे दागी कर्मियों का अब बच पाना आसान नहीं होगा। कार्मिक विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों से उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है। इसमें कहा गया है कि स्टेट आफ यूपी व अन्य बनाम वियनानंद तिवारी मामले में हाईकोर्ट ने आदेश पारित किया है। इसके आधार पर इस नियमावली का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य होगा।

कार्मिक विभाग के आदेश में कहा गया है कि जहां आरोपित सरकारी सेवक आरोपों को इनकार करता है, वहां जांच अधिकारी आरोप पत्र में प्रस्तावित साक्षी को बुलाने की कार्यवाही करेगा। आरोपित सरकारी कर्मी की उपस्थिति में साक्षियों को साक्ष्य देने का अवसर दिया जाएगा और उसके मौखिक साक्ष्य को लिखित रूप से दर्ज किया जाएगा। आरोपित कर्मचारी का पक्ष भी लिखित रूप से लिया जाएगा।

कार्मिक विभाग के आदेश में यह भी कहा गया है कि प्रतिबंध यह होगा कि जांच अधिकारी ऐसे कारणों से जो लिखित रूप से लिया जाएगा और चाहेगा तो साक्षी को बुलाने से इनकार भी कर सकता है। आदेश में कहा गया है कि हर विभाग जांच के मामलों में उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली के सभी प्रावधानों के साथ-साथ नियमों का कड़ाई से पालन करेगा।

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