नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में पेंगोंग लेक इलाके से दोनों देशों की सेनाएं तय समझौते के तहत लगातार पीछे हट रही हैं। मंगलवार को चीनी सेना ने कैलाश रेंज और फिंगर-5 इलाके से वापसी की है। जबकि भारतीय सैनिक पेंगोंग लेक के दक्षिणी हिस्से की कई ऊंची चोटियों से हट रहे हैं। यहां अगस्त में सैनिकों ने पोजीशन संभाली थी, जिसके बाद ही चीनी सेना के लिए मुश्किल पैदा हुई थी। 

भारतीय सेना की तरफ से जारी तस्वीरों में स्पष्ट नजर आ रहा है कि चीनी सैनिकों का काफिला तेजी से कैलाश रेंज से आगे बढ़ रहा है। उसमें बड़ी संख्या में टैंक आदि भी हैं। कुछ चित्रों में चीनी सैनिक पहाड़ियों पर बने अपने ढांचों को तोड़ते हुए नजर आ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि अब तक 200 से अधिक टैंक चीनी सेना के रवाना हो चुके हैं। तय समझौते के अनुरूप भारतीय सैनिक एवं टैंक भी पीछे हट रहे हैं। 

दोनों देश एक-दूसरे की पीछे हटने की प्रक्रिया की निगरानी भी कर रहे 
सूत्रों के अनुसार, पेंगोंग लेक इलाके से सेना की वापसी को लेकर जो समझौता हुआ था, उसमें पूरी प्रक्रिया की निगरानी भी शामिल है। दोनों देश एक-दूसरे की पीछे हटने की प्रक्रिया की निगरानी भी कर रहे हैं। इसके लिए ड्रोन एवं उपग्रह का इस्तेमाल किया जा रहा है। भारतीय सेना की तरफ से इस बात की पुष्टि की गई है कि अभी तक दोनों तरफ से पीछे हटने को लेकर हुए समझौते का सही तरीके से क्रियान्वयन किया जा रहा है। 

उत्तरी इलाके से सेनाएं करीब-करीब हट चुकीं 
सेना के सूत्रों के अनुसार पेंगोंग लेक के उत्तरी इलाके से सेनाएं करीब-करीब हट चुकी हैं, जबकि मंगलवार को दक्षिणी हिस्से से भी बड़ी संख्या में सैनिकों, टैंकों आदि की वापसी हुई है। सेना के सूत्रों ने कहा कि सप्ताह के अंत तक पेंगोंग लेक इलाके के उत्तरी एवं दक्षिणी हिस्से के पूरी तरह से सैनिकों एवं टैंकों से खाली होने की उम्मीद है। उम्मीद के विपरीत तेज गति से यह कार्य हो रहा है। पहले इसमें एक सप्ताह लगने की संभावना व्यक्त की गई थी। 

…तो अगले सप्ताह वरिष्ठ कमांडरों की बैठक 
बता दें कि दोनों देशों की सेनाओं में हुए समझौते के तहत चीन की सेनाएं फिंगर-8 और भारतीय सेनाएं फिंगर-3 तक पीछे हटेंगी। बीच के क्षेत्र में फिलहाल गश्त स्थगित रहेगी। पहले यहां पर दोनों देशों की सेनाएं गश्त करती थीं। इस सप्ताह यदि पेंगोंग इलाका खाली हो जाता है तो फिर टकराव के अन्य स्थानों को लेकर अगले सप्ताह वरिष्ठ कमांडरों की बैठक होगी। समझौते में 48 घंटों के भीतर वरिष्ठ कमांडरों की बैठक करने की बात कही गई है। 

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