वाराणसी। संक्रामक रोगों से मुक्ति की कामना के साथ मनाई जाने वाली शीतला अष्टमी मंगलवार को मनाई गई। इस बार शीतला माता से चेचक से ज्यादा बच्चों को कोरोना से बचाने की प्रार्थना की गई। अलसुबह महिलाओं ने पारंपरिक वस्त्र पहन कर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए दशाश्वमेध घाट स्थित मां शीतला की पूजा की।

गौरतलब है कि, आज शीतला अष्टमी है। हिंदू पंचांग के अनुसार, शीतला अष्टमी का त्योहार हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन माता शीतला देवी की पूजा- अर्चना की जाती है। मां शीतला को बासी भोजन का भोग लगता है और इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। आज के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता है। जो भी लोग इस व्रत को करते हैं वो एक दिन पहले रात में ही खाना बनाकर रख लेते हैं।

मान्यता है कि इस व्रत को करने से रोगों से मुक्ति मिलती है। पौराणिक मन्यताओं के अनुसार, मां शीतला का व्रत करने से चेचक जैसे संक्रमक रोग से छुटकारा मिलता है। मां शीतला की विधि विधान से पूजा और व्रत करने से भक्तों को तमाम कष्टों से मुक्ति मिलती है।

शीतला अष्टमी स्त्रोत

वंदेऽहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगंबराम् ।
मार्जनीकलशोपेतां शूर्पालंकृतमस्तकाम् ॥

मां शीतला का स्वरूप

शाीतला माता गधे की सवारी करती हैं। उनके एक हाथ में कलश होता है और दूसरे हाथ में कुश से बना झाड़ू होता है। मान्यता है कि इस कलश में शीतल जल होता है। इसी जल से शीतला मां अपने भक्तों के कष्ट दूर करती हैं।

शीतला अष्टमी की पूजा

शीतला माता की पूजा के दौराना साफ- सफाई का विशेष ध्यान रखें। इस दिन सुहब- सुबह उठकर स्नान कर तैयार होकर व्रत करने का संकल्प लें। इसके बाद घर के मंदिर में शीतला माती की विधी- विधान से पूजा करें। शीतला माता को भोग में बासी भोजन का भोग लगाएं और बाद में इस प्रसाद को सभी लोगों में बांटे। व्रत के दौरान आप फलाहार कर सकती हैं। पारण के समय बासी भोजन को प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।

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