सी के मिश्रा

अयोध्या जिले के गोसाईगंज क्षेत्र के  मिश्रित के पूरा का गांव आज भी अपने आप में चर्चा का विषय बना हुआ है। देश के अन्य गांवों से थोड़ी अलग दास्तां इसे चर्चित करती है।

आजादी के बाद से यह गांव सरकारी सुविधाओं से प्रायः वंचित ही है। ग्राम प्रधान व सरकार की तरफ से बहुत ही कम सुविधा दी गई है। गांव के जुझारू निवासी मिलकर कभी रोड बना लेते हैं तो कभी 26 जनवरी और  15 अगस्त जैसे राष्ट्रीय त्यौहार को भरपूर आनंद और उल्लास के साथ मनाते हैं। 71वें गणतंत्र दिवस को ही लिया जाय तो इस गांव की दो महिलाएं जो की  देवरानी और जेठानी हैं, पड़ोस के   बुजुर्ग   बाबा के साथ मिलकर झंडारोहण किया। वैसे इस गांव की यह परम्परा भी है की गांव का कोई बुजुर्ग या कोई महिला ही झंडारोहण करती हैं। गांव की एकता समरसता को बनाए रखने के लिए यह आयोजन किया जाता है। गांव से बाहर रहने वाले गांव  के लोग आयोजन में भरपूर सहायता और उत्साहवर्धन करते हैं। गांव के बड़े बूढ़े बहुत ही उत्साह से इस त्यौहार को मनाते हैं। यह गांव हमेशा ही सरकार की सुविधाओं के लाभ से वंचित रहा है। गांव की सड़क अभी तक नहीं बनी है गांव वाले सब मिलकर गांव की काम चलाऊसड़क बनाते हैं।

सरकार ने कुछ काम करवा कर छोड़ दिया जाता है और बाद में ग्रामीण ही आपसी सहयोग से जितना हो सकता है मिलकर  कार्य पूरा करते हैं। कई बार प्रधान और एमएलए और मुख्य मंत्री पोर्टल पर शिकयत भी कुछ जागरूक लोगों ने की लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पांत चित्र में जो वृद्ध साथ में बैठे हैं अपनी जवानी से ही सड़क को समय समय पर सबको लेकर बनाते आ रहे हैं। कभी कुदाल लेकर रोड सही करते तो कभी घर से पत्थर ले जाकर नाली बनाते  आये हैं। कहते हैं कि इनको अच्छी सड़क पसंद है लेकिन गांव के बाहर की सड़क तो प्रधान मंत्री सड़क योजना में बन गई, गांव के अंदर की सड़क अभी भी नहीं बनी। चाहे जो भी हो, सरकारी अमले की नजरअंदाजी के बावजूद गांव के लोगों का उत्साह कभी कम नहीं होता हमेशा खुश रहते हैं और परम्परागत पर्व-त्यौहार के साथ ही राष्ट्रीय त्यौहार भी पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं। इसका कारण सिर्फ और सिर्फ अपने देश और यहां की माटी से प्रेम ही है। यहां के वासियों के जज्बे को सलाम।
 

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