जयपुर विस्फोट पर दोषी करार मुजरिमों और बाटला मुठभेड के तार जुडे हैं

दृग विन्दु मणि सिंह
प्रबंधन गुरू

राजस्थान की राजधानी जयपुर में 11 साल पहले हुए 8 बम धमाकों के मामले में कल विशेष अदालत ने 5 आरोपितों में से 4 को दोषी करार दिया। एक आरोपित को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। यह सभी चारों दोषी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद के निवासी हैं। जयपुर धमाकों के 10 आरोपी थे जिनमें से दो दिल्ली के बाटला हाउस एनकाउंटर में मारे गए थे और 3 अब भी फरार है। बाटला हाउस एनकाउंटर में मारे गए दोनों आरोपित भी आजमगढ़ के ही निवासी थे।

बाटला हाउस एनकाउंटर को लेकर कांग्रेस समेत कई दलों के नेताओं ने इस पर जमकर नकारात्मक राजनीति की और इतना ही नहीं आरोपितों के गांव के दौरे, जिले में सभाएं कर सांप्रदायिकता फैलाने का भरपूर प्रयास किया। उन नेताओं में सलमान खुर्शीद ने, जो तत्कालीन कानून मंत्री थे, आजमगढ़ में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब उन्होंने सोनिया गांधी को एनकाउंटर की तस्वीरें दिखाइं तो सोनिया की आंखों में आंसू थे और उन्होंने प्रधानमंत्री से संपर्क करने को कहा।

आज सलमान खुर्शीद से पूछना चाहिए कि फैसला आ चुका है, जयपुर बम कांड के आरोपितों को दोषी करार दिया जा चुका है और बाटला हाउस एनकाउंटर में मारे गए दोनों आरोपी भी जयपुर बम कांड में शामिल थे ,ऐसे में अब वह बताएं कि देश का कानून मंत्री यदि ऐसी आतंकी वारदातों पर देश में भ्रम और सांप्रदायिकता का माहौल तैयार करता है तो उसके ऊपर क्या कार्यवाही होनी चाहिए ?

कांग्रेस के तत्कालीन महासचिव दिग्विजय सिंह बाटला हाउस एनकाउंटर में दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते रहे हैं. इस मुद्दे पर नकारात्मक राजनीति की शुरुआत उन्होंने ही की थी । दिग्विजय सिंह ने कहा था, ‘एनकाउंटर में मारे गए बच्चों को गुनहगार या निर्दोष साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं हैं. मेरी मांग है कि इस मामले की जल्द सुनवाई हो.’ एनकाउंटर की तस्वीरों को दिखाकर उन्होंने दावा किया था, ‘एक बच्चे के सिर पर पांच गोलियां लगी थीं. अगर यह एनकाउंटर था तो सिर पर पांच गोलियां कैसे मारी गई’. हालांकि दिग्विजय सिंह के इन दावों को तत्‍कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम ने खारिज करते हुए एनकाउंटर को सही करार दिया था।चिदंबरम के दावों के बाद भी दिग्विजय सिंह अपने बयान पर कायम रहे. उन्होंने दो तीन दिन बाद फिर कहा, ‘घटना के दो-तीन दिन बाद जिस तरह के तथ्य सामने आए उसे लेकर जो धारणा बनी. मैं अपने उस स्टैंड पर आज भी कायम हूं.’ आज दिग्विजय सिंह से यह प्रश्न जरूर होना चाहिए कि उन्होंने सांप्रदायिकता की जो राजनीति की और इस देश को जघन्य आतंकी घटना के बाद भी नफरत की आग में झोंकने का काम किया उसके लिए उनकी कोई जवाबदेही है या नहीं ? क्यों न सांप्रदायिकता और विद्वेष बढ़ाने के लिए उनके ऊपर कार्यवाही की जाए ?
इसी प्रकार का बयान ममता बनर्जी ने भी दिया था।जामिया नगर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने कहा था, यह एक फर्जी एनकाउंटर था. अगर मैं गलत साबित हुई तो राजनीति छोड़ दूंगी. मैं इस एनकाउंटर पर न्यायिक जांच की मांग करती हूं. अब जबकि जयपुर बामकांड और बाटला हाउस एनकाउंटर के तार पर से पर्दा हट चुका है ममता बनर्जी को अब राजनीति छोड़ ही देनी चाहिए ।वह आज भी उसी प्रकार की सांप्रदायिकता फैला रही हैं जैसा कि वह जयपुर कांड के बाद हुए बाटला एनकाउंटर केस के संदर्भ में कर रहीं थी।
सपा के तत्कालीन महासचिव और वर्तमान में भाजपा के खेमे में खड़े दिखाई देने वाले तथाकथित क्षत्रिय हृदय सम्राट ठाकुर अमर सिंह जिन्होंने अपनी पैतृक भूमि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को सामाजिक कार्य हेतु दान कर दी है , ने तब बटला हाउस एनकाउंटर पर जामिया नगर में एक जनसभा में कहा था ‘आडवाणीजी मेरी निंदा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि मैंने आपकी (ममता बनर्जी की) मांग का समर्थन किया है और मुझे माफी मांगने को कह रहे हैं. बीबीसी और सीएनएन जैसी विदेशी मीडिया ने भी इस एनकाउंटर पर सवाल उठाए हैं. मैं आडवाणीजी से मांग करूंगा कि वे न्यायिक जांच की मांग में मदद करें. अमर सिंह से यह प्रश्न अवश्य होना चाहिए की अब उनका इस विषय पर क्या जवाब है, क्या वह माफी मांगेंगे? रही बात बीबीसी और सीएनएन जैसी विदेशी मीडिया की तो ऐसा कई बार आभास होता है कि वह कुछ खास मुद्दों और अवसरों पर पत्रकारिता के नाम पर अपनी रिपोर्ट इस प्रकार प्रस्तुत करती है जिससे कि वह भारतीयता को सांप्रदायिकता में बदलने का प्रयास कर रही हों। ऐसे देशी विदेशी मीडिया संस्थानों से भी प्रश्न पूछना चाहिए कि ऐसी आतंकी घटनाओं पर संवेदनशीलता बरतने की जिम्मेदारी उनकी है या नहीं, क्योंकि सूचना और अफवाह इन्हीं माध्यमों से समाज में फैलती है या फैलाई जाती है।

अभी कल ही झारखंड चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने मोदी को चुनौती दी कि देश में बढ़ रहे दुष्कर्म पर जवाब दें। निश्चित रूप से दुष्कर्म की घटनाओं पर प्रधानमंत्री तो क्या प्रत्येक व्यक्ति को चिंतित होने और अपने स्तर पर इसे रोकने की आवश्यकता है, लेकिन प्रियंका जी को यह मालूम होना चाहिए कि दुष्कर्म जैसे जघन्यतम अपराध पर मोदी पहले से ही चिंतित है और मोदी सरकार में ही दुष्कर्मियों को फांसी देने का कानून पास हुआ। इतना ही नहीं मोदी बेटियों के लिए बेटी बचाओ हेतु कृत संकल्पित है और उन्होंने बेटियों के संरक्षण हेतु कई योजनाएं लागू कराइं। मोदी से प्रियंका के संवाद में हो सकता है देर हो लेकिन प्रियंका और सोनिया के संवाद में देर नहीं हो सकती क्योंकि यह तो घर का ही मामला है, इसलिए प्रियंका को सोनिया से अवश्य पूछना चाहिए कि जब वह आतंकियों के लिए रोई थी तब उन्हें इस देश का ख्याल नहीं आया ? तब उन्हें इस देश में बढ़ रही आतंकी वारदातों पर रोना नहीं आया ? सांप्रदायिकता का जहर घोलने वाले उनकी पार्टी के नेताओं पर उन्हें लज्जा नहीं आई ?
संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति करने से पूर्व देश के सभी नेताओं और नागरिकों का कर्तव्य है कि वे इस प्रकार की राजनीति करें जिससे यह देश एकजुट हो, समाज में सौहार्द्र कायम हो न की देश में विद्वेष या संप्रदायिकता फैले।

दृग विन्दु मणि सिंह
प्रबंधन गुरू

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