लकड़ी के खिलौना कारीगरों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वर्चुअल संवाद किया। पीएम ने कहा कि ऐसा कोई ही होगा जिसने कठपुतली कला नहीं देखा। आज इम्प्लायमेंट के मूड में कठपुतली का प्रयोग कराते हैं या नहीं। क्या आपने कठपुतली के माध्यम से विज्ञापन दिया है। कठपुतलियों को मास्क लगाने की बात आई है। आपके पास राजनीतिक पार्टियां भी आएंगी कि आपलोग उनका प्रचार करें। आप नयापन लाएं, आप पहले पंचतंत्र की कहानियों पर आधारित रहते थे। परंपरा का पालन करते हुए नयापन लाने से ही लोगों संग कला के जरिए जुड़ाव होगा। 

संवाद के दौरान पीएम ने कहा कि बच्चों को आयोजन जरूर दिखाएं। यहां के खिलौनों को दुनिया में कैसे पहुंचाएं, यह सोचें। पीएम ने प्रश्न पूछा कि क्या यहां बनने वाले खिलौनों को बाहर बेचने का प्रयास किया है। शिल्पियों से कहा कि नए तरीके अपनाएंं। सरकार जितना काम करें उतना अच्छा है। हम सक्रियतापूर्वक आपसे जुड़ेंगे, आपके साथ एक वर्कशाप करेंगें। बच्चों से क्या चर्चा करते है कि वे जो खिलौने बना रहे हैं, उनकी क्या लोकप्रियता है। इस पर चर्चा करेंगे तो बच्‍चे जागरुक भी होंगे और देश का कारोबार भी गति पाएगा।

काशी के शिल्पी रामेश्वर सिंह की बात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया टॉय फेयर 2021 में काशी के रामेश्वर सिंह से ऑनलाइन बात की। इस से पहले उन्होंने जब काशी की बात आई उन्होंने कहा कि जब हम काशी में आए हैं तो हर हर महादेव का नारा तो लगना ही चाहिए। इसके बाद सभी ने हर हर महादेव के उद्नाघोष से पीएम का स्वागत किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम वाराणसी आते हैं तो आप से जरूर मिलते हैं। आप लोग बताइए कि क्या बच्चों में ऐसी उत्सुकता देखी गई है कि वह खिलौने को भी मास्क लगाने की बात करते हैं। आप लोगों से कहना है कि बच्चों के बच्चों के मन की बात जानकर खिलौना तैयार करें, क्योंकि खिलौने बच्चों के जीवन का हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि आप शिल्पी लोग बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर के साथ मिलकर खिलौनों को लेकर वैज्ञानिक सलाह ले सकते हैं। प्रधानमंत्री ने इस दौरान दिल्ली की एक घटना का भी जिक्र किया। कहा कि दिल्ली के अस्पताल में बच्ची भर्ती थी जिसका पैर टूट गया था उसका पैर ऊपर लटका कर बनाया था। डॉक्टरों ने स्थिति को देखते हुए उसके साथ में खिलौना रख दिया इसके बाद बच्ची डॉक्टरों को इलाज में सपोर्ट करने लगे।

काशी सहित पूरे देश के पारंपरिक खिलौना उद्योग को गति प्रदान करने के लिए आयुक्त सभागार में छह हस्तशिल्पियों की उपस्थिति होगी। आयोजन के लिए काशी के शिल्प को दर्शाती एक डाक्यूमेंट्री फिल्म दिखाई जाएगी। साथ ही यहां के उत्पादों एवं कारीगरों की वीडियो एवं फोटोग्राफी भी की गई हैं, जिसके माध्यम से निर्यातकों को आकर्षित किया जाएगा। इसके अलावा केंद्रीय विद्यालय के कौशलेश कुमार की ओर से भी करीब दो मिनट की डाक्यूमेंट्री भेजी गई है। काशी में बने लकड़ी के खिलौने को विदेशों में सीधे निर्यात के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर यह आयोजन हो रहा है।

इससे पहले लाकडाउन के समय ही पीएम ने काशी में बने लकड़ी के खिलौनों का जिक्र किया था। इस आयोजन में देश भर के करीब 450 कारीगर भाग लेंगे। हस्तशिल्प सेवा केंद्र (वस्त्र मंत्रालय) के सहायक आयुक्त अब्दुल्लाह ने बताया कि चार दिवसीय कार्यक्रम की तैयारी पूरी कर ली गई है। यहां के चयनित 15 हस्तशिल्पियों में से छह की सूची भेजी गई, जिन्हें आयुक्त सभागार में उपस्थित होना है, जिनसे प्रधानमंत्री संवाद कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने की बात
उदय राज कुंदेर, उषा देवी, रामेश्वर सिंह, शालू कुमार प्रजापति, पन्ना लाल व अभय नारायण वर्मा।

चार दिवसीय फेयर में ये हस्तशिल्पी होंगे आनलाइन शामिल
स्टेट अवार्डी गोदावरी सिंह, उदय राज कुंदर, रवि प्रकाश विश्वकर्मा, उषा देवी, दीपक सिंह, रामेश्वर सिंह, शालु कुमार प्रजापति, राजकुमार सिंह, शिवानंद सिंह, सोनी वर्मा, पन्ना लाल, अभय नारायण वर्मा, राम चंदर, ज्ञानेश्वर सिंह व राजेश प्रजापति।

केंद्रीय विद्यालय के इन छात्रों का हुआ है रजिस्ट्रेशन
अर्चिता मिश्रा, अगस्त्य, प्राप्ति, अनुत्तरा गुप्ता, दीपांजलि शर्मा, प्रियंका जाना, आस्था, राशि सिंह, समिता, प्रियांशी, शुभांगी, अदिति, अनुज कुमार, महिमा कुमारी, कुशाग्री सिंह, अदिति गुप्ता, अमन कुमार, साक्षी शर्मा, अंकिता गौतम आदि।

4 COMMENTS

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