AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आर्मी चीफ पर पलटवार किया है और लिखा है कि अपने कार्यालय की हद जानना भी एक नेतृत्व ही है। गौरतलब है कि सेना प्रमुख ने एक कार्यक्रम में छात्र नेताओं पर हिंसा के लिए उकसाने का आरोप लगाया था।

असदुद्दीन ओवैसी ने गुरुवार को ट्वीट कर लिखा, ‘अपने कार्यालय की हद जानना भी एक नेतृत्व ही है. नेतृत्व वो है जो नागरिकता को सर्वोच्च स्थान पर रखे और उस संस्था की अखडंता को बरकरार रखें जिसकी आप अगुवाई कर रहे हैैं ।’

उनके अलावा कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी आर्मी चीफ के बयान पर जवाब दिया और ट्वीट किया कि आपके बयान से मैं सहमत हूं, लेकिन वो भी लीडर नहीं होते हैं जो अपने फॉलोवर्स को सांप्रदायिक हिंसा में शामिल होने के लिए मंजूरी देते है।

नेतृृत्व करना आसन है नहीं – सेना प्रमुख
 

गुरुवार को ही एक कार्यक्रम के दौरान आर्मी चीफ बिपिन रावत ने कहा था कि नेतृत्व वही है जो लोगों को दिशा दे। नेतृत्व के बारे में एक चीज़ साफ है कि जब आप कुछ करते हैं तो लोग आपको फॉलो करते हैं। नेतृत्व करना आसान दिखता है, लेकिन ऐसा है नहीं।

आर्मी चीफ ने कहा कि लीडर वही है जो आपको सही दिशा में ले जाए, जो गलत दिशा में ले जाए वो लीडर नहीं है. जैसा कि आजकल बड़ी संख्या में यूनिवर्सिटियों में छात्र नेता एक भीड़ को शहरों में हिंसा करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, ये कोई लीडरशिप नहीं है।

देश के 22 कैंपसों में हुआ था विरोध

सेना प्रमुख के इसी बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी बढ़ती जा रही है।  बीते कुछ दिनों में नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहा है। दिल्ली की जामिया यूनिवर्सिटी, यूपी की अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी समेत देश के कुल 22 कैंपस में CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ था।

यूनिवर्सिटियों के बाद ये विरोध प्रदर्शन देश के अलग-अलग हिस्सों में फैल गया था, दिल्ली-यूपी के कई इलाकों में इस दौरान हिंसा भी हुई थी। देशभर में हुई हिंसा में कुल 22 लोगों की मौत हो चुकी है। इसी के बाद विपक्ष CAA, NRC  और NPR के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेर रहा था।

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