गृह राज्यमंत्री उवाच IN PARLIAMENT

अपना देश गजब, देश की सोच गजब लेकिन देश के राजनेताओं की क्रिया-प्रतिक्रिया तो सबसे अलग ही अंदाज बयां करती है। गृहमंत्री ने एकबार एनआरसी का जिक्र क्या कर दिया कि बस एनआरसी नामक कथित प्रेत के नाम पर लोगों, विशेषकर खास समुदाय को लेकर भयभीत करने का मौका कतिपय मौकापरस्तों ने गोद ले लिया और राजधानी दिल्ली से लेकर पूरे देश में विचित्र सा माहौल बना दिया गया कि अब एक समुदाय को देश से बाहर निकाल दिया जाने वाला है। जबकि पीएम मोदी ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि देश में रह रहे लोगों को भयभीत होने की जरूरत नहीं है। फिर भी विपक्ष के रूप में भी अपनी अच्छी खासी साख खो चुके हताश लोग जीभ में हड्डी फ्रैक्चर होने का हव्वा खड़ा कर रहे हैं और आम जनता परेशान हो रही है।

देश के कई स्थानों पर संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों के बीच मंगलवार को लोकसभा में सरकार की ओर से फिर एक बार कहा गया कि राष्ट्रीय स्तर पर एनआरसी लाने के बारे में अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में चंदन सिंह और नमा नागेश्वर राव के प्रश्नों के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अभी तक एनआरसी को राष्ट्रीय स्तर पर तैयार करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इन सदस्यों ने सवाल किया था कि क्या सरकार की पूरे देश में एनआरसी लाने की कोई योजना है? उल्लेखनीय है कि विपक्ष ने संसद द्वारा पारित सीएए को असंवैधानिक करार देते हुए इसे उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है, जिस पर इसी महीने सुनवाई होनी है। विपक्षी दलों ने सीएए का विरोध करने वाले राज्यों के मुख्यमंत्रियों से एनपीआर नहीं कराने का भी आग्रह किया है। 

उधर बसपा अध्यक्ष मायावती ने दिल्ली में एक चुनावी रैली में यह आरोप लगाया कि सीएए और एनआरसी मुद्दों के बाद मुस्लिमों का जीवन ज्यादा कठिन हो गया है। उन्होंने लोगों से कहा कि वे उन दलों के हथकंडों से सचेत रहें जो वोट देने के लिए आपको लालच देंगे।

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