इंडियन नेशनल लोकदल के नेता अभय सिंह चौटाला ने केंद्र के नए कृषि कानूनों को लेकर हरियाणा विधानसभा की सदस्यता से बुधवार को इस्तीफा दे दिया। अभय चौटाला हरे रंग के एक ट्रैक्टर पर सवार होकर अपना इस्तीफा देने विधानसभा परिसर पहुंचे थे। चौटाला ने विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता को लिखे अपने त्याग पत्र में काले कृषि कानूनों को अलोकतांत्रिक तरीके से किसानों पर थोपे जाने को लेकर केंद्र की आलोचना की और कहा है कि पूरे देश में किसान समुदाय इन कानूनों का विरोध कर रहा है।

इस्तीफा देने के बाद अभय चौटाला ने कहा कि जो किसान नेता आंदोलन की अगुवाई कर रहे थे उनके खिलाफ केंद्र सरकार ने मुकदमे दर्ज किए हैं। उन्होंने कहा कल दिल्ली में जो हुआ वह केंद्र सरकार की साजिश थी।

वहीं, विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा कि उन्होंने अभय चौटाला (57) का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है। गुप्ता ने यहां संवाददाताओं से कहा कि अभय चौटाला ने अपने इस्तीफे में इस बात का जिक्र किया है कि उन्होंने किसानों की मांगें पूरी नहीं होने को लेकर इस्तीफा दिया है।

अभय चौटाला 90 सदस्यीय राज्य विधानसभा में अपनी पार्टी के एकमात्र विधायक थे और वह ऐलनाबाद सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। वह पार्टी के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के छोटे बेटे हैं।

मुख्यमंत्री खट्टर ने किसानों से की अपने घरों को लौटने की अपील

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मंगलवार को दिल्ली में लाल किले पर हुई घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि  किसान आंदोलन अब इसके नेताओं के नियंत्रण से बाहर हो चुका है और अपनी दिशा से भटक चुका है। उन्होंने कल की दुखद घटनाओं के बाद किसानों से अपने घरों को लौट जाने की अपील की। खट्टर ने यह बात गणतंत्र दिवस  के अवसर पर हुई घटनाओं के बाद कल देर शाम बुलाई गई मंत्रिमंडल की विशेष बैठक के बाद कही। उन्होंने कहा कि पूरा मंत्रिमंडल इस बात पर एकमत है कि इस समय प्रदेश की जनता मिलकर असामाजिक तत्वों के नापाक इरादों को विफल करे और देश व प्रदेश में शांति बनाए रखने में सहयोग दें।

उनके अनुसार, लाल किले पर राष्ट्र ध्वज के अलावा किसी और ध्वज का फहराया जाना कोई भी भारतीय बर्दाश्त नहीं कर सकता। ऐसा करना उन महान स्वतंत्रता सेनानियों और अमर शहीदों का अपमान है, जिन्होंने लाल किले पर तिरंगा फहराने के लिए अपनी जान तक कुर्बान कर दी। हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने हमें आजादी इस तरह की अराजकता फैलाने के लिए नहीं दिलवाई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान संगठनों ने दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए गहन आश्वासन दिए थे, लेकिन इस घटनाक्रम ने साबित कर दिया है कि आंदोलन का नेतृत्व उन हाथों में चला गया है जिनकी कथनी और करनी में अंतर है। इसलिए अब किसान भाइयों को इस विषय पर गहन विचार करना चाहिए कि यह आंदोलन किस दिशा में जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतभेदों को दूर करने की पर्याप्त गुंजाइश है, इसलिए सभी मतभेदों को मिल-बैठकर दूर किया जा सकता है। 

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