जीपीएआई समिट में बोले आईटी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर, एआई फ्रेमवर्क निर्माण के लिए काम करेगा भारत
‘एआई फ्रेमवर्क से होगी नागरिकों के हितों की रक्षा और इसके दुरुपयोग पर लगेगी लगाम’
नई दिल्ली, 21 नवंबर, 2022: भारत ने बतौर अध्यक्ष वर्ष 2023 के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ग्लोबल पार्टनरशिप (जीपीएआई) परिषद की कमान संभाली है। जापान में आयोजित जीपीएआई सम्मेलन में केंद्रीय इलेक्ट्राॅनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी और कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्यमंत्री श्री राजीव चंद्रशेखर ने सोमवार को भारत सरकार की तरफ से प्रतीकात्मक रूप से परिषद के निवर्तमान अध्यक्ष फ्रांस से जीपीएआई की अध्यक्षता ग्रहण की।

इस मौके पर श्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा, ‘‘हम सदस्य देशों के गहन सहयोग से एआई का एक फ्रेमवर्क बनाने की दिशा में काम करेंगे ताकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ताकत का उपयोग दुनियाभर में नागरिकों और उपभोक्ताओं के हितों के लिए हो और इसके दुरुपयोग पर लगाम लगाना एवं उससे होने वाले नुकसान से उपयोगकर्ताओं का पर्याप्त बचाव सुनिश्चित हो पाए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रौद्योगिकी और नवाचार में मौजूदा समय में निवेश बढ़ाने के लिए एआई एक काइनेटिक इनेबलर यानी गतिशील समर्थक है। राज्यमंत्री ने कहा कि भारत आधुनिक साइबर कानूनों और फ्रेमवर्क के एक इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है, जिसमें सुरक्षा और विश्वास और उत्तरदायित्व की तीन शर्तों की परिधि में स्पष्टता है।

देश में एआई के इर्द-गिर्द इनोवेशन इकोसिस्टम को प्रोत्साहन देने के लिए इसके सक्षम उपयोग को लेकर भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए आईटी राज्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमारे पास एक राष्ट्रीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कार्यक्रम है। साथ ही, राष्ट्रीय डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क नीति बनाई गई है और दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक रूप से सुलभ डेटा सेट प्रोग्राम नियोजित है ताकि हमारे नागरिकों के लिए और पूरी दुनिया के लिए अच्छे और भरोसेमंद एप्लीकेशंस का सृजन हो पाए।

एनडीजीएफपी का मकसद गैर-व्यक्तिगत डेटा तक समान रूप से पहुंच सुनिश्चित करना और सरकारी डेटा साझा करने के लिए संस्थागत ढांचे में सुधार करना, डिजाइन के माध्यम से गोपनीयता और सुरक्षा के सिद्धांतों को बढ़ावा देना और नाम जाहिर नही करने वाले उपकरण के उपयोग को प्रोत्साहित करने पर ध्यान केंद्रित करना है।
इसका उद्देश्य सरकार के डेटा संग्रह और प्रबंधन को मानकीकृत करना भी है। परिकल्पित भारतीय डेटा प्रबंधन कार्यालय आईडीएमओ के साथ एनडीजीएफपी अगली पीढ़ी के एआई और डेटा आधारित अनुसंधान और स्टार्टअप इकोसिस्टम को प्रोत्साहन देगा।

डेटासेट प्रोग्राम जहां अज्ञात गैर-व्यक्तिगत डेटा संपूर्ण एआई इकोसिस्टम के लिए उपलब्ध होगा, जिसका उद्देश्य स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देना भी है।
एआई से 2035 तक भारतीय अर्थव्यवस्था में 967 अरब अमेरिकी डॉलर और 2025 तक भारत की जीडीपी में 450-500 अरब अमेरिकी डॉलर जोड़ने की उम्मीद है, जो देश के 5 ट्रिलियन यानी पांच लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर के लक्षित जीडीपी का 10 प्रतिशत है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारत के प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम के विकास के लिए एक काइनेटिक इनेबलर है और 2025 तक 1 ट्रिलियन डॉलर डिजिटल इकोनॉमी लक्ष्य प्राप्त करने के लिए एक अहम कारक है।

जीपीएआई अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, मैक्सिको, न्यूजीलैंड, कोरिया गणराज्य और सिंगापुर सहित 25 सदस्य देशों का एक समूह है। भारत 2020 में एक संस्थापक सदस्य के रूप में समूह में शामिल हुआ था।
एआई की चुनौतियों और अवसरों की बेहतर समझ विकसित करने के लिए यह अपनी तरह की पहली पहल है। यह भागीदारों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, उद्योग, नागरिक समाज, सरकारों और शिक्षा जगत के प्रमुख विशेषज्ञों के सहयोग से एआई के जिम्मेदार विकास को बढ़ावा देने के लिए सहयोग करता है और मानवाधिकारों, समावेश, विविधता, नवाचार और आर्थिक विकास पर आधारित एआई के जिम्मेदार विकास और उपयोग का मार्गदर्शन करता है।
कार्यक्रम में हिस्सा लेने वालों में जापान के आंतरिक मामलों और संचार मामलों के राज्यमंत्री, सुगे योशिफुमी, जापान के पार्लियामेंटरी वाइस-मिनिस्टर आॅफ इकाॅनोमी, ट्रेड एंड इंडस्ट्री नागामाइन मकोतो, और फ्रांस के डिजिटल ट्रांजिशन एंड टेलीकम्यूनिकेशन मंत्री, जीन-नोएल बरोट एवं अन्य शामिल थे। .