मोहन कुमार

20.20 में क्लीन स्वीप करने के बाद यही मान लिया गया कि एक दिनी में थोड़ा बेहतर कर सिरीज़ हथिया ली जायेगी। लेकिन सोचने से क्या जीत मिल जाती है ? जी, नही। टीम इंडिया की फील्डिंग खराब रही और गेंदबाजी तो पूछिए ही मत। असल में न्यूजीलैंड के मैदानों की बनावट से भारतीय कई बार भ्रमित लगे। जब गेंदबाजी पर दबाव पड़ा तो गेंदबाजी राह भटक गई।

तीसरा और आखिरी मैच कीवियों ने भारत को पांच विकेट से अपने नाम करते हुए 3-0 से सूपड़ा साफ कर टी 20 का हिसाब साफ कर दिया।

भारत का 296 स्कोर ऐसा भी कम नहीं था, लेकिन जिस पर भरोसा था, वही पिट गए। राहुल के शतकीय प्रहार और मध्य क्रम में अय्यर और मनीष पांडे के साथ शतकीय भगीदारी ने दल को उबारने के साथ जमा दिया था। लेकिन फिर वही कि गेंदबाज विकेट नहीं निकाल सके और गुप्टिल ने 66 की चमकदार पारी से मेहमानों की चमक धूमिल की।उनका साथ निकोल ने 80 की पारी से दिया ।

कीवी मध्यक्रम में सभी क़ुछ करते दिखे। यही वजह है कि ग्रैंड होम ने आसानी से कंटक हालात से दल को निकाल दिया। यह याद रखना होगा कि गेंदबाज अगर अपना काम नहीं करेंगे तो 400 रन भी कम पड़ जाएंगे। शार्दुल ठाकुर को जल्द बहुत कुछ सीखने की जरुरत है,वरना देर होने में ज्यादा देर नहीं लगेगी। कोहली का यह मानना साफ इशारा है कि सीरीज में हम स्तरहीन रहे। इसे कुछ के लिए अदृश्य संकेत समझा जा सकता है। ये कप्तान एक्सप्रेसिव है तो इशारा भी करता है यानी ‘इशारे का मतलब समझ मेरे प्यारे’ वाला मामला है।

एक और बात, बुमराह पिछले चार मैच से विकेट नही ले पाए हैं और यही सारे अफ़साने का सार है।

अन्तिम स्कोर——-भारत-7/297- राहुल 112, अय्यर 62, मनीष 42- बेनेट 4-64, न्यूज़ीलैंड 5-300, 47.1 ओवर में- गुप्टिल 66, निकोलस 80, चहल 3 विकेट।

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