विपत्ति बहुत कुछ ले जाती है तो थोड़ा सा दे भी जाती है। दिल्ली की दो कॉलोनियो में रहनेवालों ने सैनेटाइजेशन की कमी देखते हुए पहल की और एक इंजीनियरिंग पास लड़के ने बैठे ही बैठे दिमाग लगाकर ई रिक्शा (e rickshaw ) को सैनेटाईजिंग मशीन में बदल डाला। उसका कहना था कि ई-रिक्शा को आसानी से सेनेटाइजेशन मशीन बनाया जा सकता है।

उसकी सलाह पर दो रिक्शों को मशीनें बना दी गईं । शालीमार बाग (shalimar bagh ) और पीतमपुरा कालोनी को सेनेटाइज करने का काम शुरू कर दिया गया। इतना ही नहीं, लॉकडाउन की मार झेल हरे गरीबों को भी भोजन वितरित करने का कार्य भी शुरू कर दिया गया। इसके लिए कॉलोनी के मंदिर ने इन लोगों की मदद की।

कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते पीतमपुरा की रामलीला कमेटी दोनों कॉलोनियों को सेनेटाइज करने का काम रोजाना कर रही है। पूरी पीतमपुरा कॉलोनी को एक बार सेनेटाइज कर दिया गया है तो शालीमार बाग में यह काम 60 फीसदी पूरा हो चुका है। कमेटी के प्रधान कहते हैं कि एमसीडी ( mcd) वाले सेनेटाइज तो कर रहे थे, लेकिन उनका काम लिमिटेड था और वह पहली मंजिल से ऊपर के घरों को सेनेटाइज ( sanetize)नहीं कर पा रहे थे। हमने दो ई-रिक्शा को सेनेटाइज मशीन बनाया, मोटर और टंकी बांधी। 10 लीटर पानी में एक लीटर सोडियम हाइपोक्लोराइट से टंकियों को भरा और काम शुरू कर दिया। उनका कहना था कि हमारे पास दोनों कॉलोनियों के आरडब्ल्यूए ( rwa)की लिस्ट थी। रिक्शे पर हमारे लोग जाते और कॉलोनी वाले हमारी मदद करते।

उन्होंने बताया कि अभी तक हजारों लीटर पानी का सेनेटाइजर बनाकर दोनों कॉलोनियों में छिड़का जा रहा है। यह काम लंबा चलेगा, क्योंकि हम दोनों कॉलोनियों को लगातार सेनेटाइज करते रहेंगे।

कमेटी के एक अन्य पदाधिकारी का कहना था कि दोनों कॉलोनियों के आसपास कच्ची कॉलोनियां भी हैं, इसके लिए सीडी ब्लॉक के शिव मंदिर वालों ने हमारी मदद की। हम रोजाना 3500 पैकेट खाना गरीबों को बांट रहे हैं। इस काम में लोग हमारी मदद को आगे आ रहे हैं। दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट सीपी अतुल कटियार भी गरीबों को भोजन बांटने आए और खुद भी खाया। इतना ही नहीं, उन्होंने 51 हजार रुपये का सहयोग भी दिया। गरीबों को भोजन खिलाने का काम भी लंबा चलेगा।

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