विशेष संवाददाता

नयी दिल्ली। पूरे देश को झकझोर देने वाले निर्भया कांड के चारों अभियुक्तों को अलग-अलग फांसी देने की अनुमति की मांग करने वाली केन्द्र सरकार की याचिका पर सुनवाई करते समय न्यायमूर्ति आर. भानुमति अचेत हो गयीं। इसके बाद सुनवाई टाल दी गयी और उन्हें उच्चतम न्यायालय की महिला कर्मियों की मदद से उनके चेम्बर में ले जाया गया। बाद में बताया गया कि, अब इस मामले में फैसला बाद में सुनाया जाएगा।

जस्टिस भानुमति सुनवाई के दौरान हुईं बेहोश, व्हील चेयर से चेम्बर में ले जाया गया

सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि, जस्टिस भानुमति पिछले कई दिनों से अस्वस्थ हैं और उनका इलाज चल रहा है। आज भी उन्हें तेज बुखार था और अब भी है। चेम्बर में डाक्टर उनका परीक्षण कर रहे हैं।

वैसे न्यायमूर्ति भानुमति जल्दी ही होश में आ गयीं। उन्हें डायस पर बैठे अन्य न्यायाधीशों और अदालत कर्मियों की मदद से व्हील चेयर पर उनके चेम्बर ले जाया गया। बाद में न्यायमूर्ति ए.एस. बोपन्ना ने बताया कि, इस मामले में फैसला बाद में उनके चेम्बर में ही सुनाया जाएगा।

गौरतलब है कि, निर्भया केस कानूनी सुनवाई के चक्कर में फंस गया है और दोषियों की फांसी में लगातार देरी हो रही है। दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र ने अर्जी दी थी जिस पर आज सुप्रीम कोर्ट में फाइनल सुनवाई हो रही थी। केंद्र सरकार की दलील है कि दोषियों को एक साथ सजा देने के सवाल पर अब और देरी नहीं की जाए।

मामले में केंद्र की याचिका पर गुरुवार को सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने फांसी की सजा पर अमल की मंजूरी मांगी थी। वृंदा ग्रोवर ने दोषी मुकेश की ओर से दलील देते हुए कहा था कि, अभी कुछ कानूनी बिंदु हैं जिन पर स्पष्टता नहीं है। वृंदा ग्रोवर ने कहा हमें जवाब देने का वक्त मिले। कोर्ट ने पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल रावल से पूछा कि, क्या वह कोर्ट की मदद कर सकते हैं। दोषी पवन के पास वकील नहीं है। क्या वह उसकी वकालत करेंगे। इसपर रावल ने असमर्थता जताई। संजय हेगड़े ने भी मना कर दिया।

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