नई दिल्ली | केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को जारी रखने के लिए कार्यकारी आदेश ला सकती है। शनिवार को किसान संगठनों के साथ होने वाली बैठक में सरकार की तरफ से इस किस्म का प्रस्ताव रखा जा सकता है। इसके अलावा अन्य मांगों को पूरा करने के लिए संबंधित कानूनों के नियमों में बदलाव किए जाने की संभावना है। हालांकि किसान संगठन इसके लिए तैयार होंगे, इसकी उम्मीद कम है। कार्यकारी आदेश के जरिये भी कानून बनाया जा सकता है। देश में कई कानून हैं जो कार्यकारी आदेश के जरिये बनाए गए हैं। 

कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गुरुवार की बैठक में किसान संगठनों की ओर से नए तीन कृषि कानूनों को लेकर आपत्तियों पर विचार किया गया है। किसानों की सबसे बड़ी मांग एमएसपी जारी रखने को लेकर कानूनी प्रावधानों करने की है। इसके लिए सरकार कार्यकारी आदेश का रास्ता अपना सकती है। ऐसा करने से किसानों की चिंता दूर हो जाएगी और मंडियों व खुले बाजार में कृषि उपज एमएसपी पर बिकने का रास्ता साफ हो जाएगा। 

ठेका खेती में किसान व कंपनी के बीच विवाद होने पर एसडीएम-डीएम कोर्ट के अलावा किसानों को अदालत की शरण में जाने का विकल्प रहेगा। इसके लिए कानून के नियमों में बदलाव किया जा सकता है। आवश्यक खाद्य नियम में खरीद की सीमा हटाने को लेकर पैन कार्ड के अलावा कंपनी को पंजीकरण करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा खुले बाजार में टैक्स लागू करने अथवा राज्य सरकार से सरकारी मंडियों मे टैक्स समाप्त करने की अपील कर सकती है। इस दिशा में सरकार पहल कर सकती है।

इसके अलावा संशोधित बिजली विधेयक, पराली पर जुर्माना, किसानों पर दर्ज मामले वापस लेने जैसी मांगों को मान लेने की संभावना है। अधिकारी ने बताया कि तीनों कृषि कानून में संशोधनों के जरिए किसानों की मांग पूरी कर किसानों से आंदोलन समाप्त करने का प्रयास किया जाएगा। लेकिन किसान संगठन पहले ही कह चुके हैं कि पहले संसद का विशेष सत्र बुलाकर तीनों कृषि कानून रद्द किए जाएं। इसके बाद एमएसपी को लेकर नया कानून बनाया जाए जिसमें किसान संगठनों का प्रतिनिधित्व हो। सरकार इसके लिए तैयार नहीं है, जिससे टकराव व आंदोलन समाप्त होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
 

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