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प्रधानमंत्री 5 सितम्बर को श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के शताब्दी समारोहों में शामिल होंगे
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 5 सितम्बर को शाम 7 बजे श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी)…
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उपराष्ट्रपति ने पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में उन्नत इंस्ट्रूमेंटेशन सुविधा और प्रौद्योगिकी नवाचार मंच का उद्घाटन किया
उपराष्ट्रपति ने पंजाब विश्वविद्यालय को विश्वस्तरीय संस्थान में बदलने के लिए सामूहिक…
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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन 5 सितंबर को चेन्नई जाएंगे
भारत के उपराष्ट्रपति, श्री सी. पी. राधाकृष्णन 5 सितंबर, 2026 को चेन्नई, तमिलनाडु के एक दिवसीय दौरे…
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भारत की राष्ट्रपति का शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर शुभकामना संदेश
भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या…
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2879 शिक्षार्थियों के पंजीकरण के साथ कॉरपोरेट मित्र पाठ्यक्रम का पहला बैच शुरू
कॉरपोरेट मित्र का उद्देश्य अनुपालन को कम जटिल और उद्यमियों के लिए…
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प्रधानमंत्री ने युद्ध के बाद इटली के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने पर जॉर्जिया मेलोनी को बधाई दी
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को देश…
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‘विशेष अभियान 3’ के दौरान लंबे समय से लंबित 2,306 पेंशन संबंधी शिकायतों का समाधान किया गया
‘विशेष अभियान 3’ के अंत तक, लक्षित शिकायतों के 72 प्रतिशत मामलों…
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केन्द्रीय मंत्री श्री रामदास अठावले ने एमसीडी के नजफगढ़ जोन में कचरा बीनने वाले श्रमिकों को ‘नमस्ते’ कार्ड वितरित करने के कार्यक्रम का उद्घाटन किया; नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड भी वितरित किए गए
केन्द्रीय मंत्री ने देश की स्वच्छता एवं स्वास्थ्यकर वातावरण सुनिश्चित करने में…
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भूतापीय ऊर्जा
स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में भारत की नई छलांग पृथ्वी के भीतर मौजूद अपार ताप ऊर्जा स्वच्छ ऊर्जा का एक शक्तिशाली स्रोत है, जिसे भूतापीय ऊर्जा कहा जाता है। भारत में उपलब्ध समृद्ध भू–तापीय संसाधनों को देखते हुए, यह ऊर्जा भविष्य में चौबीसों घंटे उपलब्ध बिजली के एक विश्वसनीय स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसी क्षमता को साकार करने के उद्देश्य से भूतापीय ऊर्जा पर राष्ट्रीय नीति तैयार की गई है, जिसका लक्ष्य भूतापीय ऊर्जा को भारत की नवीकरणीय ऊर्जा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना है। यह पहल 2070 तक नेट–जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में भारत की ऊर्जा यात्रा को और गति देने की क्षमता रखती है। लद्दाख में हाल ही में पहले दो भूतापीय कुओं का संचालन शुरू होना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और भारत की भूतापीय ऊर्जा यात्रा की औपचारिक शुरुआत का संकेत है। सतत भारत के लिए भूतापीय ऊर्जा का दोहन पृथ्वी की सतह के नीचे, इसके अंदरूनी हिस्सों की तीव्र गर्मी से निकलने वाला, ऊर्जा का एक निरंतर, कम कार्बन वाला स्रोत है जिसे भूतापीय ऊर्जा कहा जाता है। उपयुक्त भूविज्ञान और विवर्तनिकी वाले स्थानों में, इस ऊर्जा का उपयोग बिजली उत्पन्न करने के लिए किया जा सकता है या सीधे जमीन पर उपयोग किया जा सकता है। सौर और पवन ऊर्जा के विपरीत, यह स्रोत नवीकरणीय ऊर्जा प्रदान करता है जो चौबीसों घंटे उपलब्ध है। इस क्षमता को पहचानते हुए, सरकार ने सितंबर 2025 में भूतापीय ऊर्जा पर राष्ट्रीय नीति को अधिसूचित किया। यह नीति भारत के भू-तापीय संसाधनों की खोज और विकास के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करती है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय इसके कार्यान्वयन के लिए नोडल मंत्रालय है।…