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पीएम स्मृति चिन्ह ई-नीलामी 2026 में असम की जीवंत परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की झलक
असम के हथकरघे, बांस और बेंत के शिल्प, पीतल की वस्तुएं तथा…
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खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ अभियान शुरू किया
अभियान ‘स्वच्छता में सहभागिता, स्वच्छ भारत, विकसित भारत’ थीम के तहत व्यवहारिक…
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भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने दूरसंचार उपभोक्ता संरक्षण (13वां संशोधन) विनियम, 2026 जारी किए
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने आज दूरसंचार उपभोक्ता संरक्षण (13वां संशोधन)…
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भारत की राष्ट्रपति ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किए; श्री अनंत नाग को दादासाहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया
भारतीय फिल्मों में, हम भारत के लोगों के सपने हैं, परम्पराएं हैं,…
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भारतीय नौसेना के जहाज सह्याद्री और कुलिश, एडीएसएस-प्लस जेसीए के लिए फिलीपींस के सुबिक खाड़ी पहुंचे
भारतीय नौसेना की परिचालन तैनाती के हिस्से के रूप में, भारतीय नौसेना…
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दूरसंचार विभाग ने लोगों को फर्जी तरीके से सिम कार्ड जारी करने, दूरसंचार पहचान से जुड़ी चीजों के दुरुपयोग या आईएमईआई नंबरों में छेड़छाड़ के प्रति आगाह किया है
ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक की कैद…
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प्रमुख उद्योग सूचकांक (आईसीआई) के अगस्त 2026 माह के लिए आधार वर्ष 2022-23 के साथ अनंतिम अनुमान और जुलाई 2026 माह के लिए अंतिम सूचकांक
अगस्त 2026 माह के लिए प्रमुख उद्योग सूचकांक के अनंतिम अनुमान (आधार…
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Uncategorized, Breaking News, Desh, Govt Policies, Latest News, News, Politics & Elections, Top Stories33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं के राजनीतिक नेतृत्व के लिए नए रास्ते खोलेगा: लोकसभा अध्यक्ष
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं के अधिक प्रतिनिधित्व की पैरवी पुरजोर तरीके से की। उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान ऐतिहासिक आवश्यकता है। विभिन्न सार्वजनिक सेवाओं और पेशों में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति से वो दिन दूर नहीं जब 50 प्रतिशत नेतृत्व महिलाओ के हिस्से होगा। आधी आबादी की आने वाले वर्षों में राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्रों में महिलाओं की एक नई पीढ़ी उभरकर सामने आएगी। श्री बिरला ने आज फरीदाबाद में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) द्वारा आयोजित “लिंग-उत्तरदायी शासन” विषय पर दो दिवसीय अखिल भारतीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए ये बातें कहीं। श्री बिरला ने कहा कि अब ध्यान केवल सहायता और अवसर प्रदान करने से हटकर महिलाओं को नीतियों, कार्यक्रमों और कानूनों को सक्रिय रूप से आकार देने में सक्षम बनाने पर होना चाहिए। महिलाओं को स्वयं उन कानूनों को तय करने में भाग लेना चाहिए जो उनकी चिंताओं और आकांक्षाओं का समाधान कर सकें। उन्होंने समानता के प्रति संवैधानिक प्रतिबद्धता और महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तिकरण व आत्मनिर्भरता के लिए उठाए गए विभिन्न विधायी उपायों का जिक्र किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि राष्ट्रीय महिला आयोग जैसी संस्थाओं की उभरती चुनौतियों की पहचान करने और समाधान सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका है। महिला विधायक—लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, पंचायतों और नगर पालिकाओं के माध्यम से—महिलाओं के मुद्दों को उचित मंचों तक पहुंचाने और यह सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं कि कानून जमीनी वास्तविकताओं के अनुकूल हों। श्री बिरला ने इस बात पर भी जोर दिया कि देश की लगभग आधी आबादी वाली महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के बिना भारत एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने कहा कि हर महिला के पास रोजगार, आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सशक्तिकरण के अवसर होने चाहिए। उन्होंने महिलाओं से ऐसी प्रभावी नीतियों, योजनाओं और विधायी उपायों पर विचार-विमर्श करने का आह्वान किया जो अभाव और कठिनाइयों का सामना कर रही महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत कर सकें। उन्होंने सुझाव दिया कि इस कार्यशाला में प्रतिभागी विधायक अपने अपने क्षेत्र के अनुभवों और सफल पहलों को साझा करें , ताकि सर्वोत्तम प्रथाओं को देश भर में अपनाया जा सके। इसके अलावा, उन्होंने महिलाओं में उन कानूनों और संस्थागत तंत्रों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया जो उनकी चिंताओं के समाधान के लिए उपलब्ध हैं। यह उल्लेख करते हुए कि महिलाएं हमेशा से भारत के परिवर्तन के मोर्चे पर आगे रही हैं—स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र-निर्माण से लेकर लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने तक—श्री बिरला ने रेखांकित किया कि यह कार्यक्रम महिला विधायकों को अपने अनुभवों, विचारों और दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान करने के लिए एक आवश्यक मंच प्रदान करता है, जिससे उनकी नेतृत्व क्षमता मजबूत होती है। विभिन्न राज्यों इन और केंद्र शासित प्रदेशों की महिला विधायकों की भागीदारी यह दर्शाती है कि वे विधायी मंचों के माध्यम से महिलाओं की आकांक्षाओं को आवाज देने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से इस जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए अपने कौशल को और धार देने का आग्रह किया। एक जीवंत लोकतंत्र में संवाद के महत्व पर जोर देते हुए श्री बिरला ने कहा कि जनता की चुनौतियों और आकांक्षाओं का समाधान निरंतर चर्चा और विचार-विमर्श के माध्यम से सबसे अच्छे ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने रेखांकित किया कि संवेदनशीलता महिलाओं के नेतृत्व की एक मुख्य ताकत है, जो लोगों की चिंताओं की गहरी समझ और प्रभावी समाधान खोजने की अधिक क्षमता को बढ़ावा देती है। उन्होंने जोड़ा कि एक संवेदनशील और उत्तरदायी कार्य संस्कृति सामाजिक चुनौतियों से निपटने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।…
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जापान में भारतीय समुदाय भारत-जापान संबंधों को सशक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल
जापान में 200 से अधिक भारतीय कारोबारी प्रतिनिधियों की मौजूदगी भारत में…