भोपाल, 15 मई 2026। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने धार स्थित भोजशाला मामले का फैसला सुनाते हुए उसे को वाग्देवी का मंदिर माना है। इस पर प्रतिक्रिया में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने निर्णय को सांस्कृृतिक विरासत, आस्था और इतिहास के सम्मान का महत्वपूर्ण क्षण बताया।
उन्होंने अपने एक्स पर लिखा-‘‘माननीय उच्च न्यायालय द्वारा धार की ऐतिहासिक भोजशाला को संरक्षित स्मारक एवं मां वाग्देवी की आराधना स्थली मानते हुए दिया गया निर्णय हमारी सांस्कृतिक विरासत, आस्था और इतिहास के सम्मान का महत्वपूर्ण क्षण है।’’
डाॅ. यादव ने कहा कि एएसआई के संरक्षण एवं प्रबंधन में भोजशाला की गरिमा और अधिक सुदृढ़ होगी तथा श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना का अधिकार सुनिश्चित होगा।
उन्होंने कहा कि मां वाग्देवी की प्रतिमा को यूके से भारत वापस लाने के संबंध में केंद्र सरकार को विचार करने का निर्देश स्वागतयोग्य है। इस दिशा में राज्य सरकार भी आवश्यक प्रयास करेगी।
डाॅ. यादव ने कहा, ‘‘हमारी संस्कृति सदैव ‘सर्वधर्म समभाव’, सामाजिक समरसता और भाईचारे की वाहक रही है। हम न्यायालय के निर्णय का पूर्ण सम्मान करते हैं और प्रदेश में सौहार्द, सांस्कृतिक गौरव एवं सामाजिक सद्भाव को और अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘माननीय न्यायालय का यह निर्णय स्वागतयोग्य है। राज्य सरकार इसके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करने में पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी।’’
भाजपा (मध्यप्रदेश) महिला मोर्चा की महामंत्री डाॅ. स्वप्ना वर्मा ने अपने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर अपने एक पोस्ट में लिखा- ‘‘सदियों की प्रतीक्षा, संघर्ष, आस्था और सत्य आज न्याय के प्रकाश में प्रतिष्ठित हुए। माननीय मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा धार स्थित भोजशाला को माँ वाग्देवी (माँ सरस्वती) मंदिर के रूप में मान्यता दिया जाना केवल एक न्यायिक निर्णय नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और सनातन विरासत का सम्मान है।’’
उन्होंने आगे कहा, एएसआई सर्वे, शिलालेखों और प्रामाणिक साक्ष्यों के आधार पर आया यह फैसला उन करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं की विजय है, जिन्होंने वर्षों तक सत्य के लिए विश्वास बनाए रखा।
माँ वाग्देवी की कृपा से हमारी संस्कृति, ज्ञान और सभ्यता का यह दीप सदैव प्रज्वलित रहे।
जानकारी के अनुसार, उच्च न्यायालय ने धार की भोजशाला को एएसआई की रिपोर्ट के आधार पर हिन्दू मंदिर माना। रिपोर्ट के अनुसार, भोजशाला परिसर स्थित आधार स्तंभों व अर्धस्तंभों पर हिंदू देवी-देवताओं की आकृतियां और मंदिर शैली की नक्काशी मिलने का दावा किया गया है, जो हिंदू मंदिर करार देने का साक्ष्य बना।

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