देश की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने वाला बिल संसद में पास नहीं हो पाया। सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं ने इसके लिए विपक्षी दलों को कसूरवार ठहराया। लेकिन विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाया। भाजपा नेता व कार्यकर्ता इसे देश की आधी आबादी के अधिकार पर कुठाराघात बताया। दरअसल, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके समेत विपक्षी खेमे के दलों ने लोकसभा में लाए गए संविधान संशोधन विधेयक के खिलाफ वोट किया।
सरकार की ओर से संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026, और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 संसद में पेश किए गए थे। मोदी सरकार द्वारा पेश किए गए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पर लोकसभा में वोटिंग हुई। विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े जबकि विपक्ष में 230 वोट पड़े। यह संविधान संशोधन विधेयक था जिसे पास होने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी।
करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने वाले संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 अर्थात नारी शक्ति वंदन अधिनियम को केंद्र सरकार ने लागू कर दिया था। लेकिन मोदी सरकार द्वारा देश की आधी आबादी का सपना साकार करने की दिशा में किये गए प्रयासों पर विपक्ष ने पानी फेर दिया। भाजपा कहती है कि यह विपक्षी दलों की महिला विरोधी नीति का परिचायक है।
सवाल यह है कि सरकार को जब मालूम था कि यह विधेयक पास नहीं हो पाएगा तो फिर इसे लाने की आवश्यकता क्या थी? लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व बढ़ाने के प्रति अगर सरकार संवेदनशील होती तो पहले विपक्षी दलों के साथ बातचीत करती और इस विधेयक की अहमियत बताती। लेकिन, ऐसा कुछ नहीं हुआ। सत्ता पक्ष के बड़े नेता बहस के दौरान जिस अंदाज में बोल रहे थे उससे यही लगता था कि वह विपक्षी दलों को साथ लेना नहीं चाहते हैं, बल्कि उनको धमका रहे हैं। महिलाओं के हितों की अनदेखी करने वालों की निंदा होनी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अगुवाई में केंद्र सरकार ने 2023 में ही नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद से पारित करवाई थी, जिसे सरकार ने लागू भी कर दिया। इस अधिनियम के पूरी तरह अमल में लाने के लिए संविधान संशोधन विधेयक2026 का पारित होना आवश्यक था।
सरकार ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026, और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 संसद में पेश किए गए थे। इन विधेयकों के संसद से पारित होने पर पूरे देश में महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों में 33 फीसदी आरक्षण लागू करने के मार्ग की बाधाएं दूर हो जातीं। सरकार ने इसके लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया था।
संविधान निर्माता बाबा साहेब डाॅ. भीमराव अंबेडकर ने कहा था-‘‘ मैं किसी समुदाय की प्रगति का आकलन इस आधार पर करता हूँ कि महिलाओं ने कितनी प्रगति हासिल की है।’’
आज देश की नारी की प्रगति सुनिश्चित करने के लिए उनकी राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के जो प्रयास किये जा रहे हैं उसमें तीव्र इच्छाशक्ति की कमी नजर आती है। ऐसे में देश की आधी आबादी को कब पूरा अधिकार मिलेगा यह कहना मुश्किल है।

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