वैज्ञानिकों द्वारा विकसित उन्नत सतह-अभियांत्रिकी पद्धति से अधिमिश्र धातुओं की मशीनिंग में उपयोग होने वाले कटिंग टूल्स (अतिरिक्त सामग्री को काटने, आकार देने या हटाने में प्रयुक्त होने वाले कठोर धातु उपकरण) की संवहनीय क्षमता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इससे एयरोस्पेस, ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल क्षेत्रों को लाभ हो सकता है, जहां अत्यधिक विषम परिस्थितियों में काम करने वाले उपकरणों के निर्माण में निकल आधारित अधिमिश्र धातु (सुपरएलॉय) अत्यंत आवश्यक होती है।
विमान इंजनों, विद्युत संयंत्रों और पेट्रोकेमिकल प्रणालियों में उपयोग के लिए अधिमिश्र धातुओं की मशीनिंग एक बड़ी विनिर्माण चुनौती है। इनकोनल 718, आईएन 625 और आईएन617 जैसी निकल आधारित अधिमिश्र धातुओं में असाधारण मजबूती और कठोरता होती है, जिसके कारण इन्हें काटना या आकार देना कठिन होता है। मशीनिंग के दौरान तेजी से कठोरीकरण, कम ऊष्मा चालकता और कटिंग टूल्स के साथ इन धातुओं की तीव्र रासायनिक अंतःक्रिया के कारण औजार तेजी से घिसते हैं, उत्पादकता घटती है और विनिर्माण लागत बढ़ जाती है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त अनुसंधान एवं विकास केंद्र, हैदराबाद स्थित पाउडर धातुकर्म एवं नवीन पदार्थों के अंतरराष्ट्रीय उन्नत अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले टंगस्टन कार्बाइड कटिंग टूल्स पर दो नैनोकंपोजिट सुरक्षात्मक लेप विकसित कर और उनका आकलन किया है। ये लेप हैं- टाइटेनियम एल्युमिनियम सिलिकॉन नाइट्राइड और क्रोमियम एल्युमिनियम सिलिकॉन नाइट्राइड।
इन लेपों को संस्थान में ही कैथोडिक-आर्क भौतिक वाष्प निक्षेपण तकनीक के उपयोग से चढ़ाया गया। इससे आईएन 718, आईएन 625 और आईएन 617 की मिलिंग (मशीनिंग प्रक्रिया जिसमें घूमने वाले मल्टी-पॉइंट कटिंग टूल से अतिरिक्त सामग्री हटाई जाती है) के लिए इन औजारों के प्रदर्शन की आकलन में मदद मिली। इस अध्ययन में औजारों की कार्य-आयु के साथ-साथ लेप के प्रदर्शन को प्रभावित करने वाली प्रक्रियाओं का भी परीक्षण किया गया।
अनुसंधान में एक महत्वपूर्ण तथ्य भी सामने आया है कि ऐसा कोई एक लेप नहीं, जो प्रत्येक अधिमिश्र धातु के लिए सर्वोत्तम हो। किसी सुरक्षात्मक लेप की प्रभावशीलता काफी हद तक मशीनिंग की जा रही धातु की रासायनिक संरचना और लेप के साथ उसकी अंतःक्रिया पर निर्भर करती है।
आईएन718 के मामले में टाइटेनियम एल्युमिनियम सिलिकॉन नाइट्राइड लेप वाले औजार की कार्य-आयु बिना लेप वाले औजार की तुलना में लगभग 80 प्रतिशत अधिक पाई गई, जबकि इनकोनेल 625 के मामले में इसमें लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, इनकोनेल 617 के लिए क्रोमियम एल्युमिनियम सिलिकॉन नाइट्राइड लेप का प्रदर्शन उल्लेखनीय रूप से बेहतर रहा और इससे औजार की कार्य-आयु में दो सौ प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई।
ये परिणाम दर्शाते हैं कि एक लेप इनकोनेल 718 और इनकोनेल 625 (उच्च-प्रदर्शन वाला निकल-आधारित सुपरअलॉय ) के लिए अधिक उपयुक्त हो सकता है, जबकि दूसरा इनकोनेल 617 के लिए काफी बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। इन निष्कर्षों से मशीनिंग की जा रही विशिष्ट अधिमिश्र धातु के अनुरूप सुरक्षात्मक लेप के चयन के लिए वैज्ञानिक आधार प्राप्त होता है।

चित्र 1: उन्नत नैनोकंपोजिट लेप से टंगस्टन कार्बाइड के कटिंग टूल्स की कार्य-आयु में उल्लेखनीय सुधार। परिणामों से पता चलता है कि सर्वोत्तम लेप का चयन मशीनिंग की जा रही विशिष्ट निकल आधारित अधिमिश्र धातु पर निर्भर करता है।
अनुसंधानकर्ताओं ने यह भी जांच की कि कटिंग टूल्स में खराबी किस प्रकार उत्पन्न होती है। औजारों को नुकसान पहुंचने का एक प्रमुख कारण मशीनिंग की जा रही सामग्री का बार-बार औजार की सतह से चिपकना था। मशीनिंग के दौरान अधिमिश्र धातु की एक परत कटिंग एज से चिपक सकती है और बाद में जब यह परत टूटकर अलग होती है, तो अपने साथ औजार के छोटे-छोटे टुकड़े भी उखाड़ लेती है। इससे धीरे-धीरे औजार की धार टूटने लगती है। सुरक्षात्मक लेप ने क्षति की यह प्रक्रिया धीमी करने और औजारों की कार्य-आयु बढ़ाने में मदद की। औजारों के खराब होने के प्रमुख कारणों में धार का टूटना और क्रमिक घिसाव का पता चला। इसके अलावा, अपघर्षण, अलग-अलग पदार्थों के कणों या सतहों के आपस में चिपकने और क्षरण भी औजारों की घिसाव के कारण होते हैं।

चित्र 2: स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से प्राप्त कटिंग टूल की धार का चित्र, जिसमें मशीनिंग की जा रही सामग्री का चिपकना, अपघर्षण, धार का टूटना और बगल की दरारें दिखाई गई हैं। ये सभी निकल आधारित अधिमिश्र धातुओं की मशीनिंग के दौरान औजारों के खराब होने के प्रमुख कारण हैं।
अनुसंधानकर्ताओं ने मशीनिंग के दौरान उत्पन्न होने वाले धातु के छीलन का भी अध्ययन किया। इनमें विशिष्ट कतरनी पट्टियां और दांतेदार अथवा आरी के दांतों जैसी आकृतियां दिखाई दीं, जो कटाई के दौरान उत्पन्न होने वाली तीव्र ताप-यांत्रिक परिस्थितियां दर्शाती हैं। छीलन के खंडों में विभाजित होने की मात्रा का संबंध औजारों के प्रदर्शन से पाया गया। इससे इन उन्नत मिश्रधातुओं के जटिल मशीनिंग व्यवहार को समझने में और अधिक सहायता मिली।
अधिक समय तक चलने वाले कटिंग टूल्स से मशीनों के बंद रहने का समय कम किया जा सकता है, उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है और उच्च इंजीनियरिंग घटकों की मशीनिंग की लागत घटाई जा सकती है।
इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि यह अध्ययन सुरक्षात्मक लेप के लिए विज्ञान आधारित और विशिष्ट अनुप्रयोगों के दृष्टिकोण की दिशा में संकेत करता है। सभी परिस्थितियों में एक ही लेप को सर्वोत्तम मानने के बजाय, निर्माता मशीनिंग की जा रही विशिष्ट मिश्रधातु की संरचना और उसके व्यवहार के आधार पर लेप का चयन या डिजाइन कर सकते हैं। इससे उन्नत सामग्रियों से बने घटकों का अधिक दक्षतापूर्ण, विश्वसनीय और किफायती विनिर्माण संभव होगा।
पाउडर धातु विज्ञान और नई सामग्रियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय उन्नत अनुसंधान केंद्र के इंजीनियर्ड कोटिंग्स केंद्र में हुए इस अनुसंधान को मैटेरियल्स टुडे कम्युनिकेशंस नामक शोध पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।
यह अध्ययन दर्शाता है कि उद्योगों में कुछ अत्यंत चुनौतीपूर्ण सामग्रियों की मशीनिंग को बेहतर बनाने का प्रमुख आधार केवल बेहतर लेप विकसित करना ही नहीं, बल्कि सही सामग्री के लिए उपयुक्त लेप चुनना भी है।
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