सर्बानंद सोनोवाल ने मरीना हाजिमानोलिस के साथ द्विपक्षीय बैठक की, साइप्रस ने जहाज पुनर्चक्रण के लिए भारत की ईयू में मान्यता का समर्थन किया
सोनोवाल ने भारत में मेक-इन-इंडिया एलएनजी/एलपीजी कार्गो टैंक और क्रायोजेनिक संरचनाएं बनाने के लिए कोरिया की विशेषज्ञता का लाभ उठाने पर चर्चा की, ताकि हरित नौवहन को बढ़ावा दिया जा सके
भारत का समुद्री परिवर्तन मजबूत निवेश, नवाचार और भारत-कोरिया के बीच दीर्घावधि साझेदारी के लिए बहुत सारे अवसर देता है: सर्बानंद सोनोवाल
कोरियाई समुद्री कंपनियों ने भारत के बढ़ते जहाज निर्माण, पत्तन अवसंरचना और नौवहन क्षेत्रों में रुचि दिखाई
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री (एमओपीएसडब्ल्यू), सर्बानंद सोनोवाल ने दक्षिण कोरिया के बुसान में दक्षिण कोरियाई समुद्री संस्थानों, जहाज निर्माताओं और नौवहन कंपनियों तथा साइप्रस के नौवहन उप-मंत्री के साथ कई बैठकें कीं, क्योंकि भारत अपने जहाज निर्माण महत्वाकांक्षाओं के लिए आपूर्ति श्रृंखला, वित्त, तकनीक और बाजारों का निर्माण करने की दिशा में काम कर रहा है।
इन वार्ताओं में जहाज निर्माण निवेश, समुद्री उपकरण निर्माण, समुद्री वित्तपोषण, पत्तन विकास, नौवहन, हरित तकनीक और सतत जहाज पुनर्चक्रण जैसे विषयों पर चर्चा हुई। सरकार का लक्ष्य 2047 तक भारत को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी जहाज निर्माण, नौवहन और समुद्री सेवाओं का केंद्र बनाना है।
सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “भारत का जहाज निर्माण परिदृश्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार की दृष्टि और नीतिगत पहलों के कारण तेजी से बढ़ रहा है।”
दिन के मुख्य बिंदु:
पुनर्चक्रण: साइप्रस ने पात्र जहाज पुनर्चक्रण यार्ड को ईयू से मान्यता दिलाने के लिए भारत की बोली का समर्थन किया।
हरित नौवहन: कोरियन निर्माता और भारतीय यार्ड ने एलएनजी और एलपीजी कार्गो टैंक, क्रायोजेनिक संरचना और बड़े जहाज ब्लाक में साझेदारी की संभावनाएँ तलाशीं।
वित्त: सोनोवाल ने कोरियाई समुद्री वित्तीय संस्थाओं को समुद्री विकास कोष (एमडीएफ) और सागरमाला वित्त निगम (एसएमएफसी) के अवसर प्रस्तुत किए।
जहाज बेड़ा और बाजार: प्रमुख कोरियाई जहाज निर्माण कंपनियों ने भारत में पंजीकरण व भारतीय ध्वज लगाने, भारत में निर्मित कंटेनरों और आगामी वधवन पोर्ट में निवेश में रुचि दिखाई, इससे जुड़ी संभावनाओं का अध्ययन किया गया।
एक द्विपक्षीय बैठक में, साइप्रस की नौवहन उप-मंत्री मरीना हाजिमानोलिस ने भारत के उन प्रयासों के लिए अपने देश का समर्थन दोहराया, जिनका उद्देश्य पात्र भारतीय जहाज-पुनर्चक्रण को यूरोपीय संघ (ईयू) से मान्यता दिलाना है।
दोनों मंत्रियों ने नौवहन, जहाज निर्माण, समुद्री निवेश, नाविकों के कल्याण और समुद्री सेवाओं पर भी चर्चा की। हाजिमानोलिस ने बताया कि साइप्रस की लगभग 25 प्रमुख कंपनियों के नवंबर में भारत आने की उम्मीद है, जो नौवहन, जहाज प्रबंधन, समुद्री तकनीक और इससे जुड़े क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाएं तलाशेंगी। दोनों पक्षों ने भारत-साइप्रस रणनीतिक साझेदारी का स्वागत किया और इसे ठोस व्यावसायिक परिणामों में बदलने पर जोर दिया।
सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “मैं हमारी रणनीतिक साझेदारी को ठोस और पारस्परिक रूप से लाभकारी समुद्री परिणामों में बदलने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने के प्रति आशान्वित हूँ।”
सेजिन हैवी इंडस्ट्रीज के सीईओ किम जिन-जोंग के साथ हुई बैठक में, बड़े जहाज निर्माण ब्लॉक, एलपीजी और एलएनजी कार्गो टैंक, क्रायोजेनिक संरचनाओं, जो गैस को बहुत कम तापमान पर तरल अवस्था में रखती हैं और अन्य विशेष समुद्री उपकरणों के निर्माण में संभावित साझेदारी पर चर्चा हुई। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने नए जहाज निर्माण केन्द्रों और मौजूदा यार्डों के विस्तार से मिलने वाले अवसरों पर प्रकाश डाला। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) ने भी सेजिन के साथ ब्लॉक निर्माण की संभावनाओं पर चर्चा की और सेजिन ने इसकी संभावना पर विचार करने में अपनी रुचि दिखाई। भारत में टैंकों और क्रायोजेनिक क्षमताओं का निर्माण देश के जहाज निर्माण आधार को और अधिक मजबूत बनाएगा।
सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “भारत का बढ़ता समुद्री इकोसिस्टम, कोरियाई विशेषज्ञता और भारतीय विनिर्माण क्षमताओं के एक साथ आने के लिए अपार अवसर प्रदान करता है। एक आधुनिक हरित बेड़े के लिए क्रायोजेनिक टैंकों से लेकर जहाज के ब्लॉक तक, विशेष क्षमताओं की आवश्यकता होती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के तहत, हम दुनिया के बेहतरीन साझेदारों के साथ मिलकर देश के भीतर ही ये क्षमताएं विकसित कर रहे हैं, जिससे भारत में हरित नौवहन को और मजबूती मिलेगी।”
कोरिया मरीन इक्विपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट (केओएमईआरआई) के अध्यक्ष यांग वॉन-चांग के साथ अपनी बैठक के दौरान, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने समुद्री उपकरणों के निर्माण, अनुसंधान और विकास, परीक्षण, प्रमाणन, हरित प्रणोदन प्रणाली और स्मार्ट समुद्री तकनीकों में सहयोग पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने केओएमईआरआई और प्रस्तावित भारत जहाज प्रौद्योगिकी केंद्र (आईएसटीसी) के बीच संस्थागत सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया। साथ ही, कोरियाई समुद्री उपकरण निर्माताओं के लिए भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी करने के अवसरों पर भी चर्चा हुई। सोनोवाल ने केओएमईआरआई और इच्छुक कोरियाई उपकरण निर्माताओं को भारत आने और तकनीकी तथा औद्योगिक सहयोग के ठोस क्षेत्रों का पता लगाने के लिए आमंत्रित किया।
सोनोवाल ने कहा, “हम भारत जहाज प्रौद्योगिकी केंद्र को जहाज डिजाइन, अनुसंधान, परीक्षण और प्रशिक्षण के लिए एक राष्ट्रीय प्लेटफार्म के रूप में विकसित कर रहे हैं। कोरियाई तकनीकी विशेषज्ञता के साथ देश के भीतर ही परीक्षण और प्रमाणन की सुविधा होने से, भारत में बने समुद्री उपकरणों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने में मदद मिलेगी। इससे हमारे शिपयार्ड भी हरित प्रणोदन प्रणाली और स्मार्ट जहाज तकनीकों के लिए तैयार हो सकेंगे।”
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने एचएमएम की टीम, जिसका नेतृत्व वरिष्ठ कार्यकारी उपाध्यक्ष जे वाई ली कर रहे थे, के साथ सार्थक चर्चा की। इसमें भारत में अपने जहाजों का पंजीकरण कराने, भारतीय नाविकों की भर्ती करने, ‘हांगकांग सम्मेलन (एचकेसी) के अनुरूप भारतीय जहाज-पुनर्चक्रण सुविधाओं का उपयोग करने और एचएमएम के मौजूदा नेटवर्क में शामिल न होने वाले अन्य भारतीय बंदरगाहों तक अपनी नौवहन सेवाओं का विस्तार करने जैसे विषयों पर बात हुई। ‘कोरिया ओशन बिजनेस कॉरपोरेशन’ (केओबीसी) के सीईओ आन ब्योंग-गिल के साथ हुई चर्चा में, भारत के तेजी से बढ़ते समुद्री क्षेत्र—विशेष रूप से बंदरगाह अवसंरचना और नौवहन में निवेश और व्यापार के अवसरों पर विचार किया गया।
सोनोवाल ने कोरियाई समुद्री वित्तपोषण संस्थानों और भारतीय हितधारकों के बीच सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। भारत ने लगभग 7.8 अरब डॉलर का जहाज निर्माण सहायता पैकेज मंजूर किया है, बड़े जहाज निर्माण केंद्र विकसित किए जा रहे हैं, और 400 से अधिक जहाज निर्माण चरण में हैं, जिनका अनुमानित मूल्य 23 अरब डॉलर है।
इन बैठकों ने वैश्विक समुद्री कंपनियों के साथ सहयोग के नए अवसर खोले हैं। इससे 2047 तक भारत को जहाज निर्माण, नौवहन और समुद्री सेवाओं के एक वैश्विक केंद्र बनाने के लक्ष्य को समर्थन मिलेगा।




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