ईटीएम 2026 ने अपना दायरा बढ़ाया है, जिसमें ऊर्जा नवाचार और व्यावसायीकरण को आगे बढ़ाने के लिए 1500 से अधिक प्रतिनिधियों को एक मंच पर साथ ला जा रहा है
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने आज गोवा में ओएनजीसी उन्नत प्रशिक्षण संस्थान में 29वीं ऊर्जा प्रौद्योगिकी बैठक (ईटीएम 2026) का उद्घाटन किया। तीन दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में नीति-निर्माता, उद्योग जगत के दिग्गज, शोधकर्ता, प्रौद्योगिकी प्रदाता और ऊर्जा विशेषज्ञ एक साथ एक मंच पर आ रहे हैं, ताकि वे भारत के ऊर्जा भविष्य को आकार देने वाले नवाचारों पर चर्चा कर सकें।
भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तत्वावधान में सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी (सीएचटी) द्वारा आयोजित और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के सह-आयोजन में इस बैठक का विषय ‘ऊर्जा नवाचार में तेजी लानाः अनुसंधान से व्यावसायीकरण तक’ है। इस प्लैटफॉर्म का उद्देश्य ऊर्जा मूल्य शृंखला में सहयोग को मजबूत करना और उभरती हुई तकनीकों के विकास तथा उनके व्यावसायिक अपनाए जाने की प्रक्रिया को तेज करना है।
यह अब तक का सबसे बड़ा ईटीएम संस्करण है, जिसमें 2,500 से अधिक प्रतिनिधि, 250 से अधिक वक्ता, 44 तकनीकी सत्र और 220 से अधिक प्रदर्शनी स्टॉल हैं।
कार्यक्रम के दौरान एक अनौपचारिक बातचीत में श्री हरदीप सिंह पुरी ने चर्चा की कि भारत ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधाओं का सामना कैसे किया और साथ ही यह भी सुनिश्चित किया कि उपभोक्ताओं को इस संकट के पूरे असर से बचाया जा सके। उन्होंने घरेलू उत्पादन, वैकल्पिक आयात और अंतिम छोर तक वितरण में कार्य करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए एलपीजी उत्पादन में काफी वृद्धि की गई थी। इस चर्चा में आवश्यक ईंधन की आपूर्ति निरंतर बनाए रखने के लिए तेल और गैस क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों, रिफाइनरियों और वितरण नेटवर्कों के बीच समन्वय की भूमिका पर भी जोर दिया गया।

इस बातचीत में आपूर्ति के विविध स्रोतों, घरेलू उत्पादन में वृद्धि और ईंधनों के व्यापक विकल्पों के माध्यम से भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा-सक्षमता को मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। मंत्री ने संपीडित बायोगैस (सीबीजी) की उस क्षमता पर प्रकाश डाला, जिसके माध्यम से कृषि अवशेषों और जैविक कचरे को ऊर्जा में बदला जा सकता है। साथ ही किसानों तथा ग्रामीण समाज के लिए अतिरिक्त मूल्य भी पैदा किया जा सकता है। सतत विमानन ईंधन और अगली पीढ़ी के अन्य जैव-ईंधनों में मौजूद अवसरों पर चर्चा की गई। इसके साथ ही, घरेलू अनुसंधान को सुदृढ़ करने, स्टार्टअप्स को सहयोग देने और भारतीय तकनीकों को विकास और शुरुआती चरणों से निकालकर व्यावसायिक स्तर तक ले जाने की आवश्यकता पर भी बात हुई।
उन्होंने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधाओं के प्रति भारत की प्रतिक्रिया और ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने में तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) की भूमिका पर भी चर्चा की। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे ओएमसी ने पश्चिम एशिया संकट के दौरान रिफाइनरियों, आपूर्ति नेटवर्क और वितरण चैनलों के बीच समन्वय स्थापित करके, आवश्यक ईंधन की आपूर्ति को लगातार बनाए रखा। इस चर्चा में घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने, आयात के स्रोतों में विविधता लाने और वैश्विक आपूर्ति में रुकावटों के असर से उपभोक्ताओं को बचाने के उपायों पर भी बात हुई।
मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि ऊर्जा स्रोत चुनने के भारत के फैसले उसके राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा आवश्यकताओं से तय होते हैं। उन्होंने इस बात को भी रेखांकित किया कि देश में एक लाख से अधिक रिटेल आउटलेट हैं, लेकिन हमने यह सुनिश्चित किया कि एक भी आउटलेट पर ईंधन खत्म न हो।
इस बातचीत में घरेलू उत्पादन बढ़ाने और ऊर्जा के विविध स्रोतों को अपनाकर दीर्घकालिक ऊर्जा सुदृढ़शीलता के तरीकों पर भी चर्चा हुई। इसमें कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) की संभावनाओं, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल और अगली पीढ़ी के बायोफ्यूल के अवसरों, तथा स्वदेशी ऊर्जा तकनीकों के व्यावसायीकरण में तेजी लाने के लिए भारत के अनुसंधान और विकास पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर विचार किया गया।
इस कार्यक्रम में एक अहम घोषणा यह थी कि विस्तृत विचार-विमर्श के बाद एक राष्ट्रीय तेल और गैस अनुसंधान एवं विकास दृष्टिकोण तैयार किया जाएगा। इसके कार्यान्वयन का समर्थन करने के लिए, सरकार राष्ट्रीय हाइड्रोकार्बन प्रौद्योगिकी केंद्र (एनएचटीएच) की स्थापना कर रही है, जो इस क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के समन्वय के लिए एक विस्तारित संस्थागत मंच है।

एनएचटीएच मौजूदा उच्च प्रौद्योगिकी केंद्र (सीएचटी) को समाहित कर लेगा और व्यापक कार्यक्षेत्र के साथ काम करेगा, जिसमें केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों, निजी क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास, स्टार्ट-अप, एमएसएमई, शिक्षाविदों, उत्कृष्टता केंद्रों और अनुसंधान संस्थानों को साझा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के आसपास एक साथ लाया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य समन्वय को मजबूत करना, दोहराव को कम करना और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास और तैनाती में तेजी लाना है, जिससे ‘एक विजन, एक इकोसिस्टम’ के दृष्टिकोण के तहत एक अधिक परस्पर ऊर्जा अनुसंधान इकोसिस्टम तैयार हो सके।
मंत्री ने प्रदर्शनी का भी जायजा लिया। यहां प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, प्रक्रिया लाइसेंसदाताओं, इंजीनियरिंग फर्मों और ऊर्जा कंपनियों ने डाउनस्ट्रीम हाइड्रोकार्बन क्षेत्र के लिए उत्पादों, प्रौद्योगिकियों और समाधानों का प्रदर्शन किया गया है। इस प्रदर्शनी ने हितधारकों को तकनीकी प्रगति प्रदर्शित करने, ज्ञान का आदान-प्रदान करने और उद्योग की उभरती चुनौतियों के समाधान खोजने का अवसर प्रदान किया।
उद्घाटन कार्यक्रम में भारत के ऊर्जा मिश्रण में विविधता लाने और घरेलू ऊर्जा उत्पादन को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई सरकारी पहलों पर भी प्रकाश डाला गया। राष्ट्रीय सर्कुलर बायोएनर्जी योजना ‘गोबरधन’ के तहत वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक के लिए 23,731 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका मकसद कंप्रेस्ड बायोगैस के उत्पादन को बढ़ाना और सर्कुलर बायो-इकोनॉमी को समर्थन देना है। इन प्रयासों के पूरक के रूप में, ‘समुद्र मंथन’ (राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना) के लिए वित्त वर्ष 2030-31 तक 84,084 करोड़ रुपये का परिव्यय मंजूर किया गया है। इसका उद्देश्य गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देना और भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा में योगदान देना है।
मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया से बातचीत की और भारत के ऊर्जा परिदृश्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। इनमें ईंधन की उपलब्धता, ऊर्जा सुरक्षा, ऊर्जा परिवर्तन (एनर्जी ट्रांजिशन) और ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की पहल जैसे विषय शामिल थे।
29 अक्टूबर तक चलने वाले ईटीएम 2026 में तकनीकी प्रस्तुतियां, पैनल चर्चा, पोस्टर सत्र और एक प्रदर्शनी शामिल है। फोकस क्षेत्रों में ग्रीन हाइड्रोजन, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल, कार्बन कैप्चर, कच्चे तेल से रसायन बनाना, बायोफ्यूल, गैस-आधारित ऊर्जा, रिफाइनिंग तकनीकें और डिजिटलीकरण शामिल हैं। यह कार्यक्रम भारत और विदेशों के विशेषज्ञों को एक साथ लाता है, ताकि वे शोध साझा कर सकें, उद्योग जगत से जुड़े दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान कर सकें और तकनीकी प्रगति को व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक समाधानों में बदलने के अवसरों की पहचान कर सकें।
इस कार्यक्रम में ‘एमसी 2 इग्नाइट के साथ-साथ भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम बनाने पर सत्र शामिल हैं। इसके अलावा इसमें ‘स्टार्टअप अवार्ड्स’ और ‘रिफाइनरी परफॉरमेंस एंड इनोवेशन अवार्ड्स’ भी दिए जाएंगे, जो ऊर्जा उद्योग में तकनीकी प्रगति और नवाचार को मान्यता देते हैं। भारतीय पेट्रोलियम उद्योग महासंघ (एफआईपीआई) द्वारा आयोजित एक अनुसंधान एवं विकास सम्मेलन में भारत के ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देते हुए नेट ज़ीरो रिफाइनरियों, ऊर्जा दक्षता, हरित हाइड्रोजन, बायोमास के मूल्यवर्धन, जल प्रबंधन और उभरती प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
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